‘ मैं पांच और 10 रु के टिकट बेचकर अपने चुनाव प्रचार के लिए खर्च जुटा रहा हूं’

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विकास किसी भी तरह का हो, उसके कुछ असर होते हैं. हमें देखना पड़ेगा कि उसके कितने बुरे असर हैं और कितने अच्छे. पहले इस बात का आकलन हो कि ऐसे पानी लाने का पश्चिमी घाट के पर्यावरण पर कोई बुरा असर न हो. इस समस्या के व्यावहारिक हल भी हैं, लेकिन राजनेताओं और नौकरशाहों ने कभी उन पर गंभीरता नहीं दिखाई. मोइली ने सिंचाई परियोजना की किसी तकनीकी समझ के बिना ही इस परियोजना का वादा कर दिया. इसे आसान भाषा में धोखा कहा जाता है.

किसानों को फायदा मिले, इसे सुनिश्चित करने के कई रास्ते हैं. उदाहरण के लिए हम इस्राइल के किसानों से काफी कुछ सीख सकते हैं जिन्होंने किसानी के क्षेत्र में कई ऐसी ईजाद की हैं जिससे बहुत कम पानी में ही बहुत अच्छी खेती की जा सकती है. अगर वे ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं?

मुझे दिख रहा है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं. मैं पांच और 10 रु के टिकट बेचकर अपना प्रचार अभियान चला रहा हूं. लोगों को समझ में आ रहा है कि प्रचार के लिए नेता को पैसे देना बेहतर है बजाय इसके कि वह नेता पैसे देकर उनका वोट खरीदे.

(जी विष्णु से बातचीत पर आधारित)

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