ज्ञान चतुर्वेदी, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
ज्ञान चतुर्वेदी
ज्ञान चतुर्वेदी

ज्ञान चतुर्वेदी, व्यंग्यकार व चिकित्सा विशेषज्ञ

Articles By ज्ञान चतुर्वेदी
‘दारु-विमर्श तथा अन्य स्वास्थ्यवर्धक बातें’

क्या दारू स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है? क्या शुगर फ्री टाइप की चीजें या जीरो कैलोरी ड््रिंक्स वगैरह लेने से वजन नहीं घटता? आपका लेख पढ़कर तो ऐसा ही लगा. कभी एंटीऑक्सीडेंट्स क्या होते हैं, यह भी तो बतला दें. कहते हैं कि स्वस्थ रहने में इनका भी  

‘बहुत बड़ा सिर दर्द है, यह सिरदर्द भी’

‘सिर दर्द स्वयं में एक बीमारी नहीं हो, ऐसा भी संभव है. सिर दर्द किसी और बीमारी का लक्षण भी हो सकता है’  

खत्म ही नहीं होती गलतफहमियों की फेहरिस्त’

यहां हम स्वास्थ तथा विभिन्न बीमारियों को लेकर फैली आम गलतफहमियों की चर्चा कर रहे हैं. तो कुछ और ऐसी ही गलतफहमियों की चर्चा हो जाए. 1. एंटीबायटिक्स ‘गरम’ करती हैं : कोई इंफेक्शन हो जाए तो डॉक्टरों के हाथ में ‘एंटीबायटिक्स’ नाम का एक बड़ा कारगर हथियार है. वह  

‘हाइपोनेट्रीनिया का तिलिस्म’

‘हाइपोनेट्रीमिया के कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन आने लगती है. इसकी शुरुआत सिर दर्द, जी मितलाने और थकान होती है.’  

‘पेसमेकर का लगना, और उसके बाद’’

अब तनिक पेसमेकर को और गहराई से समझ लें. वैसे, यह भी जान लें कि पेस मेकर का ज्ञान इतना ज्यादा गहरा है कि थोड़ी बहुत, आपके काम के लायक बातें ही मैं यहां बताऊंगा वे गहरे पानी पैठ ‘की जगह’ रहा किनारे बैठ जैसी ही हैं. पर वही काफी  

दिल का इन्वटटर- ‘पेसमेकर’

आजकल हम यत्र-तत्र सुना करते हैं कि फलाने साहब को ‘पेसमेकर’ लगाना पड़ा. बड़ा भ्रम है ‘पेसमेकर’ के बारे में. कई अफवाहें हैं. जैसे यह कि पेस-मेकर में भी इकॉनामी और डीलक्स मॉडल हैं जो आदमी की हैसियत के हिसाब से ऑफर किए जाते हैं. यह बात अर्धसत्य है. सच  

‘आजकल थका-थका लगता है, डॉक्टर सा’ब’

‘यदि डॉक्टर जल्दी में हो या गहराई से न पूछे तो उनसे कोई बड़ी बीमारी छूट सकती है. तो सोच समझकर अपनी तकलीफ सही से पूछें’  

‘भूख न लगे, तो कारण पचासों !’

‘डॉक्टर साहब, मुझे भूख क्यों नहीं लगती?’, इस प्रश्न के दसों उत्तर हो सकते हैं. एक साहब तो यही पूछने लगे कि खाना खाने के बाद मुझे भूख लगती ही नहीं- क्या करूं? याद रहे कि यदि पेट पहले ही खुशी, विषाद, चिंता या खाने से भरा हो, तो भूख  

भूख का सिस्टम

‘भूख खत्म करने वाली इतनी बीमारियां हैं कि कोई सहृदय, सक्षम और चुस्त डॉक्टर ही उसकी जड़ तक पहुंच सकता है’  

‘चक्कर का चक्कर’

‘चक्कर’ आना एक बेहद आम-सी तकलीफ है. यह कहने के बाद मैं इसमें यह बात जोड़ना चाहूंगा कि ‘चक्कर आने’ वाले मरीज को ‘चक्कर’ होता ही नहीं फिर भी वह न केवल यही कहता फिरता है कि मुझे चक्कर आ रहे हैं बल्कि डॉक्टर भी चक्कर की दवाएं देते रहते