इशरत जहां मुठभेड़ मामला: मोदी को मालूम था

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मुठभेड़ की कड़ियां 
वंजारा और गृह राज्यमंत्री शाह दोनों पर एक अन्य हत्याकांड का आरोप भी है. यह मामला है वर्ष 2005 में हुए सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या का. इन्हें भी आतंकवादी बताकर एक मुठभेड़ में मार दिया गया था. वंजारा को इन हत्याओं के लिए2004 और 2005 में गिरफ्तार भी किया गया. शाह को 2010 में इसी हत्याकांड के लिए गिरफ्तार किया गया और उनको तीन महीने बाद जमानत मिल गई. दो महीने पहले भाजपा ने शाह को उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रभारी बनाया था. लेकिन उनके लिए अब एक नई मुसीबत भी खड़ी हो सकती है. सीबीआई एक दूसरे मामले में उनको पूछताछ के लिए तलब करने की योजना बना रही है. यह सादिक जमाल मुठभेड़ मामला है. यह घटना 2003 में हुई थी जब अहमदाबाद में पुलिस ने जमाल को आतंकी करार देते हुए उसे एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था.

सीबीआई के मुताबिक शाह, जमाल की हत्या के दिन कुमार के संपर्क में थे. कुमार उन अधिकारियों में शामिल हैं जिनकी इस मामले में अहम भूमिका रही थी.  सीबीआई इस समय उन चार मामलों की जांच कर रही है जिनमें गुजरात पुलिस पर लोगों को मार कर उनको आतंकवादी बताने का आरोप है. सीबीआई का कहना है कि जमाल की हत्या के मामले में कुमार पर साफ आरोप हैं. महाराष्ट्र के पूर्व और वर्तमान खुफिया अधिकारियों ने उनके खिलाफ गवाही भी दी है.

जांच एजेंसी ने इस राज्य के दो वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों दत्ता पल्सागिकर और गुरुराज सवागत्ती से पूछताछ की है. सीबीआई के मुताबिक इन अधिकारियों ने जमाल के आतंकवादी होने के बारे में गलत खुफिया जानकारी दी और इस तरह हत्या के इस षड़यंत्र में शामिल हुए. जांच एजेंसी ने मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी प्रदीप शर्मा से भी पूछताछ की जिन्हें कभी 100 से भी अधिक कथित अपराधियों को मुठभेड़ में मारने की वजह से ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के तौर पर जाना जाता था. जमाल गुजरात पुलिस को सौंपे जाने के पहले शर्मा की हिरासत में था. शर्मा इसी तरह के फर्जी मुठभेड़ मामले में हत्या के आरोप में मुंबई में सजा काट रहे हैं.

सीबीआई ने गुजरात में जमाल की हत्या के मामले में डीएसपी तरुण बारोट को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है जिन्होंने कथित तौर पर मुंबई से जमाल की हिरासत हासिल की थी. बारोट 2004 की एक मुठभेड़ के मामले में भी आरोपित हैं. कुमार के खिलाफ सीबीआई की जांच काफी समय से लंबित रही है. एक साल तक खुफिया ब्यूरो कुमार से सीबीआई की पूछताछ की राह में रोड़ा बना रहा.

लेकिन जब जमाल और इशरत जहां दोनों हत्याकांडों में कुमार की भूमिका स्पष्ट होने लगी तो खुफिया ब्यूरो के प्रमुख आसिफ इब्राहीम, सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा और केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने कई दिन तक मुलाकात के बाद आगे की राह निकाली. जानकारी के मुतबिक कुमार जून में सीबीआई से मुलाकात के लिए गांधीनगर तब पहुंचे जब उनके आला अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. इसके विरोधस्वरूप सतीश वर्मा नामक सीबीआई अधिकारी ने जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया. वर्मा वही अधिकारी हैं जिन पर गुजरात सरकार ने अपने खिलाफ पक्षपाती होने का आरोप लगाया है.

सिंघल के बयान को सीबीआई बहुत अहम मानकर चल रही है. एक समय के जाने-माने पुलिस अधिकारी रहे सिंघल की छवि अब धूमिल हो चुकी है. कहा जाता है कि इस साल उनके 17 साल के इकलौते बेटे द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद उन्होंने सच बोलने का फैसला किया. उन्होंने सीबीआई अधिकारी से कहा, ‘यह ऊपर वाले का इंसाफ है सर, मैंने एक निर्दोष को मारा और मुझे उसकी सजा मिली.’

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