मोदी को दिखाए काले झंडे, ‘गो बैक’ के नारे

नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ उत्तर पूर्व में गुस्सा

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प्रधानमंत्री को अपने उत्तर पूर्व के दौरे में लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा है। लोगों में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ गुस्सा है। मोदी को लगातार दूसरे दिन लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा और दो जगहों पर उनके विरोध में काले झंडे दिखाए गए।

शुक्रवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम मोदी का भारी विरोध हुआ। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक हवाई अड्डे से राजभवन जाने के दौरान ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी को काले झंडे दिखाए और नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान ”मोदी वापस जाओ” के नारे भी लगाए गए।

मोदी २०१९ के चुनाव के सिलसिले में पूर्वोत्तर के दो दिवसीय दौरे पर हैं। आसू सदस्यों ने गुवाहाटी विश्वविद्यालय के गेट पर प्रधानमंत्री को उस समय काले झंडे दिखाए जब वह लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से शाम करीब साढ़े छह बजे राजभवन की ओर जा रहे थे।

उधर विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना घटना की तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा है कि आज नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों द्वारा गुवाहाटी में पीएम मोदी का गुस्से और आक्रोश के साथ काले झंडों से स्वागत किया गया। साथ ही कांग्रेस ने पूछा कि क्या इन लोगों की आवाज सुनी जाएगी?

रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) और ७०  सामाजिक संगठनों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के दौरान उन्हें काला झंडा दिखाने और आंदोलन करने की शुक्रवार को घोषणा की थी।

आसू के प्रमुख सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने बताया कि उनके संगठन ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में मोदी के पुतले जलाए। बता दें कि लोकसभा में ८ जनवरी को नागरिकता संशोधन विधेयक २०१९ पारित किये जाने के बाद मोदी पहली बार असम के दौरे पर हैं।
एनडीटीवी के मुताबिक नागरिकता (संशोधन) विधेयक, २०१६ को लोकसभा में ८ जनवरी को नागरिकता अधिनियम १९५५ में बदलाव के लिए लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके रहने की समय अवधि को ११ साल से घटाकर ६ साल कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी ६ साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। जबकि १९५५ नागरिकता अधिनियम के अनुसार, बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज के बिना या फिर वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा। पूर्वोत्तर के राज्यों में इस बिल के विरोध में राजनीतिक दल आंदोलन कर रहे हैं।