देख लो साकेत नगरी है यही स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही

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मिथक को अयोध्या में साकार किया मुख्यमंत्री ने। कहते हैं अयोध्या के साधु-संतों की नाराजगी के बाद भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने सरयू नदी के तट पर राम, जानकी, लक्ष्मण के साथ भव्य छोटी दीपावली मनाई। राम का अयोध्या में आगमन दीपावली पर ही माना जाता है और कहते हैं राम ने इसी दिन राजकाज संभाला था।

त्रेतायुग में कितनी भव्यता से दीपों की रोशनी होती थी इसका कोई उल्लेख तो नहीं मिलता लेकिन कलयुग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्रेतायुग के अनुरूप भव्य दीपोत्सव किया। घाट किनारे एक लाख 71 हज़ार दीपों से पूरा किनारा जगमगा उठा। सरयू के जल के किनारे के मंदिरों, घरों पर लगी रंग-बिरंगी रोशनी की झालरों की रोशनी की छाया जगमगा उठी।

कुछ लोगों का कहना है कि रामायण में उल्लेख है कि अयोध्या की सरयू नदी में ही पुरषोत्तम राम ने जलसमाधि ली थी। उस घटना का शोक सदियों से परंपरा में बदल गया। अयोध्यावासियों ने दीपावली पर सरयू नदी के तट पर दिया जलाना श्री राम के वियोग में बंद कर दिया था। सदी दर सदी अयोध्या में आक्रमणकारी आते रहे। वे मनमानी करते रहे लेकिन सदियों से सरयू नदी को दीपदान न करने की पंरपरा कायम रही।

सनातनी परंपराओं के विरोध में बने गोरख नाथ धाम के प्रमुख योगी आदित्यनाथ ने इस दीपावली को राम की अयोध्या वापसी और राम राज्य की स्थापना का अवसर मानते हुए घाट किनारे व्यापक रंगबिरंगी रोशनियों की झालरें और लख-लख दीपों की रोशनी से सरयू का किनारा जगमग कर दिया।

श्री राम, जानकी और लक्ष्मण के रूप मेें कलाकारों को मिथकीय पुष्पक विमान के जरिए अयोध्या के रामकथा पार्क में उतारा गया। वहां से वे मंच तक पहुंचे जहां योगी आदित्यनाथ ने उन्हेेंं उनका मस्तकाभिषेक किया। इस मौके पर एक दूसरे हैलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की जाती रही। दीपावली के मौके पर सरयू नदी के घाट भव्य दीप मालाओं से प्रकाशित थे। नदी के जल में और दूर पुल के खंभों तक रोशनी छिटक रही थी। पूरे प्रदेश के सक्रिय अफसरशाह और मंत्री मौके पर दर्शनार्थी बने। जो खुद की मौजूदगी के लिए साथ खड़ भी रहे थे। अयोध्या के पूर्व नरेश और उनका परिवार भी इस मौके पर नदी तट पर हो रहे भव्य समारोह में सजा बैठा था। इन सब का पूरे आयोजन की भव्यता बनाए रखने में योगदान था। एक तरह से रामराज्य के कर्ता-धर्ता सरयू नदी किनारे विराजमान थे।

आयोजन को जनता ने भूरि-भूरि सराहा जब घाट किनारे सीढिय़ों पर एक लाख 71 हज़ार दीप जगमगा उठे। इनके दिव्य आलोक में विशेष साउंड इफेक्ट के साथ 22 मिनट का लेजर शो हुआ। इस दौरान वहां मौजूद हर दर्शनार्थी रोमांच का अनुभव कर रहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि रामराज्य का मतलब होता है। कोई गरीब न हो, कोई दुखदर्द न हो,सबके सिर पर छत हो और कोई भेदभाव न हो। जय श्री राम और भारत माता की जय के उद्घोष के दौरान उन्होंने उन आलोचकों की भत्र्सना की जो उनकी निंदा में ही जुटे रहते हैं। वे यह भी नहीं जानना चाहते कि आखिर वे ऐसा क्या और क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों के शहर अयोध्या के विकास के लिए यह पहल की गई। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ होता है – बिजली, रसोई गैस का सिलिंडर और मकान।

अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर उन्होंने कहा कि यदि मैं अयोध्या न आऊं तो उन्हें तकलीफ होती है। वे कहते हैं कि अयोध्या नहीं आए वे और जब आ जाऊं तो कहते हैं देखिए क्या किया। उन्होंने कहा हम जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करते। पिछले ‘रावण राजÓ में परिवारवाद, जातिवाद और दूसरी चीजें ज़रूर कही जाती थी। यह मेरे गौरव के अनुरूप नहीं है यदि मैं विपक्ष के आरोपों पर ही बात करूं। अयोध्या ने मानवतावाद के लिए बहुत कुछ किया है। यहीं रामराज्य की अवधारणा बनी जिसमें न गरीबी हो, न दुखदर्द हो और न तकलीफ हो। कोई भेदभाव न हो। यहां दीपावली के अवसर पर 18 अक्तूबर को जो कार्यक्रम हुआ वह दुनिया के सामने सही तस्वीर रखने की मंशा से किया गया।

अयोध्या के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने 133 करोड़ रु पए की योजनाओं का ऐलान भी किया। उन्होंने कहा अयोध्या जल्दी ही पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनेगा। अयोध्या को अभी तक कोई आधुनिक बस अड्डा नहीं मिला। रेलवे स्टेशन भी बदतर हालत में है। यहां दैनिक ज़रूरीयात पूरी करने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।

अयोध्या में इस बार छोटी दीपावली ही बड़ी दिखी। घाटों पर दीपमालिका में इस्तेमाल किए गए दीप के तेल को बर्तनों में दूसरी सुबह इक_ा करने उमड़ा दिखा लोगों का हजूम। इस तेल से इनके घर शायद दिवाली की रात रोशन हो गए हो।