बृजेश सिंह, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
बृजेश सिंह
Articles By बृजेश सिंह
क्या घाटी का मुस्लिम समाज कश्मीरी पंडितों की वापसी चाहता है?

कहां से : कश्मीर घाटी कब से : 1989 कितने :  तकरीबन 3,00,000 घाटी से कश्मीरी पंडितों को विस्थापित हुए 26 साल हो गए. पंडितों की एक नई पीढ़ी सामने है और सामने है यह प्रश्न भी कि क्या कभी ये लोग वापस अपने घर कश्मीर जा पाएंगे. 14 सितंबर,  

‘शासन करने की बेहतर क्षमता का लिंग से क्या संबंध’

  वर्तमान में किन्नर समाज की क्या स्थिति है? किन्नर समाज की स्थिति में पहले की अपेक्षा थोड़ा सुधार हुआ है. किन्नर समाज की अब तक की यात्रा काफी संघर्षपूर्ण रही है. पहले तो सरकारों ने उनके अस्तित्व को ही नकार दिया था. अब जाकर उन्हें देश का नागरिक मानते  

‘हमने गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी नहीं लगाई, उसे नियंत्रित किया है’

हाल ही में गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में बिना मंजूरी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है. मंदिर प्रबंधन की ओर से जारी किए गए नोटिस के मुताबिक ‘श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग हिंदुओं के लिए तीर्थ स्थान है. इस पवित्र तीर्थ स्थल पर गैर हिंदुओं को प्रवेश के लिए (मंदिर के) महाप्रबंधक कार्यालय से इजाजत लेनी होगी.’ गैर हिंदुओं को लेकर बनाए गए इस नियम के सामने आने के बाद से ही विवाद छिड़ गया है....  

बेमेल ब्याह और तलाक के हजार बहाने

हर सरकार का एक हनीमून पीरियड होता है. एक ऐसा समय जब नई सरकार के लिए सब कुछ सुखद और गुलाबी होता है. हर व्यक्ति उसे समय देने के लिए तैयार रहता है, कोई खास आलोचना नहीं होती, न ही किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद की जाती है. यह किसी भी सरकार के लिए सबसे सुखद और तनावमुक्त समय होता है. लेकिन हर सरकार को मिलनेवाली यह छूट जम्मू कश्मीर की पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार को नसीब नहीं हुई....  

बेमेल ब्याह और तलाक के हजार बहाने

हर सरकार का एक हनीमून पीरियड होता है. एक ऐसा समय जब नई सरकार के लिए सब कुछ सुखद और गुलाबी होता है. हर व्यक्ति उसे समय देने के लिए तैयार रहता है, कोई खास आलोचना नहीं होती, न ही किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद की जाती है. यह किसी भी सरकार के लिए सबसे सुखद और तनावमुक्त समय होता है. लेकिन हर सरकार को मिलनेवाली यह छूट जम्मू कश्मीर की पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार को नसीब नहीं हुई....  

दिल्ली चुनाव: किरण भरोसे भाजपा

मोदी के चेहरे पर एक के बाद एक सुबाई किले फतह करनेवाली भाजपा का आत्मविश्वास दिल्ली में हिला हुआ है. तामझाम के साथ भाजपा का चेहरा बनी किरण बेदी का दांव भी पार्टी को उल्टा पड़ता दिख रहा है  

प्यादों से पिटता वजीर!

लव जेहाद, घर वापसी और नाथूराम गोडसे जैसे मुद्दे सरकार पर हावी होते दिख रहे हैं, लेकिन विकास और सुशासन के नाम पर जनादेश लेकर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बारे में चुप्पी संदेह पैदा करती है  

छह माह पार, आनंदीबेन सरकार

गुजरात में एक दशक से अधिक समय तक एकछत्र राज करने के बाद नरेंद्र मोदी ने दिल्ली कूच करने से पहले अपनी जिस राजनीतिक साथी आनंदीबेन पटेल को अपना उत्तराधिकारी चुना था, वह मुख्यमंत्री के तौर पर छह महीने का कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं. ऐसे में यह जानना दिलचस्प  

डल में कमल

हाल के दिनों में कश्मीर के पूर्व पृथकतावादी नेता सज्जाद लोन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात बड़ी चर्चा में रही. लोन कश्मीर के उन पृथकतावादियों में से रहे हैं जिन्हें भाजपा कुछ समय पहले तक देशद्रोही और पाकिस्तानी एजेंट जैसे विशेषणों से नवाजती रही है. इनसे मिलना और चाय-पानी  

चूक गए तो चुक गए

‘यहां जितने विधायक बैठे हैं. मैं उन सभी से हाथ जोड़कर कहूंगा कि घमंड में कभी मत आना. अहंकार मत करना. आज हम लोगों ने भाजपा और कांग्रेसवालों का अहंकार तोड़ा है. कल कहीं ऐसा न हो कि किसी आम आदमी को खड़ा होकर हमारा अहंकार तोड़ना पड़े. ऐसा न