पुरी में भगवान् जग्गनाथ रथ यात्रा शुरू

कोलकाता में सीएम ममता ने इस्कॉन की रथ यात्रा में हिस्सा लिया

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ओडिशा के पुरी में गुरूवार को वार्षिक रथ यात्रा का कार्यक्रम शुरू हो गया है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी से शुरू होती है। उधर कोलकाता में इस्कॉन की आयोजित जग्गनाथ यात्रा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हिस्सा लिया।

भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा और भाई बलदाऊ के साथ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा राधा और श्रीकृष्ण का युगल स्वरूप है। श्रीकृष्ण, भगवान जगन्नाथ के ही अंश स्वरूप हैं। इसलिए भगवान जगन्नाथ को ही पूर्ण ईश्वर माना गया है। जगन्नाथ रथ उत्सव आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया से आरंभ करके शुक्ल एकादशी तक मनाया जाता है।

रथ यात्रा शुरू होने से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने रथ यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। गौरतलब है कि यूनेस्‍को ने दो साल पहले पुरी के हिस्‍सों को वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किया था। उसके बाद भगवान् जग्गनाथ की यह दूसरी रथ यात्रा है। भव्‍य रथ यात्रा में दूर-दूर से आकर लोग शामिल होते हैं। वे रथ को खींचते हैं। मान्यता है कि इससे पुण्‍य प्राप्त होता है।

रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, जिनमें विष्णु, कृष्ण, वामन, बुद्ध आदि शामिल हैं। पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। रथ यात्रा पर १० दिन तक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।

इस साल नई बात यह होगी कि भगवान जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा के भगवान बदल दिए जाएंगे। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की यह परंपरा है कि हर १४-१५ साल में भगवान की मूर्तियों को बदलकल नई मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।