एक झुका हुआ फैसला!

18. कोई भी बाहरी व्यक्ति हेमराज के शव को छत पर लेकर जाने की चिंता नहीं करेगा. और एक अकेला व्यक्ति शव को छत तक लेकर जा भी नहीं सकता.

19. घटना से पहले छत के दरवाजे पर कभी भी ताला नहीं होता था, लेकिन 16 मई की सुबह वहां ताला लगा हुआ था और आरोपितों ने उसकी चाबी पुलिस के मांगने के बावजूद नहीं दी.

20. आरोपितों ने खुद ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के अंतर्गत हुए बयानों में यह कहा है कि ‘घटना से लगभग आठ-दस दिन पहले पड़ोस में पुताई का काम चल रहा था. ऐसे में मजदूर घर की छत पर लगी टंकी में से पानी लेने आते थे. इसलिए हेमराज ने ही छत पर ताला लगाना शुरू किया और उस ताले की चाबी हेमराज के पास ही होती थी.’ यदि ऐसा है तो किसी बाहरी व्यक्ति के लिए उस चाबी को ढूंढ़ना आसानी से संभव नहीं है.

21. यदि यह अपराध किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा छत पर ताला लगाने के बाद किया गया होता तो घर से बाहर जाने के बाद सबसे बाहर वाला या बीच वाला जाली का दरवाजा निश्चित रूप से बाहर से बंद मिलता.

22. अपराध का उद्देश्य स्थापित हो चुका है.

23. यह संभव नहीं है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति अपराध के बाद घटनास्थल की सफाई करे.

24. गोल्फ क्लब नंबर पांच को हत्या करने के बाद परछत्ती पर फेंक दिया गया था और उसे कई महीनों बाद राजेश तलवार द्वारा प्रस्तुत किया गया.

25. दोनों मृतकों के सिर और गले में आई चोटें लगभग समान हैं और यह संभव है कि ये चोटें गोल्फ क्लब और स्कैल्पेल (सर्जिकल ब्लेड) से आई हों.

26. आरोपित राजेश तलवार नोएडा गोल्फ क्लब के सदस्य थे और गोल्फ क्लब उन्हीं के द्वारा सीबीआई को दिए गए थे. और स्कैल्पेल दंत चिकित्सक द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. यहां दोनों आरोपित दंत चिकित्सक हैं.

अपवादों का अपवाद
ऊपर लिखे सभी बिंदुओं को न्यायाधीश एस लाल ने सभी गवाहों और सबूतों को देखने के बाद स्थापित पाया है. लेकिन कानून के जानकारों की मानें तो ऊपरी अदालत में यह फैसला पलटा जा सकता है. दरअसल एस लाल ने इस फैसले में एक साथ कई ऐसी बातों को अपराध सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल किया है जो अपवादस्वरूप ही देखने को मिलती हैं. जैसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 को इस मामले में लागू किया गया है. सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा दिया जाना भी कम ही देखने को मिलता है. साथ ही अपराध का स्पष्ट उद्देश्य स्थापित न होने पर, अपराध में इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार बरामद न होने पर और जांच में भारी कमियां होने पर सामान्यतः आरोपित को ही फायदा होता है. लेकिन इस मामले में फिर भी आरोपित को दोषी करार दिया गया है.

एस लाल ने अपने फैसले में हर अपवाद को न्यायोचित ठहराने के लिए दर्जनों नजीरें तो पेश की हैं. लेकिन इन नजीरों में अलग-अलग सिर्फ एक या दो अपवाद ही नजर आते हैं. ऐसे में इतने अपवादों को एक साथ मिलाकर दिया गया यह फैसला शायद ही ऊपरी अदालतों में टिक पाए.

उलटफेर के तथ्य
तथ्यों की भी बात करें तो ऐसे तमाम तथ्य हैं जिनके आधार पर ऊपरी अदालतें तलवार दंपति के पक्ष में फैसला दे सकती हैं. इनमें मुख्य हैं:

1. नार्को टेस्ट में नौकरों ने अपराध करना स्वीकार किया.

2. सीबीआई के कई लोगों ने यह बयान दिया था कि नौकरों ने अपने बयानों में भी अपराध स्वीकार किया है.

3. तलवार दंपति के नार्को में कुछ भी ऐसा नहीं पाया गया जिससे उसकी अपराध में संलिप्तता स्थापित होती हो.

4. नौकर कृष्णा के तकिये से हेमराज का खून मिला था (हालांकि सीबीआई द्वारा कहा गया कि यह सिर्फ टाइपिंग की गलती के कारण हुआ है).

5. नार्को में नौकरों ने यह भी बताया कि घटना वाली रात वे सभी हेमराज के कमरे में शराब पी रहे थे और टीवी पर एक नेपाली गाना चल रहा था. इस बात की पुष्टि सीबीआई ने नेपाली चैनल से भी की थी और यह स्थापित हुआ था कि उस रात वही गाना चैनल पर चलाया गया था.

6. सीबीआई टीम द्वारा तलवार के घर पर एक साउंड टेस्ट किया गया था. इसमें पाया गया कि यदि दोनों कमरों में एसी चल रहे हों तो एक कमरे की आवाज दूसरे में नहीं सुनाई पड़ती.

7. आरुषि और हेमराज के पोस्टमार्टम में कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया था. लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टरों ने लगभग एक साल बाद नए तथ्य जोड़ते हुए बयान दिए. न्यायाधीश एस लाल ने यह तो माना कि आरुषि का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दोहरे ने यह भारी चूक की है लेकिन फिर भी उनके बयान को स्वीकार कर लिया.

8. इस बात का कोई भी सबूत नहीं है कि हेमराज की हत्या आरुषि के कमरे में

हुई हो.

9. राजेश और नूपुर तलवार के कपड़ों पर सिर्फ आरुषि का खून मिला. हेमराज का खून उनके कपड़ों पर नहीं था. जबकि उस रात आरुषि द्वारा खींची गई तस्वीरों में आरोपितों ने जो कपड़े पहने हैं वही उन्होंने अगली सुबह भी पहने हुए थे.

10. कई डॉक्टरों के पैनल ने यह बताया था कि हत्या खुखरी से किया जाना संभव है. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी इस पैनल का हिस्सा थे. बाद में पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टरों ने अपने बयान और राय बदली.

इन तमाम पहलुओं के कारण ही तलवार दंपति इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है. एस लाल के फैसले पर उनके वकील तनवीर अहमद मीर कहते हैं, ‘मैंने सीबीआई के केस को पूरी तरह से धराशायी कर दिया. लेकिन मैं एक जज को नहीं हरा सकता जब वो मेरे खिलाफ हो.’

तलवार दंपति के अन्य वकील भी आज यह दावा कर रहे हैं कि यह फैसला ऊपरी अदालतों में एक पल भी नहीं टिक सकता. लेकिन यदि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच कर भी नहीं बदला तो यह एक ऐसी नजीर बन जाएगा जिसके चलते आरोपितों के बच निकलने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी. यह भी मुमकिन है कि ऐसा होने पर कुछ निर्दोषों को भी सजा हो जाए.

वैसे भी इस फैसले में न्यायालय ने माना है कि अब वह समय नहीं है जब सौ दोषियों के छूट जाने वाले सिद्धांत पर चला जाए.

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