‘दीवानी’ हुई सियासत

0
95

[wzslider autoplay=”true” transition=”‘slide'” lightbox=”true”]

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब लगभग सौ दिन शेष हैं. उम्मीद के मुताबिक चुनाव के ठीक पहले यहां सत्तासीन भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच जुबानी जंग भी तेज हो चुकी है. किंतु जुबानी जंग से शुरू हुआ यह मुकाबला जिस तरीके से अब मुकदमेबाजी में तब्दील हो गया है उससे राज्य की राजनीति का रंग और ढंग बदला-बदला नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश के लिए चुनाव की बेला में चला मुकदमेबाजी का यह खेल बिलकुल नया है. और पहली बार में ही यह इस हद तक परवान भी चढ़ा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह, नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के अजय सिंह, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा से लेकर मौजूदा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सरीखे तमाम बड़े नेता अपना-अपना दांव आजमा रहे हैं. और तो और, आप मप्र की सियासत के इस मुकदमा युग का प्रभाव देखिए कि अब यहां छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत जोगी भी अपनी ताल ठोक रहे हैं.

आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ी तल्खी के बीच इन दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और श्रीमती साधना सिंह का नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह पर मुकदमा ठोकने का मामला गर्माया हुआ है. चौहान का आरोप है कि अजय सिंह ने मई में आयोजित अपनी परिवर्तन यात्रा के दौरान उनके और उनकी पत्नी के बारे में झूठे आरोप लगाए. इन आरोपों के बदले में बीती 12 जून को चौहान दंपति ने मुख्य जिला मजिस्ट्रेट, भोपाल की अदालत में एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी है. वहीं अजय सिंह का कहना है कि उन्होंने इसके पहले दो पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से 2003 से लेकर अब तक उनके परिजनों द्वारा अर्जित संपत्ति का ब्योरा मांगा था. लेकिन जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री ने उन्हें मानहानि का नोटिस थमा दिया. बकौल सिंह, ‘मुख्यमंत्री जी ने मानहानि के नोटिस में जिन आरोपों का जिक्र किया है वैसा मैंने कुछ नहीं कहा.’ किंतु मुख्यमंत्री चौहान के वकील दीपक जोशी ने सिंह के खिलाफ अदालत में एक सीडी और अखबारों की कुछ कतरनें पेश की हैं. जोशी का दावा है कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने बीती 9 मई को सागर की जनसभा में कहा था कि पहले गुटखे के पाउच दस रुपये में 6 आते थे, अब तीन आते हैं. इसमें करोड़ों रुपये की कालाबाजारी चल रही है. और ये रुपये साधना सिंह की नोट गिनने की मशीन में गिने जा रहे हैं. जोशी का यह भी दावा है कि अजय सिंह ने चार जून को खरगौन की जनसभा में कहा था कि जिन शिवराज ने राजनीति की शुरुआत में अविवाहित रहने की कसम खाई थी वे ही राजनीति में चमकने के बाद साधना सिंह के रूप में नोट गिनने की मशीन लाए हैं.

भोपाल में चौहान दंपति ने जिस दिन नेता प्रतिपक्ष सिंह पर मानहानि का मामला दाखिल किया ठीक उसी दिन यानी 12 जून को इंदौर की विशेष अदालत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने मुख्यमंत्री सहित 17 लोगों पर कथित मैगनीज खनन घोटाले को लेकर याचिका दर्ज करके मुकदमे की सियासत को हवा दे दी. मिश्रा का आरोप है कि सूबे के विवादास्पद उद्योगपति सुधीर शर्मा और उनके भाई ब्रजेंद्र शर्मा का शिवराज सरकार से नजदीकी रिश्ता है. और इसी के चलते शर्मा बंधुओं की भागीदारी वाली एक फर्म को फर्जी दस्तावेजों के हवाले से बेशकीमती मैगनीज खदान का हस्तांतरण किया गया है. मिश्रा के मुताबिक शिवराज सरकार की मिलीभगत से ही शर्मा बंधुओं ने काजरी डोंगरी (झाबुआ) में फैली 30 हेक्टेयर की खदान को गैरकानूनी तरीके से अगस्त, 2018 तक के लिए हथिया लिया है. मिश्रा का दावा है कि इस फर्म द्वारा काजरी डोंगरी में सौ करोड़ से अधिक का अवैध उत्खनन किया जा चुका है. हालांकि इस याचिका के दाखिल होने के बाद मुख्यमंत्री चौहान की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इसके ठीक दो दिन बाद उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र बुदनी में एक कार्यक्रम के दौरान विरोधियों को चुनौती देते हुए यह जरूर कहा, ‘मुझे बदनाम करने वालों में यदि दम है तो वे आरोपों को अदालत में सिद्ध करें.’

[box]इस समय ज्यादातर मुकदमों का निशाना नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के अजय सिंह रहे हैं और भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा किया है[/box]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here