कामरेड, मैं तुम से प्यार करती हूं

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इलेस्ट्रेशन: मनीषा यादव

उस दिन
तुम्हारे चेहरे पर उदासी थी,
कामरेड.

आज भी
वही उदासी
मुझे तुम्हारे नजदीक
लाती है.

मैंने हमेशा
उदास लोगों को देखा है
अपने आस-पास
पर तुम्हारी उदासी
गोबर से लिप दिए हुए
हमारे गांव के
उस बड़े से घर की तरह
है
सुंदर और बड़ा घर
खाली घर
सायं-सायं करता हुआ
एक नया घर
सुंदरता मेरे पास भी है
पर उदासी उससे हजार-हजार गुनी ज्यादा
जबकि लोग कहते हैं- ‘मैं
बहुत बातूनी हूं.
चुप नहीं रह सकती एक
भी मिनट.’

तुम्हारे जवान चेहरे पर
उदासी
एक धीर गंभीर परिपक्व
प्रौढ़ युवा की तरह
साथ-साथ रहती है
और तुम्हारी आंखंे
दो कुओं की तरह पाताल
से खींच कर लाती है
करुणा
समुद्र सी पर पीली
करुणा
एक हिम्मत सी मुस्कान
के साथ

कैसे हो?
कहां से हो?
नाम क्या है तुम्हारा?
ये सब बेमानी हो गया
था
जब तुम कहे थे- नाम
में क्या रखा है?
और उतर गए थे बस
से एक मिनट ही बाद

कितने दिन
कितने साल
कितनी सदियां बीती
फिर तुम मिले
तुम्हारी पहचान मिली
मिली वही उदासी
जो तुम्हारा स्थायी भाव था

1 COMMENT

  1. इस कविता में उदासी से संबंध प्रारंभ होता है .जिन्हें कामरेड से प्यार हुआ है उनका संबंध उदासी से गहरा रहा है .उनकी उदासी उनके सौंदर्य पर भरी परता है .किन्तु कामरेड की उदासी गोबर से लीपे गाँव के खाली बडे घर
    की तरह है जो नया है और शायद नए मेहमान की प्रतीक्षा में भी है.उसकी कविता की किताब पढना उस पर बहस करना ,दुनिया भर की बातें करना ,उम्र की अंतर की खबर रखना किन्तु उसके प्रति अपनी भावना को अभिब्यक्त नहीं कर पाना उसका प्यार ही है.
    प्यार के मार्ग की जो बाधाएं होती है -१.परिवार के बुजुर्ग माता पिता एवं २.धर्म या इश्वर का भय.इसे वह मानती ही नहीं.अतः प्रेम का यह परिपत्र प्रामाणिक है.

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