जब कलंकित हुआ क्रिकेट

मैच फिक्सिंग कांड (1999-2000)
पिछले कुछ सालों में क्रिकेट की छवि को सबसे ज्यादा धक्का मैच-फिक्सिंग कांडों का खुलासा होने से ही लगा है. 1999-2000 में मैच फिक्सिंग के खुलासे ने विश्व क्रिकेट को हिलाकर रख दिया था. इस कांड का खुलासा होने के बाद पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन, अजय जडेजा और मनोज प्रभाकर आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसके बाद भारत में क्रिकेट-प्रेम कुछ समय के लिए मृतप्राय-सा हो गया था.

गांगुली-चैपल विवाद (2005-2006)
पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल के बीच अहं और वर्चस्व की लड़ाई ने भी भारतीय क्रिकेट को शर्मसार किया. 2005 में जिम्बाब्वे दौरे के वक्त चैपल ने मीडिया से कहा कि गांगुली खेलने से बचने के लिए इंजरी का बहाना करते हैं. जवाब में गांगुली ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि चैपल समेत टीम प्रबंधन उनपर कप्तानी और टीम छोड़ने का दबाव बना रहा है. इसके बाद चैपल ने गांगुली की जबरदस्त आलोचना करने वाला ईमेल बीसीसीआई को भेजा जो लीक हो गया. इस विवाद ने चैपल की विदाई करवाई तो गांगुली के करियर के अंत की शुरूआत भी की.

स्लेजिंग विवाद (2007-2008)
क्रिकेट जिसे भद्रजनों का खेल कहा जाता है 2007-08 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तब शर्मसार हो गया जब भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एंड्रयू साइमंड्स को जातिसूचक अपशब्द कहने का आरोप लगा. इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आईसीसी मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर ने हरभजन पर तीन टेस्ट मैचों की पाबंदी लगा दी साथ ही उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई.

श्रीसंत-हरभजन थप्पड़ कांड (2008)
अप्रैल, 2008 में पहले आईपीएल में ही खेल भावना तब कलंकित हुई जब मोहाली में एक मैच के दौरान हरभजन सिंह ने साथी खिलाड़ी एस श्रीसंत को थप्पड़ रसीद कर दिया. इसके बाद पूरे देश में एक बखेड़ा खड़ा हो गया था जिसके बाद बीसीसीआई ने हरभजन सिंह पर आईपीएल के बाकी बचे 11 मैचों के लिए प्रतिबंध लगा दिया था.

शशि थरूर-ललित मोदी विवाद (2010)
अप्रैल 2010 में तत्कालीन आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने खुलासा किया कि कोच्चि टीम के मालिकों को लेकर स्थिति साफ नहीं है, ऐसा लगता है कि इसमें एक से ज्यादा लोगों ने गलत तरीके से पैसा लगाया है. इसके मालिकों में एक शशि थरूर (तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री) की दोस्त सुनंदा पुष्कर भी हैं जिन्हें टीम में 70 करोड़ रूपए के शेयर मुफ्त दिए गए हैं. मोदी ने कहा कि इस टीम को लेकर शशि थरूर लगातार उनपर दबाव बना कर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं. इसके बाद थरूर ने मोदी पर वित्तीय घोटालों का आरोप लगाया साथ ही सुनंदा ने अपनी हिस्सेदारी छोड़ने की पेशकश की. लेकिन यह विवाद थरूर और मोदी दोनों की कुर्सी जाने के बाद ही थमा.

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