अमित सिंह, Author at Tehelka Hindi | Page 2 of 4 — Tehelka Hindi
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Articles By अमित सिंह
उपभोक्ता फोरम : ग्राहकों का मरहम

एस्कार्ट हार्ट इंस्टिट्यूट ऐंड रिसर्च सेंटर (हॉस्पिटल) देश के नामचीन अस्पतालों में शुमार है. यहां एक महिला के पैर में खून का प्रवाह रुकने पर उसके दिल का ऑपरेशन किया गया. बावजूद इसके महिला के पैर का दर्द कम होने के बजाय बढ़ता ही गया. तबीयत बिगड़ने पर उनके इलाज  

जाट आंदोलन के समय पुलिस ने उपद्रवियों को खुली छूट दे रखी थी : प्रकाश सिंह

हरियाणा में इस साल फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, लूटपाट व आगजनी की घटनाओं के दौरान पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन राज्य सरकार ने किया था.  

‘अगर लिंग परीक्षण पर सजा का प्रावधान है तो ऐसे मां-बाप को क्यों नहीं दंडित किया जाना चाहिए जो अपने किन्नर बच्चों को कहीं छोड़ आते हैं?’

आपका  ‘थर्ड जेंडर’  यानी किन्नरों की जिंदगी पर आधारित  उपन्यास  ‘नालासोपारा पो. बॉक्स नं. 203’  हाल ही में प्रकाशित हुआ है. किन्नरों की जिंदगी पर उपन्यास लिखने का विचार कहां से आया? इस उपन्यास में खास क्या है? इस उपन्यास में मैंने आजाद भारत में किन्नरों की स्थिति पर प्रकाश  

‘गांधी’ जो नाव डुबोए…

कहावत है कि राजनीति में कुछ भी पुराना नहीं होता है. भारतीय राजनीति में तो नारे, जुमले, भाषण आदि में से कुछ भी पुराना नहीं हो रहा है. गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसी बातों पर साठ-सत्तर के दशक में जैसे नारे और भाषण दिए जाते थे वैसे आज भी दिए जा  

‘सत्ता हस्तांतरण संधि से पता चल पाएगी नेताजी की सच्चाई’ : राम तीर्थ विकल

गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की ‘गुमनाम’ मौत के 42 दिन बाद फैजाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘नये लोग’ के दो पत्रकार राम तीर्थ विकल और उनके सहयोगी चंद्रेश कुमार ने गुमनामी बाबा के नेताजी होने का दावा करते हुए पहली खबर लिखी. इस खबर को अखबार के पहले  

नेताजी गुमनाम!

कभी अवध की राजधानी रहा फैजाबाद जिला अपने भीतर तमाम तरह की रहस्यमयी कहानियां समेटे हुए है. सरयू नदी के किनारे बसे इस शहर में ऐसी ही एक कहानी की शुरुआत 16 सितंबर, 1985 को तब होती है जब शहर के सिविल लाइंस में स्थित ‘राम भवन’ में गुमनामी बाबा  

केशव के हाथ कमल

कहते हैं कि राजनीति में टोटके खूब चलते हैं. ऐसा ही एक टोटका सत्तारूढ़ भाजपा में चल रहा है. यह टोटका हिंदुत्व, पिछड़ा और चायवाला कंबिनेशन का है. लोकसभा चुनाव में ऐसे ही उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बड़ी जीत दर्ज की तो अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐसे ही  

‘हम मुकदमा जीत गए तो भी मस्जिद निर्माण तब तक नहीं करेंगे, जब तक हिंदू बहुसंख्यक हमारे साथ नहीं आते’

अयोध्या में हाशिम अंसारी को ढूंढना सबसे आसान काम है. किसी भी चौराहे पर खड़े होकर अगर आप उनके घर का पता पूछेंगे तो लोग आपको उनके घर पहुंचा देंगे. कोई उन्हें जिद्दी कहता है तो कोई कहता है बहुत बूढ़े हो गए हैं आराम से बतियाना, लेकिन सारे लोग  

‘हम चाहते हैं कि दुनिया देखे कि पाकिस्तानी तंगनजर नहीं हैं, वे हीरो का एहतराम करते हैं, चाहे वह किसी भी मजहब से क्यों न हो’

भगत सिंह को निर्दोष साबित करने का विचार कहां से आया? इसकी शुरुआत कैसे हुई? देखिए, भगत सिंह निर्विवाद रूप से आजादी के सबसे बड़े हीरो हैं. मेरे पूर्वजों ने भी आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी. वे आपके हरियाणा के सिरसा में रहते थे. वहां हमारे पूर्वज बाबा गुलाब  

हम नास्तिक क्यों हैं…

‘देखिए भैया, हम बहुत मेहनत करके शाम की रोटी का जुगाड़ करते हैं. हमें ये पता है कि हम मेहनत नहीं करेंगे तो बच्चों के साथ भूखा ही सोना पड़ेगा. ऐसे में हम अपनी मेहनत का श्रेय भगवान को नहीं दे सकते. या कहिए कि हम भगवान को नहीं मानते