भाजपा की चिंता टिकाऊ होगी महागठबंधन की सरकार?

नए साल की शुरूआत के साथ ही देश में आम चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक एजेंसी से अपनी सरकार के कामकाज का महत्व, विपक्ष के हठ और संभावित गठबंधन पर बात करते हुए देश के सामने एक तरह से अपनी पार्टी का चुनावी एजेंडा पेश कर दिया। उधर संसद में कांग्रेस के नेतृत्व में तकरार लगातार हुई। जिस तेजी से नए साल के पहले दस दिनों में संसद में समान नागरिकता (एमेंडमेंट बिल) 2016 और समाज की ऊँची जातियों के आर्थिक तौर पर कमज़ोर वर्गों के लिए विधेयक शिड्यिूल्ड कॉस्ट्स एंड ट्राइब्स (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के फौरन बाद चर्चा हुई। साथ ही नया कोटा विधेयक बिल (124 कन्टीट्यूशन अमेंडमेंट बिल) बिल पास हुआ उससे प्रधानमंत्री की राजनीतिक सूझबूझ स्पष्ट हुई। लेकिन तकरीबन सभी पार्टियों के सांसदों ने माना कि भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार में नीति और नीयत तो है लेकिन लगातार सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकिंग सेक्टर, प्रशासन, रेलवे आदि में घटती जा रही नौकरियों में मौका किसे मिलेगा। सबने कहा कि ऐन चुनाव के मौके पर इस विधेयक को संसद में लाना उचित नहीं है, लेकिन रोजग़ार के वादे के चलते उन्होंने इसे पास भी किया।

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नई दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 12,000 सदस्यों का दो दिन का सम्मेलन 11 जनवरी को शुरू हुआ जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2022 में ‘नए भारत’ को बनाने के लिए आह्वान किया। उन्होंने 2019 के आम चुनाव को वैचारिक संघर्ष का युद्ध बताया और नरेंद्र मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को ‘मजबूर सरकार’ नहीं, बल्कि ‘मजबूत सरकार’ चाहिए।

उधर लखनऊ में 12 जनवरी को बसपा और सपा ने आपस में गठबंधन करने का फैसला लिया। भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के तमाम दिग्गज नेता खासी उधेड़बुन में हैं। वे इन मुद्दों पर माथापच्ची कर रहे हैं कि उत्तरप्रदेश (यूपी) में सपा-बसपा का गठबंधन तो हो गया पर कांग्रेस उससे बाहर क्यों है। दूसरे यदि वे कहीं जीत गए तो देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा? क्या कांग्रेस उत्तरप्रदेश में अपने दम पर जीत सकेगी? यदि महागठबंधन की सरकार केंद्र में बन भी गई तो क्या वह मजबूत और टिकाऊ होगी? नई दिल्ली के भाजपा शिविर में इन बातों पर चर्चा रही पर पार्टी को भरोसा है कि 2019 चुनावों में वे सत्ता में वापस आ रहे हैं क्योंकि देश की जनता के सामने ‘विकल्प’ नहीं है।

उधर संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) ने यूपी में ढाई साल से मानवाधिकार इकाई की अनेदखी और फर्जी मुठभेड़ों में ढाई साल में हुई मौतों पर चिंता जताते हुए भारत सरकार को पत्र भेजा है। उन्होंने माना है कि भारत सरकार ने इस पत्र का नोटिस नहीं लिया है।

भाजपा के नेतृत्व की एनडीए सरकार ने अपने राजकाज के दौरान खूब वादे किए लेकिन वाराणसी की तंग गलियां जो सारी दुनिया में प्रसिद्ध थीं वे आज बनारस को क्योटो जैसा बनाने के नाम पर खंडहर में तब्दील कर दी गई। गंगा आज भी साफ नहीं हुई और न राममंदिर ही बना। न काला धन पास आया और न जीएसटी से मंहगाई कम हुई। अलबत्ता नए सपने भारत भूमि पर लोगों ने देखे मसलन ऊँची जातियों को भी सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में दाखिले में दस फीसद का आरक्षण। मुस्लिम महिलाओं को तलाक से आज़ादी। लेकिन हिंदुओं के गौरव को दिखाने के लिए शिक्षा के कोर्स में बदलाव, देश की लोकतांत्रिक संस्थानों से छेड़छाड़ भी हुई। नोटबंदी में इसमें हुई मौतें ,लघु और मझोले कारखाने बंद हुए कामगार और किसान ज़्यादा हताश हुए।

लेकिन सच यह भी है कि इतने बड़े देश के विकास का सिलसिला सिर्फ पांच साल में संभव भी नहीं है। लेकिन इतने कम समय में भी भाजपा के नेतृत्व की सरकार के दौर में कालचक्र भी ठहर सा गया। पूरे देश और दुनिया में संदेश गया कि अब राष्ट्रवादी हिंदू ऐसी चुनौती हैं जिन्हें नकारा , नहीं जा सकता।

भाजपा ने जनवरी 2019 की 11 और 12 तारीख को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में अपने 12,000 नेताओं की मौजूदगी में तय किया कि वे 2019 के आम चुनाव में बहुमत फिर जीतेंगे और इस नारे को मंजूर किया कि ‘अबकी बार, फिर मोदी सरकार’। इस सम्मेलन में पिछले साल पांच राज्यों में हुई हार का जिक्र भी नहीं हुआ। यह कहा गया कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हमारी ज़मीन आज भी पुख्ता है।

उधर जनवरी की ही 12 तारीख को बसपा नेता मायावती और सपा नेता अखिलेश यादव ने तकरीबन 25 साल बाद आपसी गठबंधन का ऐलान अपनी संयुक्त प्रेसवार्ता में किया। इस गठबंधन का कांग्रेस ने स्वागत किया। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने बसपा नेता मायावती सपा नेता मुलायम सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति सम्मान जताया और कहा कांग्रेस अपने दमखम और अनुभव के साथ उत्तरप्रदेश में चुनाव लड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में रामलीला मैदान में भाजपा नेताओं के सामने कहा कि जिन पार्टियों ने आज आपस में गठबंधन किया है वे कांग्रेस के ही खिलाफ चुनाव मैदान में पहले आपस में गठबंधन करती थीं। आज वे कांग्रेस के साथ हैं। यानी यह गठबंधन सिर्फ कुर्सी के लिए है। क्या ऐसे गठबंधन से बनी सरकार मजबूत और टिकाऊ होगी?  पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 11 जनवरी को इस सम्मेलन में कहा था कि 2019 के आम चुनाव को सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने इस आम चुनाव की तुलना अफगान शासन अहमदशाह अब्दाली और मराठा सेनाओं के बीच पानीपत में हुए संग्राम से की। उन्होंने कहा कि तब मराठे हारे ज़रूर थे लेकिन देश में 200 साल का विदेशी राज ज़रूर शुरू हो गया।

 उन्होंने कहा ‘देश की जनता देश में मजबूत सरकार चाहती है। उसे महागठबंधन की ‘मजबूर सरकार’ नहीं चाहिए। ‘मजबूत सरकार’ सिर्फ नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं। उसकी सरकार ने देश से महंगाई और भ्रष्टाचार दूर किया। देश के जो आर्थिक अपराधी हैं- नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या उन्हें भी यह चौकीदार जल्दी ही धर -दबोचेगा।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में इन लोगों ने जनता की मेहनत की कमाई लूटी। यदि कांग्रेस की सरकार रही होती तो कभी ये देश छोड़ कर नहीं जाते। लेकिन नरेंद्र मोदी ने इन्हें गर्दन से पकड़ा ही था कि ये देश छोड़ कर भाग निकले। लेकिन हमारी सरकार इन्हें धर-दबोचेगी और इन से लूट का सारा माल वापस ले लेगी।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस मामले पर कांग्रेस हमेशा खलल डालती है। उसके वकील अदालत में बेवजह के मुद्दे उठाकर अदालत का समय बढ़ाते जाते हैं। भाजपा जल्दी से जल्दी अदालती सुनवाई पूरी करा कर मंदिर निर्माण कराना चाहती है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जो वादे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पूरे नहीं कर पाई है इसे अगले शासनकाल में ज़रूर पूरा करेंगे। उन्होंने दो प्रस्ताव भी रखे कि सरकार ने कृषि के क्षेत्र में काफी कुछ किया है। यह किसान हितैषी सरकार है। दूसरे इस सरकार ने समाज में ढ़ेरों कल्याणकारी कदम उठाए हैं। सरकार ने पिछले कुछ दिनों में ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। एक विधेयक लाकर नौकरियों और ऊँची जातियों के युवाओं के लिए दस फीसद आरक्षण और छोटे व मध्यम निर्माताओं को बड़ी राहत दी। जिस निर्माता का रुपए 40 लाख मात्र तक का कारोबार है उसे जीएसटी से छूट मिलेगी।

उन्होंने कहा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जो भी आरोप राफेल जेट सौदे को लेकर भाजपा नेतृत्व की सरकार पर लगा रहे हैं वे आधारहीन है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रमाणित है। अगस्ता -वेस्टलैंड सौदे के बिचैलिए क्रिश्चियन मिशेल ने जो जानकारियां हिरासत में दी हैं उनसे कांग्रेस बुरी तरह घबड़ा गई है। असम में ‘घुसपैठियों’ की पहचान की जा रही है। वहां 40 लाख की तो पहचान कर भी ली गई है। इन्हें निकाल बाहर करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मजबूत सरकार’ देश में बनाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि विपक्ष ने उनकी सरकार पर दो आरेापों को केंद्र में रखा है और भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को उसका मुकाबला करना चाहिए। एक है राफेल विमान सौदा और दूसरा है कृषि क्षेत्र। वे घर-घर जाकर मतदाताओं को समझाने के लिए कह रहे थे। जब 2014 में प्रधानमंत्री बनने की आस में मोदी रामलीला मैदान में आए थे तब के मोदी और आज के मोदी में ज़मीन-आसमान का अंतर था। तब वे बुलेट ट्रेन, स्मार्ट सिटी और पर्यटन परंपरा, प्रतिभा, व्यापार और तकनीक पर बोल रहे थे। पर इस बार उनकी आवाज़ में वह जोश नहीं था।

अगर ऐसा होता तो….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी को भाजपा नेताओं से कहा,’अगर स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल पहले प्रधानमंत्री बने होते तो देश की तस्वीर आज कुछ और ही होती। वैसे ही 2004 के चुनाव के बाद अटल जी प्रधानमंत्री बने रहते तो आज भारत कहीं और होता।

प्रधानसेवक

खुद को ईमानदार, परिश्रमी, प्रतिबद्ध प्रधानसेवक बताते हुए नरेंद्र मोदी ने अपनी तुलना ‘उनसे ‘ करते हुए समझाया, एक वे हैं जो देश का रुपया अपने परिवार और दोस्तों में बांट देते हैं। जब राष्ट्र के सामने कठिनाइयां होती हैं तो वे छुट्टियां मनाने विदेश चले जाते हैं। ये वे लोग हैं जो दूसरे देशों में जाकर भारत की बुराई करते हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का नाम तक नहीं लिया।

नाकाम साबित हुआ है गठबंधन

बसपा नेता मायावती और सपा नेता अखिलेश यादव के बीच हुए गठबंधन की घोषणा के तुरंत बाद ही प्रधानमंत्री और भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा के खिलाफ ऐसे गठबंधन पहले भी होते रहे हैं जो ‘नाकाम गठबंधन’ कहलाते हैं। हमें एक मजबूत सरकार चाहिए जो भ्रष्टाचार पर काबू पा सके। ये लोग मजबूत सरकार नहीं चाहते क्योंकि फिर उनके खुद के व्यापार पर ताला लग जाएगा। वे ऐसी ‘मजबूर सरकार’ चाहते हैं जिससे उनके संबंधियों को लाभ पहुंचता रहे।