शालिनी माथुर, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
शालिनी माथुर
शालिनी माथुर
Articles By शालिनी माथुर
लोकप्रिय है, लुगदी नहीं

लोकप्रिय साहित्य को लुगदी साहित्य कहना ठीक नहीं है क्योंकि साहित्य के नाम जो कुछ परोसा जा रहा है, उसमें से बहुत कुछ ऐसा है जो लुगदी की तुलना में बहुत ही खराब और बेहद गिरा हुआ है. लोकप्रियता अगर किसी चीज के अच्छे होने का प्रमाण नहीं है तो  

सेक्स प्रेम की अभिव्यक्ति हो हिंसा की नहीं

पति-पत्नी के बीच प्यार, शत्रुता, उदासीनता अादि के बारे में कानून मौन रहता है. ऐसे में इच्छा-अनिच्छा और सहमति-असहमति का प्रश्न जटिल हो जाता है  

कुछ समाज ने मारा, बाकी संरक्षण ने

देश के नारी निकेतनों में रखी गईं निरपराध किशोरियों के यहां आने की कहानी जितनी त्रासद है उतनी ही यहां रहने की भी  

मर्दों के खेला में औरत का नाच

सितंबर, 2008 में अपने एक लेख ‘नवरीतिकालीन संपादक और उनके चीयर लीडर्स’ में मैंने हंस संप्रदाय के तत्वावधान में पोर्नोग्राफी को साहित्य बताने तथा हर स्त्री को सेक्स वर्कर साबित करने के प्रयासों की कड़ी भर्त्सना की थी. उसी समय मैंने यह लेख भी लिखना शुरू किया था. लेकिन रचनाओं में से अंश उद्धृत करते समय लगा कि इन पर टिप्पणी करना बस अड्डों पर बिकने वाली पीले पन्नों वाली किताबों में छपी अपराधों की अमानवीय घटनाओं पर टिप्पणी...