‘मोदी से मुलाकात ने चुनाव में मुझे बराबरी का मौका दिया है’

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आपकी राजनीति क्या है? अलगाववाद को छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आने के बाद भी लोगों को साफ समझ में नहीं आ रहा है. कश्मीर समस्या के हल के लिए आपने जो ‘अचीवेबल नेशनहुड’ का फार्मूला तय किया था, उसी के हिसाब से राजनीति करेंगे?
जी हां मैं ‘अचीवेबल नेशनहुड’ से प्रभावित रहूंगा.बल्कि इसके हर शब्द से. लेकिन मुझे यह भी पता है कि उसमें लिखे शब्द ईश्वर के लिखे नहीं हैं. मेरी इच्छा है कि एक बहस शुरू हो. एक बार बहस पैदा हो जाए तो फिर हम आम सहमति से हल निकाल सकते हैं. ‘अचीवेबल नेशनहुड’ के आर्थिक पहलू एक सभ्य समाज के लिए बेहद व्यावहारिक हैं. हमें खुद को अंदर और बाहर से आर्थिक तौर पर आजाद करना होगा. मैं लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण चाहता हूं. मेरा तात्पर्य है, केंद्र हमें आर्थिक रियायतें दे न कि खैरात. जहां तक बात राज्य के राजनीतिक सशक्तीकरण की है, तो हम केंद्र और राज्य के बीच सत्ता में साझेदारी के समझौते और राज्य की संपन्नता के बारे में बात कर रहे हैं. मेरा मानना है कि राज्य में संपन्नता और सक्षमता होनी चाहिए. मैं आंतरिक स्वायत्तता की बात नहीं कर रहा हूं.

आपकी पत्नी आस्मा जो जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के संस्थापक अमानुल्ला खां की बेटी और एक पाकिस्तानी नागरिक हैं, मोदी के साथ आपकी मुलाकात पर उनकी क्या प्रतिक्रिया रही?
वह मुझसे क्या कहेंगी? उनके अपने प्रधानमंत्री मोदी से मिलते हैं. प्रधानमंत्री से मिलना कोई पाप नहीं है. मुफ्ती भी उनसे मिलते हैं, अब्दुल्ला भी मिलते हैं और उनको इसमें कोई शर्म नहीं है. इसका असर उनकी राजनीति पर नहीं दिखता.

इस चुनाव में आपको लेकर जो विवाद उठे हैं उन्हें देखते हुए क्या आप अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं?
जी हां,  मैं डर महसूस करता हूं. इस चुनाव से पहले कभी मुझे लेकर इतनी नकारात्मक बातचीत नहीं हुई. मैं हमेशा अपने समर्थकों के बीच रहा. कुछ भी हो सकता है. कुछ खुफिया खबरें भी हैं. यही वजह है कि मैंने कम से कम प्रचार अभियान के दिनों में जैमर लगाने का अनुरोध किया था लेकिन वह मिल नहीं सका.

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