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संवाददाता, बिहार

Articles By निराला 
‘गंगा को लेकर रोमांटिक नजरिया छोड़ना होगा, अगर उसे बुखार है तो ब्यूटी पार्लर ले जाने की जरूरत नहीं’

गंगा को लेकर हर कुछ दिन पर कोई न कोई बात होती रहती है. कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा में जल परिवहन को फिर से शुरू करने के लिए योजनाओं का एक खाका पेश करते हुए संसद में बताया था कि उन्होंने पूरी तैयारी कर ली  

सांसत में ‘सुशासन बाबू’

वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं. उन्हें वशिष्ठ बाबू या दादा कहकर पुकारा जाता है. वे लालू यादव के प्रिय हैं और नीतीश कुमार के भी विश्वासपात्र हैं. वे धाराप्रवाह बोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन 30 दिसंबर को वे अचानक बोलते-बोलते  

लाल पानी पर लगाम

करीब दो साल पहले की बात है. लालू प्रसाद यादव ‘तहलका’ से बातचीत कर रहे थे. इस दौरान शराब पर बात होने लगती है. लालू कहते हैं, ‘देखिए नीतीश को, उसका लोग शराबबंदी की बात को हवा में उड़ाता है. गरीबों का ‘लाल पानी’ बंद करवा देगा. बताइए गरीबों का  

‘शब्दों में लिंग निर्धारण और उसे याद करने में भारत की जितनी ऊर्जा लग रही है, उतने में रॉकेट बनाया जा सकता है’

आप निरंतर भाषा पर काम करते रहते हैं. कई भाषाओें पर काम करने के अलावा आपने तमाम भाषाओं के शब्दकोश भी तैयार किए हैं. इन दिनों क्या नया कर रहे हैं? भाषा पर निरंतर काम करते रहने से ही जड़ता दूर होगी. भाषा विज्ञान के सामने चुनौतियों का जो पहाड़  

बिहार में दलित राजनीति को नेतृत्व की दरकार

रमाशंकर आर्य पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वे दलित मसलों के जानकार हैं. बिहार के चुनाव परिणाम से खुश दिखते हैं. उनकी खुशी का राज भाजपा की हार में छिपा है. कहते हैं, ‘चलिए यह अच्छा हुआ कि रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी की हार हुई. यह उनके लिए  

इम्तिहां और भी हैं…

कांग्रेसियों के बारे में कहा जाता है कि जब वे सत्ता में होते हैं, तभी नियंत्रित रहते हैं, एकजुट रहते हैं. सत्ता से हटते ही अनुशासन का आवरण उनसे हटने लगता है आैैर बिखराव शुरू हो जाता है. इसके उलट समाजवादियों के बारे में कहा जाता है कि वे संकट  

तुरुप का इक्का

67 साल की उम्र. 11 सालों तक खुद चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति. पिछले लोकसभा चुनाव में पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती, दोनों की बुरी हार. लोकसभा चुनाव के पहले ही दिल का ऑपरेशन और डॉक्टरों की सख्त हिदायत कि न ज्यादा भागदौड़ करनी है, न ही तनाव  

‘बिहार में अब भी सामंती ताकतें हैं और सरकार  उन्हें संरक्षण देती रही है’

बिहार के चुनाव परिणाम को आप किस तरह से देखते हैं? बिहार की जनता को बधाई. यह भाजपा के खिलाफ एक जरूरी जनादेश है. यह चुनाव राष्ट्रीय संदर्भ में लड़ा गया था. राष्ट्रीय संदर्भ ही इसमें प्रधान बन गया था. 17 माह की सरकार में ही केंद्र की सरकार ने  

माओवादी और काॅरपोरेट ने पिछले 15 सालों में झारखंड को तिजोरी की तरह ही देखा

झारखंड 15 साल का हो गया. आप जैसे लोग झारखंड आंदोलन से जुड़े रहे हैं. इस 15 सालों के सफर में झारखंड की दशा-दिशा पर क्या सोचते हैं? झारखंड बनने के लिए लंबा आंदोलन चला. राज्य बनने के पहले भीतरी-बाहरी की लड़ाई थी. हम लोगों ने समझ लिया कि ऐसा  

विकास पर भारी जुबानी बिसात

बिहार में इस बार का चुनाव कई मायने में दिलचस्प है. 2010 से 2015 के बीच जो विधानसभा के सदस्य रहे, उनमें से सारे सत्ता और विपक्ष दोनों का मजा ले चुके हैं. जदयू सत्ता में भी रही है और एक दिन के लिए विपक्ष में भी, जब जीतन राम