अंसल भी क्या माल्या की राह पर? | Tehelka Hindi

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अंसल भी क्या माल्या की राह पर?

अंसल एपीआई में काला धन कमाने की लालसा

तहलका ब्यूरो 2016-12-15 , Issue 23 Volume 8

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नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिम्मत के साथ काले धन के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ी है। प्रधानमंत्री के अनुसार यह महज शुरुआत है। सरकार जल्दी ही संपत्तियों के दूसरे रूपों को (जिनमें रियल एस्टेट भी है) अपने दायरे में लेगी। जिसमें लोग काला धन इस्तेमाल करते हैं और उसे जीएसटी पर अमल से जोड़ते हैं। इससे काले धन की पैदाइश पर रोक लगेगी। हम कल्पना ही कर सकते हैं कि एक सरकार है जो िहम्मत करके देश की 86 फीसद नकदी को बदलने का फैसला लेती है। यह काला धन खत्म करने में किसी भी हद तक जा सकती है। जिससे सरकारी खजाने में कमाई बढ़े और कर अदायगी से बचने के तरीकों पर रोक लगे, अवैध वित्तीय लेनदेन रोका जा सके और आतंकवाद खत्म किया जा सके। ‘तहलका’ अपने पंद्रह साल के शोर भरे सालों में एक निर्भीक, सही और निडर मीडिया हाउस के रूप में उभरा है। इसका जनहित की पत्रकारिता में भरोसा रहा है। काले धन के खिलाफ भारत की लड़ाई में शामिल होकर एक विशाल रियल एस्टेट के खिलाफ हम पेश कर रहे हैं अपनी पहली पेशकश।

केंद्र सरकार को अंसल एपीआई ग्रुप के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के खिलाफ खरबों का धन उगाहने और उसे विदेश में लगाने की शिकायत मिली है। शिकायत में आरोप है कि पिता और पुत्र दोनों ही­ देश से भाग निकलने की काेशिश में हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार अपनी तमाम एजंसियों मसलन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, सेंट्रल विजिलेंस कमीशन, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट, सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, कंप्टीशन कमीशन ऑफ इंडिया को  निर्देश दे जिससे इनका काला धन सामने आए जिसे सालाें से वे बिना टैक्स चुकाए कमाते आ रहे हैं।

तहलका संवाददाताओं की टीम ने इस मामले में अपनी तहकीकात की। इसमें यह जानकारी मिली कि बहुत बड़े पैमाने पर मनी लांड्रिंग और हवाला कारोबार में अंसल एपीआई के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, एमडी और सीईओ लिप्त हैं। हमने 7 नवंबर और 15 नवंबर को उनके  दफ्तर 115, अंसल में अपने प्रश्नों के दो सेट उन्हें भेजे और चाहा कि उनकी प्रतिक्रिया मिले। उनके कार्यालय ने उन्हें प्राप्त भी किया लेकिन चुप्पी बरकरार रखी।

हमारे पास जो दस्तावेज हैं उनसे यह पता चलता है कि ग्रुप में अपनी स्थिति का इन्होंने बेजा इस्तेमाल किया। इन लोगों ने विभिन्न कॉलाेनियों में प्लाट (रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल), विकसित किए और बेचे।

ऐसी ही बिक्री का एक उदाहरण है पायोनियर इंडस्ट्रियल पार्क मानेसर, गुडगांव जिसका नाम सरकार ने बाद में बदल कर गुरुग्राम कर दिया। यहां औद्योगिक भूखंड बेचे गए। इसकी घोषित कीमत रुपए 12 हजार प्रति स्क्वायर यार्ड  थी। चेक में जो कीमत वसूली गई वह थी रुपए 2500 प्रति स्क्वायर यार्ड से रुपए 5390 प्रति स्क्वायर यार्ड। बाकी राशि नगद जमा करने का निर्देश था। इसमें राेचक बात यह है कि लेनदेन के इन सभी कागजात पर संबंधित जनरल मैनेजर और चेयरमैन सुशील अंसल के ही दस्तखत हैं।

यह ग्रुप इस समय बिक्री में लगा हुआ है इससे इन आरोपों को बल मिलता है कि चेयरमैन आैर उनके सुपुत्र और वाइस चेयरमैन देश से भागने की फिराक में हैं। अभी इन लोगों ने बड़ी संख्या में संपत्ति मसलन स्कूल, शिक्षा संस्थान, कम्यूनिटी क्लब अादि बेचे भी हैं।

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इस साल अप्रैल/मई में अंसल ने चिरंजीव स्कूल साथ ही 5.5 एकड़ की पालम विहार, गुड़गांव में एक संपत्ति प्ले स्कूल, दूसरा पालम विहार में एक एकड़ में है और दूसरा स्कूल सुशांत लोक गुड़गांव में है। यह सारा कुछ, कुल दो सौ करोड़ के सौदे में बिका। हालांकि सिर्फ रुपए 72 करोड़ का भुगतान चेक में और बाकी 128 करोड़ रुपए नकद लिए गए। मजेदार बात यह है कि यहां का सर्किल रेट (न्यूनतम दर जिसे रजिस्ट्रेशन का कलेक्टर तय करता है) रुपए 30 हजार प्रति स्क्वायर यार्ड है। यानी जमीन की ही कीमत रुपए 150 करोड़ रुपए होती और तीन लाख फीट का कुल कवर्ड क्षेत्र यदि कम से कम तीन लाख रुपए फीट भी हो जमीन की कीमत रुपए 1200 करोड़ प्रति स्क्वायर फीट की दर पर पहुंचेगी आैर इससे कम से कम रुपए 36 करोड़ का सौदा बैठता। इतना ही नहीं, प्रीमियम स्कूल काफी माना हुआ स्कूल है। यहां चार हजार छात्र पढ़ते हैं। इसकी भी कीमत अलग बनती।

छानबीन से पता लगा कि जेम्स इंटरनेशनल पालम विहार और लखनऊ सुशांत गोल्फ सिटी इस समय बिक्री के लिए हैं। इनकी तय कीमत 32 करोड़ और 25 करोड़ क्रमशः है। पिछले साल एक दूसरे परिवार के मालिकाने मंे  एक दूसरे परिवार के पास 4.83 एकड़ का फार्म हाउस नं. ए 1, पुष्पांजलि, दिल्ली है। जिसकी माप 1.13 एकड़ है। यह जूलियन इंफ्राकन प्राइवेट लिमिटेड (मालिक अवधेश गाेयल) को रु. 22 करोड़ में बेची गई लेकिन इसकी रजिस्ट्री सिर्फ रु. पांच करोड़ मात्र की ही कराई गई। फार्म का बाकी हिस्सा 3.70 करोड़ पर बेचा गया लेकिन रजिस्ट्री रुपए छह करोड़ पर हुई और बाकी रुपए 64 करोड़ कथित तौर पर नकद लिए गए।

पूछताछ से पता लगा कि सुशील अंसल और उसके पुत्र प्रणव अंसल इस नकदी को  टैक्स फ्री यूके और सिंगापुर के अपने विदेशी खातों में जमा कर रहे हैं। वे सिंगापुर, यूके और दुबई में संपत्तियां खरीद भी रहे हैं। इनमें एक होटल है दुबई में शेख जईद रोड पर, और यूके की सबसे ऊंची आवासीय इमारत ‘एसएनएआरडी’ में पचास करोड़ का एपार्टमेंट है। पिता अाैर पुत्र आए दिन सिंगापुर और दुबई आते-जाते रहते हैं। जिससे सवाल उठता है कि क्या वे अवैध रूप से वहां कमाया धन तो वहां नहीं रख रहे हैं। पूछताछ से पता चला कि अंसल परिवार ने काफी बड़ी रकम सुशील अंसल के पोते – प्रणव अंसल के बच्चों बेटे आयुष अंसल और बेटी अनुष्का अंसल के भी नाम विदेशी बैंकों मसलन एचएसबीसी, बार्कलेज बैंक, नैटवेस्ट, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंकों की सिंगापुर, दुबई आैर यूके की शाखाओं में उनके खातों में डाल रखी है और अब तो इन्हें एनआरआई (नॉन रेसिडेंट इंडियन) का दर्जा भी हासिल है।

ऐसी भी जानकारी है कि कंपनी के एमडी और सीईओ कथित तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग-24 पर पांच सौ एकड़ से ज्यादा जमीन हाई-टेक टाउनशिप विकसित करने में अवैध नकदी का उपयोग कर रहे हैं जिसकी कीमत 15 सौ करोड़ से भी ज्यादा होगी।

अंसल एपीआई पब्लिक लिस्टेड कंपनी है। कंपनी ने एक ओर तो विभिन्न कंपनियों के साथ एकतरफा समझौते किए हैं। मसलन सुशील अंसल के संबंधी जैसे विपिन लूथरा (दामाद) जो वेस्टबरी हॉस्पिटैलिटी और उत्तम गालवा के मिगलानी (प्रणव अंसल के ससुर)। लेन-देन के इन समझाैतों से अंसल एपीआई को करोड़ाें का घाटा उठाना पड़ा। ऐसे ही एक समझौते में सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में 15 गोल्फ विला की बिक्री काफी कम कीमत में हुई। साथ ही विभिन्न सब्सिडियरी और पारिवारिक मालिकाने की कंपनियों ने विपिन लूथरा की कंपनी मंे निवेश भी किया आैर दस रुपए कीमत के 4,40,000 शेयर भी वेस्टबरी होटल्स प्राइवेट लिमिटेड में लिए जिसे बाद में दिल्ली टावर्स  एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड ने ले लिया।

द ग्रुप अंसल एपीआई ने बैंकों से लिए गए कर्जों का भी खूब गोलमाल किया है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी बैंक से 239.54 करोड़ के धन के साथ भी काफी गड़बड़ियां हुईं। विभिन्न बैंकों के खातों पर यदि नजर डाली जाए तो पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, यस बैंक, फेडरल बैंक और तमिलनाडु बैंक से जानकारी मिलती है कि किस तरह एक ही संपत्ति को विभिन्न बैंकों में गिरवी रख कर कर्ज लिया गया। कई संपत्तियां जिन पर कर्ज लिए गए थे वे जाली सेल डीड बनाकर निवेशकों को बेच दी गईं। अंसल एपीआई की ढेरों सब्सिडियरी कंपनियों के शेयर बेहद ऊंची प्रीमियम पर बिके जबकि कंपनियां घाटे में थीं। कोलकाता और दिल्ली में बनाई गई कई ‘शेल’ कंपनियों के जरिए करोड़ाें रुपयों का वारान्यारा हुआ।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 8 Issue 23, Dated 15 December 2016)

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