मेरा जुर्म क्या है?

नहीं, नहीं, साहब, आप गलत समझ रहे हैं. मैं आपको रिश्वत नहीं दे रहा. अल्लाहतआला ने हाथ में कुछ हुनर दिया है. किसी के काम आ सकूं तो अच्छा लगता है.

क्या कहा, जनाब? मैं बहुत बोलता हूं? नहीं हुजूर, बोलते तो हमारे मुल्क के लीडर हैं. बहुत बोलते हैं, बस करते कुछ नहीं हैं.

आप भीतर के कमरे की तलाशी लेना चाहते हैं? शौक से लीजिए. हम आपसे क्या छिपाएंगे? हमारे पास है ही क्या छिपाने के लिए.

एक बात पूछूं, इंस्पेक्टर साहब? जब भी कभी शहर में दहशतगर्द कोई बम-धमाका कर देते हैं, तब आप और आपकी पुलिस हम लोगों के इलाकों में तलाशी की मुहिम शुरू कर देती है. हर याकूब, नफीस और अशफाक जैसों के घरों की तलाशी ली जाती है. पर इंस्पेक्टर साहब, धमाकों के बाद आप ओंकारनाथ, हरिनारायण और श्यामसुंदर जैसों के घरों की तलाशी लेने कभी नहीं जाते. ऐसा क्यों है साहब? क्या अपने मजहब की वजह से आपकी निगाह में हम सभी  दहशतगर्द हो गए हैं? किसी और के जुर्म की सजा आप मुझे क्यों देना चाहते हैं?

नहीं, नहीं, इंस्पेक्टर साहब! नाराज मत होइए. अगर मेरी बातें आपको बुरी लगी हों तो माफी चाहता हूं. मेरी बीवी भी कहती है कि मैं खरी बात मुंह पर कह देता हूं. यह भी नहीं देखता कि किससे बात कर रहा हूं. वह देखिए, मेरी बीवी उधर कोने में से मुझे इशारा कर रही है कि मैं चुप हो जाऊं.

ठीक है, जनाब! आपने मेरे घर में उथल-पुथल मचा दी है, पर मैं चुप रहूंगा. आपके सिपाहियों के बूटों और डंडों की आवाज से सहमकर मेरे दोनों बेटे थर-थर कांप रहे हैं, पर मैं चुप रहूंगा. सिपाहियों को देख कर मेरी छोटी बच्ची का डर के मारे फ्राक में ही पेशाब निकल गया है, पर मैं चुप रहूंगा.

आप पुलिसवालों को घर में घुस आया देखकर मेरे बूढ़े वालिद सहम गए हैं और उनकी आंखों में भरा धुंधलका कुछ और बढ़ गया है. डर के मारे उन्हें दिल का दौरा पड़ सकता है, पर मैं चुप रहूंगा. अपने घर में आपको तलाशी लेता देखकर मेरा बीपी भी बढ़ गया है. मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही है, पर मैं चुप रहूंगा. आपकी तलाशी की मुहिम से मेरी बीवी घबराई हुई और सकते में है. वह बेचारी समझ नहीं पा रही कि हमने कौन-सा जुर्म किया है जिसकी वजह से पुलिस हमारे घर में घुस आई है. बुर्के के भीतर से झांकती उसकी सहमी आंखों में डर भरा है, पर मैं चुप रहूंगा. कुछ नहीं कहूंगा, क्योंकि आपके सामने मेरी औकात ही क्या है? आप मुझे पकड़कर न जाने कौन-कौन से जुर्म में कौन-कौन सी दफाओं के तहत जेल में बंद कर सकते हैं. आप हवालात में मेरी पिटाई करके मुझसे कुछ भी कबूल करवा सकते हैं. मैं गरीब आदमी हूं. मामूली दर्जी हूं. किसी को नहीं जानता. मेरी तो कोई जमानत भी नहीं कराएगा. इन्हीं सब वजहों से मैं चुप रहूंगा. आप मेरे घर में भूचाल ला दीजिए. आप मेरी छोटी-सी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दीजिए. तो भी मैं चुप रहूंगा. तुम ठीक कहती हो बच्चों की अम्मा. अब मैं चुप रहूंगा. कोई शिकायत नहीं करूंगा. आम आदमी चुपचाप सहते रहने के सिवा कर ही क्या सकता है?

क्या हुआ, इंस्पेक्टर साहब? हमारे घर की तलाशी में आपको कुछ नहीं मिला? यकीन मानिए, आप हमारे मन की तलाशी लेंगे तो भी खाली हाथ ही लौटेंगे. हमारे मन में अब कोई उम्मीद नहीं बची. हमारी आंखों में अब कोई सपने नहीं बचे हैं.

क्या कहा, जनाब? मुझ जैसों को ‘टाडा’ या ‘पोटा’ में बंद कर देना चाहिए.

आप साहब हैं. पुलिस अफसर हैं. आप कुछ भी कह सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं. पर आपकी ऐसी बातें मुझे चुप भी तो नहीं रहने देतीं. कुछ लोग औरंगजेब के कामों की सजा अब हमें देना चाहते हैं. आप ‘लश्कर -ए-तयबा’ या ‘हूजी’ के दहशतगर्दों की तलाश में हम जैसे बेकसूर आम लोगों के घर पर छापे मारते हैं. अंधाधुंध गिरफ्तारियां करने लगते हैं. हम पर क्या बीतती है, कभी आपने सोचा है?

इंस्पेक्टर साहब, आप मुझ पर बिना सबूत के शक क्यों कर रहे हैं? मेरा जुर्म क्या है? क्या यह कि मैं इस मुल्क में एक गरीब, कम पढ़ा-लिखा मुसलमान हूं? या यह कि मेरा नाम अब्दुल्ला है, रामनारायण नहीं?

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5 COMMENTS

  1. इंस्पेक्टर साहब, आप मुझ पर बिना सबूत के शक क्यों कर रहे हैं? मेरा जुर्म क्या है? क्या यह कि मैं इस मुल्क में कम पढ़ा-लिखा मुसलमान हूं? या यह कि मेरा नाम अब्दुल्ला है, रामनारायण नहीं?
    धमाकों के बाद आप ओंकारनाथ, हरिनारायण और श्यामसुंदर जैसों के घरों की तलाशी लेने कभी नहीं जाते. ऐसा क्यों है साहब? आम आदमी चुपचाप सहते रहने के सिवा कर ही क्या सकता है?

  2. यह मेरा छोटा भाई है, हुजूर, जो हाल ही में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में मारा गया था. नहीं-नहीं, आप गलत समझ रहे हैं. वह दंगाई नहीं था. वह पुलिस-फायरिंग में नहीं मारा गया था. वह बेचारा तो शहर के कॉलेज में पढ़ता था. दंगाइयों ने उसे फसाद के समय छुरा मार दिया था. मेरे वालिद इस सदमे से अपनी आवाज खो बैठे. वो आपके सवालों के जवाब नहीं दे पाएंगे

  3. पुलिस अफसर हैं. आप कुछ भी कह सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं. पर आपकी ऐसी बातें मुझे चुप भी तो नहीं रहने देतीं. कुछ लोग औरंगजेब के कामों की सजा अब हमें देना चाहते हैं. आप ‘लश्कर -ए-तयबा’ या ‘हूजी’ के दहशतगर्दों की तलाश में हम जैसे बेकसूर आम लोगों के घर पर छापे मारते हैं. अंधाधुंध गिरफ्तारियां करने लगते हैं. हम पर क्या बीतती है, कभी आपने सोचा है?

  4. kya kaha, Hindu ke gharo ki bhi talashi li? lekin unko arrest those hi karoge…
    Kya kaha, arrest bhi kiya? to iska ye matlab nahi hai ki musalman ko bhi arrest karo.
    achha lo…. hamare MLA Saab se baat karo.
    Kya kaha, kisi MLA we nahi date?
    Yaad rakho sahab,aap char police wale ho aur bahar 100musalman khade hai…..jinda nahi bachoge.
    Kya kaha? firing karoge?
    Ya Allah….. is desh me musalman chain se nahi jee sakta. Secularism khatre main hai. maaro sale police walo ko….
    allaaaaahoooo Akbar…

  5. 🙁 🙁 🙁
    सिर्फ नाम ही काफी है
    जालिम होने के लिए अक्छरधाम सब आरोपी बरी
    और बहुत से ऐसे केसेस में बरी हुए हैं
    जब पकड़ते है तो मिडिया वाले ब्रेकिंग न्यूज़ दिखाते है
    जब छूटते है तो पता नहीं क्यों नहीं फिखाते
    की
    वाह रे लोकतंत्र

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