सोनारपुर में टीएमसी नेता पर पथराव के मामले में 4 गिरफ्तार

इस मामले में न तो अभिषेक बनर्जी और न ही टीएमसी की तरफ से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने इलाके के वीडियो फुटेज के आधार पर खुद (सुओ मोटो) संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए हिंसक हमले के मामले में पुलिस ने रातभर छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी शनिवार को चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक वहां मौजूद उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने “चोर-चोर” के नारे लगाते हुए उन पर पथराव किया, अंडे फेंके और गाली-गलौज की। हालात इतने बिगड़ गए कि अभिषेक बनर्जी को भीड़ के हमलों और पत्थरों से बचने के लिए क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा, और उनके सुरक्षाकर्मियों व सहायकों ने किसी तरह उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

इस हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को इलाज के लिए कोलकाता ले जाया गया, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। अभिषेक बनर्जी को पहले अपोलो मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल और बाद में बेले व्यू क्लिनिक ले जाया गया। उन्होंने गर्दन, पीठ और कमर में दर्द की शिकायत की थी। हालांकि, दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना था कि उनकी चोटें बाहरी और मामूली हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके सीने पर मामूली खरोंचें थीं और वे पूरी तरह होश में थे, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अस्पताल प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे “ऊपर से आए दबाव” के आगे झुक गए और उनके भतीजे का ठीक से इलाज नहीं किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “इसी वजह से हमने उन्हें घर ले जाने का फैसला किया।” उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी नागरिक को आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति में बाहरी राजनीतिक दबाव के डर का सामना नहीं करना चाहिए।

टीएमसी प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए लिखा: शासक ही कातिल बन गए—बीजेपी तुम्हें शर्म आनी चाहिए!” पार्टी नेता फिरहाद हकीम और डेरेक ओ’ब्रायन ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं।

बीजेपी का पलटवार

बीजेपी ने इस हमले में शामिल होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हिंसा की निंदा तो की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह कोई सुनियोजित राजनीतिक हमला नहीं बल्कि स्थानीय लोगों का गुस्सा था।

समिक भट्टाचार्य ने कहा, “इस तरह की घटनाओं में बीजेपी का कोई हाथ नहीं है। लेकिन जो कुछ भी हुआ, वह उन स्थानीय लोगों के गुस्से का नतीजा हो सकता है, जिन्हें सालों से प्रताड़ित किया गया है।”