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प्रधानमंत्री: आपातकाल के काले दिनों को कभी भुलाया नहीं जा सकता

सन् 1975 में देश में आज ही के दिन इमरजेंसी लगाई गई थीं।  आज से ठीक 46 साल पहले देश में आपातकाल का ऐलान किया गया था। इमरजेंसी की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा की गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल के समय के सभी महानुभावों को याद किया है उन्होंने आपातकाल का विरोध किया और भारतीय लोकतंत्र की रक्षा की।

प्रधानमंत्री ने आपातकाल को याद करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है और ट्वीट कर लिखा, “डार्कडेस ऑफ इमरजेंसी, इमरजेंसी के काले दिनों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सन् 1975 से 1977 तक की अवधि में संस्थानों का व्यवस्थित विनाश देखा गया था।

उन्होंने कहा, आइए हम भारत की लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लें, और हमारे संविधान में निहित मूल्यों पर खरा उतरें।

इस तरह कांग्रेस ने हमारे लोकतांत्रिक लोकाचार को कुचला। हम उन सभी महानुभावों को याद करते हैं जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और भारतीय लोकतंत्र की रक्षा की।“

सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने नारदा मामले से खुद को किया अलग

 

सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने नारदा मामले से खुद को अलग कर लिया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में नारदा स्टिंग टेप मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और कानून मंत्री मलय घटक द्वारा याचिका दायर की गई थी। नारदा मामले में 17 मई को सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के चार नेताओं को गिरफ्तार किया था।

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कानून मंत्री मलय घटक की भूमिका को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की इजाजत नहीं दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा था जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

वर्ष 2014 में बंगाल में एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था। जिसका खुलासा वर्ष 2016 में विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया द्वारा किया गया था। इस वीडियो के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में टीएमसी के एक विधायक, चार मंत्री, सात सांसद और एक पुलिस अधिकारी को बंगाल में एक प्रोजेक्ट में निवेश के नाम पर नगद राशि लेते हुए दिखाया गया था।

कोरोना की तीसरी लहर से अभी ही तैयारी करें, राहुल गांधी की मोदी सरकार को सलाह  

कोविड-19 के मामले में मोदी सरकार को लगातार सुझाव देते रहे और उसकी खिंचाई भी करते रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस करके कोरोना पर एक श्वेत पत्र जारी करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विशेषज्ञ तीसरी लहर की बात कह चुके हैं लिहाजा उसका मजबूत मुकाबला करने के लिए अभी से तैयारी कर लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली और दूसरी लहर के दौरान बहुत सी कमियां रही हैं और ऐसे लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा, जिन्हें बचाया जा सकता था।
राहुल ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आनी तय है, ऐसे में सरकार इसकी तैयारी करके ही जनता को महामारी से बचा सकती है। गांधी ने कोरोना को लेकर श्वेत पत्र जारी किया और सरकार से कहा कि उसे गलती सुधारने की ज़रुरत है क्योंकि ऐसा करके ही आप लोगों को बचा सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि श्वेत पत्र का मकसद सरकार की निंदा करना नहीं बल्कि उसे  रास्ता दिखाना है। राहुल ने कहा कि दूसरी लहर में 90 फीसदी मौतें सुविधाओं के अभाव में हुईं। इनमें ऑक्सीजन से लेकर बेड और दूसरी जरूरतें शामिल हैं जिनका भयंकर अभाव रहा। उन्होंने कहा – ‘वैज्ञानिकों ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए सरकार को चेताया था, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। दूसरी लहर संभालने में सरकार विफल रही है। सरकार की लापरवाही से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की भी मौत हो गयी जिन्हें बचाया जा सकता था। करोड़ों लोग कोरोना से प्रभावित हुए। यह समझना ज़रूरी है कि कोरोना का असर सिर्फ बीमारी के रूप में नहीं है बल्कि इसका असर आपकी आर्थिक, सामजिक ज़िंदगी पर भी पद रहा है।’
राहुल गांधी ने कहा कि ‘अब पूरा देश जानता है कि तीसरी लहर आने वाली है। ऐसे में सरकार को पहले से इसकी तैयारी करनी चाहिए। श्वेत पत्र में तीसरी लहर की तैयारी, दूसरी लहर की खामियां, आर्थिक रूप से मदद और और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की व्यवस्था का जिक्र है। जब तीसरी लहर आए तो आम लोगों को कम से कम परेशानी हो और जिनके परिवार में कोरोना से मौत हुई है उन्हें मदद दी जाए।’
याद रहे राहुल गांधी कोरोना महामारी के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा देने में मोदी सरकार के सुप्रीम कोर्ट में  असमर्थता जताए जाने पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा था। गांधी ने इसे लेकर अपने ट्वीट में कहा – ‘जीवन की कीमत लगाना संभव नहीं है। सरकारी मुआवजा सिर्फ एक छोटी सी सहायता होती है। लेकिन मोदी सरकार यह भी करने को तैयार नहीं। कोविड महामारी में पहले इलाज की कमी, फिर झूठे आंकड़े और ऊपर से सरकार की यह क्रूरता।’
राहुल ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीकाकरण और कोविड-19 के मामले कम होने या इसके ख़त्म होने पर प्रचार पर ध्यान देने की जगह लोगों को सुविधाएं देने पर फोकस करने की ज़रुरत है। प्रचार करने और श्रेय लेने के लिए बहुत समय पड़ा है और ऐसा आप कोरोना के पूरी तरह ख़त्म होने के दो साल बाद भी कर सकते हैं।’
उनसे एक सवाल यह भी पूछा गया कि देखने में आया है कि अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वर्ग और महिलाएं बहुत कम संख्या में टीकाकरण के लिए सामने आये हैं। राहुल ने कहा कि टीकाकरण में पीएम, सीएम, डीएम से लेकर जनता तक सबको इन्वाल्व करने की जरूरत है। पूरे देश को इसे लेकर बताया और जोड़ा जाना चाहिए।’

Elderly women found murdered at Delhi’s Burari

 

 An elderly woman of 65 years was found dead with her throat slit and burns to the left leg in north Delhi’s Burari area, police said on Sunday.

According to police, the son of the women, Parmod, 38, who runs a dhaba along with his wife, had gone to Khajuri on Saturday. When they returned to their house around 10 pm, they found that his mother Rajwari had her throat slit and burn injuries to her left leg, a senior police officer said.

It shows that the accused was familiar to the house and were known to Rajwari, police said.

The body was shifted to Sabzi Mandi mortuary and the post-mortem will be conducted on Sunday, they said.

Police are looking into all aspects, including the theft angle, the officer said. A case of murder has been registered and three teams have been formed to swipe the accused.

To ascertain the identities of the accused CCTV footages are being checked, police said.

 

उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज, 15 अगस्त के बाद चुनावी रंग में दिखेगा

भले ही उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में 7-8 महीने से कम समय बचा हो पर, सियासी हलचल दिन व दिन तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्ड़ा से मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायकों में उथल- फुथल मची हुई है। विधायकों ने तहलका संवाददाता को बताया कि जब से पश्चिम बंगाल में भाजपा की करारी हार हुई है । तब से आलाकमान से लेकर प्रदेश भाजपा के नेता बड़ी ही सूझबूझ से सियासी चाल चल रहे है।एक विधायक ने बताया कि राजनीति में कब क्या हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता है।क्योंकि कुछ विधायकों के टिकट कटने की संभावना अधिक है। प्रदेश की राजनीति के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में भाजपा, सपा,बसपा और कांग्रेस के नेताओं का एक दूसरे दलों में आने-जाने का सियासी खेल खेला जायेगा। जिसके लिये अभी से जोड़ तोड़ का सियासी ताना बाना बनना और बनाना शुरू हो गया है। भले ही अभी ये राजनीतिक चालें चर्चा में ना हो । लेकिन जैसे ही चुनावी विसात बिछनी शुरू होगी त्यों ही नये –नये चहरे एक दल से दूसरे दल में जाने में देर नहीं करेंगे। माना जा रहा है कि इस बार का चुनाव किसी भी दल के लिये एक तरफा का चुनाव नहीं है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अभी से जोड़-तोड़ की राजनीति में लगें हुये है। दिल्ली से लखनऊ तक नेतओं का आना –जाना अब हर रोज तेज हो रहा है।

बताते चलें कोरोना के कहर की गति कम होते ही और 15 अगस्त के बाद उत्तर प्रदेश पूरी तरह से चुनावी रंग में दिखने लगेगा।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को व्यक्ति ने मार दिया थप्पड़, पकड़ा गया

एक बड़ी घटना में मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को एक व्यक्ति ने एक थप्पड़ मार दिया। राष्ट्रपति उस समय लोगों से मुलाकात कर रहे थे जब यह घटना हुई। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति मैक्रों को थप्पड़ मारने की यह घटना दक्षिणपूर्वी फ्रांस के ड्रोम क्षेत्र की है। उस समय राष्ट्रपति लोगों के साथ वॉकआउट सेशन में थे जब यह घटना हुई। अचानक एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। हरे रंग की टीशर्ट, धूप का चश्मा और मास्क पहने यह व्यक्ति चिल्लाकर ‘डाउन विद मैक्रोनिया’ कहता सुना जा रहा है और अचानक वह राष्ट्रपति मैक्रों को थप्पड़ मार देता है।
ऐसा होते ही राष्ट्रपति के सुरक्षा कर्मियों ने दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। उनके साथ जुड़ी घटना के वीडियो में दिख रहा है कि घटना तब हुई जब राष्ट्रपति हाथ जोड़े एक किनारे पर कतार में खड़ी लोगों की भीड़ के पास पहुंचे। कुछ लोगों ने उनके साथ हाथ मिलाया लेकिन अचानक मास्क पहने एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। उनके सुरक्षा कर्मी तुरंत राष्ट्रपति को एक किनारे ले गए और उस व्यक्ति को पकड़ लिया।
कुछ ख़बरों के मुताबिक पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के बीएफएम टीवी और आरएमसी रेडियो ने इस घटना की पुष्टि की है। घटना की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल हुई है।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को व्यक्ति ने मार दिया थप्पड़, पकड़ा गया

एक बड़ी घटना में मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को एक व्यक्ति ने एक थप्पड़ मार दिया। राष्ट्रपति उस समय लोगों से मुलाकात कर रहे थे जब यह घटना हुई। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति मैक्रों को थप्पड़ मारने की यह घटना दक्षिणपूर्वी फ्रांस के ड्रोम क्षेत्र की है। उस समय राष्ट्रपति लोगों के साथ वॉकआउट सेशन में थे जब यह घटना हुई। अचानक एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। हरे रंग की टीशर्ट, धूप का चश्मा और मास्क पहने यह व्यक्ति चिल्लाकर ‘डाउन विद मैक्रोनिया’ कहता सुना जा रहा है और अचानक वह राष्ट्रपति मैक्रों को थप्पड़ मार देता है।
ऐसा होते ही राष्ट्रपति के सुरक्षा कर्मियों ने दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। उनके साथ जुड़ी घटना के वीडियो में दिख रहा है कि घटना तब हुई जब राष्ट्रपति हाथ जोड़े एक किनारे पर कतार में खड़ी लोगों की भीड़ के पास पहुंचे। कुछ लोगों ने उनके साथ हाथ मिलाया लेकिन अचानक मास्क पहने एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। उनके सुरक्षा कर्मी तुरंत राष्ट्रपति को एक किनारे ले गए और उस व्यक्ति को पकड़ लिया।
कुछ ख़बरों के मुताबिक पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के बीएफएम टीवी और आरएमसी रेडियो ने इस घटना की पुष्टि की है। घटना की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल हुई है।

कोरोना के डेथ सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो क्यों नहीं : मांझी

कोरोना टीके की कमी को लेकर जहां कई राज्य परेशान है और बहुत जगह तो सभी वयस्कों के टीकाकरण पर रोक लगा दी गई है। इस बीच, सियासत और बयानबाजी भी जारी है। कोरोना टीकाकरण के बाद मिलने वाले प्रमाण पत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। इससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान मामले ने तूल पकड था। ताजा मामला बिहार में एनडीए सरकार में साझीदार हम पार्टी ने निशाना साधा है।

हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर निशाना साधा ‘को-वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद मुझे प्रमाण-पत्र दिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री की तस्वीर लगी है। देश में संवैधानिक संस्थाओं के सर्वेसर्वा राष्ट्रपति हैं। इस नाते उसमें राष्ट्रपति की तस्वीर होनी चाहिए। वैसे तस्वीर ही लगानी है तो राष्ट्रपति के अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की भी तस्वीर हो। इससे पहले केंद्र सरकार कह चुकी है कि राज्यों को खुद टीकाकरण का खर्च उठाना होगा।

नीतीश सरकार में सहयोगी जीतन राम मांझी ने सोमवार को एक और ट्वीट किया जिसमें लिखा कि वैक्सीन के सर्टिफिकेट पर यदि तस्वीर लगाने का इतना ही शौक है तो कोरोना से हो रही मृत्यु के डेथ सर्टिफिकेट पर भी तस्वीर लगाई जाए। यही न्याय संगत होगा।

कोरोना के नाम पर राजनीति के चलते हेल्थ सिस्टम नहीं सुधारा, जिसके चलते हाहाकार मचा है 

 

देश में कोरोना महामारी ने लोगों को वो अनुभव दिये है। जो उसे आसानी से ना मिलते । मौजूदा वक्त में एक ओर कोरोना का कहर तो दूसरी ओर किस्तों में लाँकडाउन या कर्फ्यू का लगना लोगों के आम जीवन को अस्त- व्यस्त कर मुशीबत में डाल दिया है। तहलका संवाददाता को डाक्टरों ,व्यापारियों और आम लोगों ने बताया कि लाँकडाउन के कारण उनको किस कदर तामाम झंझावतों से जूझना पड़ रहा है। डीएमए के पूर्व अध्यक्ष डाँ अनिल बंसल का कहना है कि दिल्ली में कोरोना की चेन को तोड़ने के लिये दिल्ली सरकार ने जो फैसला लिया है, वो सराहनीय है। क्योंकि दिल्ली में कोरोना का कहर रूक ही नहीं रहा है। ऐसे में लाँकडाउन होने से कोरोना की चेन टूटेगी और जिससे कोरोना के मामले भी कम सामने आयेगे। जबकि दिल्ली के स्थानीय इलाकों में छोटी –छोटी दुकान खोलकर अपने परिवार का पालन -पोषण करने वाले दुकानदारों ने बताया कि उनकी दुकान का किराया अब लाँकडाउन के लगने से नहीं निकल रहा है। सरकार ने लाँकडाउन लगाकर छोटे व्यापारियों की हालत पतली कर दी है। दुकानदार सुरेश गुप्ता का कहना है कि अगर ऐसे ही कोरोना के कारण लाँकडाउन का सिलसिला चलता रहा तो, वो दिन दूर नही। जब छोटे दुकानदारों को अपनी दुकाने बंद करनी होगी। क्योंकि पिछले साल के लाँकडाउन से अभी व्यापारी उभर ही नहीं पाया था, कि अब फिर से लाँकडाउन। दिल्ली के लोगों ने बताया कि देश में केन्द्र सरकार और दिल्ली की आप सरकार कोरोना को काबू करने में असफल रहे है। क्योंकि दोनों सरकारों ने सिर्फ राजनीति कर कोरोना के नाम पर जनता को गुमराह किया है। जबकि सरकार को पता था कि कोरोना सालों- साल रहने वाली बीमारी है। तो सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्यों सुधार नहीं किया है।अगर देश का स्वास्थ्य सिस्टम बेहत्तर होता तो कोरोना को लेकर हाहाकार ना होता। आज वैक्सीन और आँक्सीजन के न मिलने से मरीजों को परेशानी हो रही है। दवाओँ का टोटा होने लगा है। जो अपने आप में कोरोना जैसी बींमारी के रूप में लोगों को देश के नेताओं की राजनीति से अवगत करा रहा है। कि देश के नेता जनता के लिये कितना सोचते है।