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निराला 

संवाददाता, बिहार

Articles By निराला 
आग का ‘झरिया’

धधकते अंगारों पर चलने की कला सदियों से दुनिया को आश्चर्यचकित और रोमांचित करती रही है. झारखंड के अनेक हिस्सों में यह कला आज भी जीवित है और लोगों की मान्यता है कि इसे वे लोग ही कर सकते हैं जिन्हें अलौकिक शक्ति प्राप्त है. झरिया कोयलांचल के लाखों लोग  

मोदी, भाजपा या राजनीति तो महज हथियार हैं, राष्ट्रवाद का उन्माद तो पूंजीवादियों को चाहिए : सच्चिदानंद सिन्हा

देश में इन दिनों राष्ट्रवाद का हो-हल्ला कुछ ज्यादा ही मचा हुआ है. आपने इस बारे में सुना और पढ़ा ही होगा लेकिन इस विषय पर कुछ कहा नहीं. क्या सोचते हैं आप? इस विषय को अगर प्रचलित तौर-तरीकों से समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि यह शब्द  

किसका झारखंड?

23 जुलाई, 2002 की बात है. पहली बार रांची पहुंचा था. काम के सिलसिले में जब अगली सुबह निकला तो देखा कि सड़कें वीरान होने लगीं. चारों ओर भय-दहशत का माहौल. तोड़फोड़-आगजनी का दौर शुरू हुआ. गाड़ियां बंद. जो जहां था वहीं छिपने की कोशिश करने लगा. एक-दूसरे के पास  

सियासी  शराब

बिहार में एक वरिष्ठ पत्रकार हैं जो एक जमाने में लालू यादव के काफी करीबी रहे हैं. शराबबंदी के आदेश के दिन संयोग से उनके साथ ही था. वे एक किस्सा सुनाते हैं. उन दिनों का किस्सा जब लालू यादव का बिहार में नया-नया उभार हो रहा था. उन्हें सत्ता  

बच्चों को हथियार बनाते माओवादी!

तीन मार्च को झारखंड के गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के जमदी और कटिया गांवों से एक खबर आती है. भाकपा माओवादी ने दोनों गांवों से बच्चों की मांग की है. इसे न मानने पर जंगल से जलावन के लिए लकड़ी काटने और पशुओं को चराने पर रोक लगा देने  

बिहार पंचायत चुनाव : बदलाव की बयार

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की बड़गांव पंचायत. पूरे बिहार की तरह वहां भी इन दिनों पंचायत चुनाव की सरगर्मी है. उस पंचायत से तीन बड़े नामदार ठाकुर उम्मीदवार मुखिया पद के लिए मैदान में उतरे हैं. इन तीनों मजबूत उम्मीदवारों के सामने शंभू डोम नाम का एक मामूली हैसियत  

कर्ज में झारखंड, बढ़ता विधायक फंड

बात फरवरी महीने की है. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास एक आयोजन में मुंबई गए थे. उस आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी भी शिरकत कर रहे थे. कार्यक्रम में उन्होंने रघुबर दास का परिचय कराया, ‘ये हैं हमारे सबसे अमीर राज्य के मुख्यमंत्री.’ इस पर रघुबर दास फूले नहीं समाए. कुछ  

सीवान, शहाबुद्दीन और एक हताश पिता का संघर्ष

फरवरी के पहले सप्ताह में एक खबर आई कि शहाबुद्दीन को बहुचर्चित तेजाब कांड में जमानत मिल गई है. शहाबुद्दीन, सीवान और तेजाब कांड, तीनों का नाम एक साथ सामने आते ही बिहारवासियों के जेहन में कई खौफनाक यादें ताजा हो उठती हैं. बिहार के सीमाई इलाके में बसे सीवान  

साइमन उरांव : जल, जंगल और जमीन का सर्जक

गणतंत्र दिवस के ठीक पहले की बात है. हर बार की तरह इस बार भी रस्मअदायगी अंदाज में पद्म सम्मानों को लेकर घमासानी वाकयुद्ध छिड़ा हुआ था. फलाना को क्यों मिला, फलाना पर नजर क्यों नहीं गई, फलाना तो सेटिंग-गेटिंग कर पद्म सम्मान लेने में सफल रहे. ऐसी ही बातें  

बिहार में अपराधियों की बहार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 फरवरी को राज्य में सुशासन की बहाली और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बैठक खत्म कर उठने ही वाले होते हैं कि तभी भोजपुर इलाके से खबर आती है कि सोनवर्षा बाजार में विशेश्वर ओझा की हत्या कर दी गई. विशेश्वर