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संवाददाता, बिहार

Articles By निराला 
बिहार : शराबबंदी की सनक?

‘मैं बर्बाद हो जाऊंगा मगर शराबबंदी से समझौता नहीं करूंगा. विपक्ष कहता है कि मैं शराबबंदी के नशे में हूं. हां, मुझ पर शराबबंदी का नशा है. जो पिए बिना नहीं रह सकते, वे कहीं और चले जाएं. क्योंकि अब बिहार में शराब पीने की गुंजाइश नहीं है. जिन्हें जितना  

गाद, गंगा और फरक्का बांध

बीते 16 जुलाई की बात है. नई दिल्ली में अंतरराज्यीय परिषद की बैठक थी. सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तमाम मुद्दों को उठाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरक्का बैराज परियोजना पर भी सवाल उठा  

आदिवासी हूं, मुश्किलों को चुनौती नहीं मानता और खुद को माओवादी कहे जाने से भी नहीं घबराता : बीजू टोप्पो

आपने बीकॉम की पढ़ाई की है, पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी की है. फिर कैमरे से लगाव कैसे हो गया? जब मैं रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ रहा था तभी से राजनीति और सामाजिक सरोकारों में मन रम गया था. रांची आया तो हमारे कुछ साथियों ने मिलकर पलामू छात्रसंघ  

भाजपा से दूर होते मांझी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कब क्या बोलेंगे, यह सिर्फ वही जानते हैं. वे सुबह कुछ और शाम को कुछ और बोल सकते हैं. वे इतनी बार बयान बदलते हैं कि भले ही उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाए लेकिन वे चौंकाने वाले होने की वजह  

‘बिहार में लालू-नीतीश से ही पिछड़ों-दलितों की राजनीति की शुरुआत नहीं होती. मैं पिछड़े जमात से बना पहला मुख्यमंत्री था’

आप तो बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य में अधिकांश लोग जानते तक नहीं कि मांझी, लालू, राबड़ी, जगन्नाथ मिश्र के अलावा आप भी यहां के मुख्यमंत्री रहे हैं. जो आपको जानते हैं वे कहते हैं कि आप तो दो से तीन दिन के मुख्यमंत्री थे. चलिए कोई दो दिन  

पटना आर्ट कॉलेज में अराजकता

टाॅपर की फैक्ट्री सरीखा काॅलेज चलाने वाले बच्चा राय जेल में हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व प्रमुख लालकेश्वर प्रसाद भी जेल में हैं. उनकी पत्नी पूर्व विधायक उषा सिन्हा भी जेल में हैं. इन सबके साथ अटपटे तरीके से बिहार में इंटर की टाॅपर रही रूबी राय भी  

नीतीश कुमार : आधी छोड़, पूरी को धावे

  पटना कुछ मायने में जानदार शहर है. जानदार होने का एक नमूना इस शहर में लगने वाली चौपालों में जाकर समझ सकते हैं. रोजाना बारहों मास यहां कई चौपालें लगती हैं. रोजाना गपबाजी पसंद करने वाले लोग बतकही के अड्डों पर जाना कभी भी नहीं भूलते. बतकही का विषय  

सीवान : बिहार सरकार की सीमा समाप्त

हाल ही में सीवान जाना हुआ. मशहूर मोदियाइन की दुकान पर लिट्टी-चोखा खाया और लोगों से बतकही हुई. मिट्टी के बर्तनों के लिए मशहूर बबुनिया रोड पर भी चहलकदमी हुई. मिट्टी के बर्तन की दुकानों पर आने वाले लोगों से मुलाकात होती है. सब जगह एक ही सवाल होता है-  

कहानी राजकुमार शुक्ल की, जिन्होंने चंपारण में तैयार की गांधी के सत्याग्रह की जमीन

जो चंपारण में गांधी के सत्याग्रह को जानते हैं, वे राजकुमार शुक्ल का नाम भी जानते हैं. गांधी के चंपारण सत्याग्रह में दर्जनों नाम ऐसे रहे जिन्होंने दिन-रात एक कर गांधी का साथ दिया. अपना सर्वस्व त्याग दिया. उन दर्जनों लोगों के तप, त्याग, संघर्ष, मेहनत का ही असर रहा  

चंपारण सत्याग्रह के 100 साल

न जाने कितनी बार चंपारण जाना हुआ है. दोनों चंपारण. यानी पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण. हमेशा से आकर्षित करता रहा है चंपारण. संघर्ष और सृजन, दोनों एक साथ करने की जो अद्भुत क्षमता है चंपारण में, वही आकर्षण का कारण है. पहली बार फूलकली देवी का काम सुनकर यहां