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प्रेम रोग है या संजीवनी ?

प्रेम रोग है या संजीवनी ? प्रेम नामक पेचीदा पहेली की साहित्यिक, सामाजिक और डॉक्टरी पड़ताल कर रहे हैं. Read More>> प्रेम, राजनीति और नेहरू-गांधी परिवार भारतीय राजनीति के शीर्ष पर खड़ा एक ऐसा परिवार जिसने अकसर राजनीति के आगे प्रेम को तरजीह दी. प्रियदर्शन का आलेख. Read More>> सनेह  

प्रेम की लोककथाएं

जेठवा-उजली (राजस्थान) जेठवा के विरह में उजली के छंदों को जोड़कर बुनी गई बड़ी मार्मिक लोककथा है जेठवा-उजली. खास तौर पर गुजरात और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में लोकप्रिय यह कथा यहां की संस्कृति के दो अहम पहलुओं ‘प्रेम’ और ‘शरणागत की रक्षा’ को दिखाती है. Read More>> ढोला-मारू (कच्छ) यों  

जेठवा-उजली (राजस्थान)

जेठवा के विरह में उजली के छंदों को जोड़कर बुनी गई बड़ी मार्मिक लोककथा है जेठवा-उजली. खास तौर पर गुजरात और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में लोकप्रिय यह कथा यहां की संस्कृति के दो अहम पहलुओं ‘प्रेम’ और ‘शरणागत की रक्षा’ को दिखाती है. कथा में शिकार खेलने निकला धूमलीनगर  

हर कीमत पर जो प्रधानमंत्री बनने को आतुर रहे

  येन केन प्रकारेण सफल रहे | जो रह गए | जिन्होंने सोचा न था… नरेंद्र मोदी: अग्रतम, व्यग्रतम पिछले साल 15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह परंपरा के मुताबिक लाल किले से अपना भाषण देने वाले थे तो उससे एक दिन पहले भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के  

चंद्रशेखर

बड़ी आशाओं के साथ  जनता पार्टी सरकार 1977 में सत्ता में आई थी. पर जब यह लगने लगा कि यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ रही है तो उस वक्त सरकार चलाने वालोें को कुछ शुभचिंतकों ने सलाह दी कि इन  टकरावों को टालने का रास्ता यह है कि किसी  

‘मुझे आज तक समझ में नहीं आया कि कैसे च्यूइंगम का रिश्ता जंजीर से जुड़ सकता है’

अमिताभ बच्चन के साथ साक्षात्कार की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उनसे क्या नया पूछा जाए. फिल्मों से लेकर जिंदगी के तमाम उतार-चढ़ावों तक शायद ही उनका कोई पहलू हो जिस पर सार्वजनिक रूप से बात न हुई हो. सबको लगता है कि वे अमिताभ के बारे में सब कुछ जानते हैं. हाल ही में हुए एक लंबे साक्षात्कार का यह संपादित स्वरूप इस महानायक से जुड़ी कुछ अनछुई परतों को टटोलने की कोशिश है  

सिकंदर कौन?

क्या विधानसभा चुनावों में भाजपा की यह जीत नरेंद्र मोदी की जीत है? या दिल्ली चुनाव में दूसरे नंबर पर रहने के बाद भी केजरीवाल की जीत उनसे कहीं ज्यादा चमत्कारी है? और शिवराज सिंह चौहान की मध्य प्रदेश की जीत में देश के लिए क्या संदेश छिपा है?  

समलैंगिकता की विषमता

सहमति के समलैंगिक संबंधों को भी अपराध करार देने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद समलैंगिकता पर फिर बहस छिड़ गई है. चार साल पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने जब इसके उलट फैसला दिया था तो स्वर्गीय प्रभाष जोशी ने तहलका में एक लेख लिखा था. उनका यह संपादित लेख आज भी इस मुद्दे पर उठ रहे कई सवालों के जवाब देता है  

थप्पड़ों ने लौटाया आत्मविश्वास

रत्नदीप नौटियाल, लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और मुंबई में रहते हैं  

युवाबल से युगपरिवर्तन

महाराष्ट्र में हिवड़े बाजार के लोगों को कभी खाने के लाले थे. लेकिन युवाओं की इच्छा शक्ति ने इसे करोड़पतियों का गांव बना दिया है.