
नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। सरकार का कहना है कि वह परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और इससे जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार है। हालांकि, मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही और अंततः पूरे दिन का कामकाज नहीं हो सका।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार NEET पेपर लीक सहित सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चाहती है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह नारेबाजी और व्यवधान के बजाय सदन में बहस करे। सरकार का कहना है कि छात्रों से जुड़े इस गंभीर विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए वह पूरी तरह तैयार है।
वहीं विपक्ष ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, CJP आंदोलन, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की, पोस्टर लहराए और सरकार से तत्काल जवाब की मांग की। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
संसद के बाहर भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही की मांग की। उधर, CJP आंदोलन को लेकर देशभर में प्रदर्शन जारी हैं और कई विपक्षी दल आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए संसदीय दल की बैठक में NEET पेपर लीक को युवाओं के भविष्य के साथ हुआ “घोर पाप” बताया था। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार के अनुसार, मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है।
सरकार का कहना है कि वह संसद में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने और विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने को तैयार है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा नहीं, बल्कि जवाबदेही तय होना और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है। ऐसे में संकेत हैं कि मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी NEET पेपर लीक और छात्रों का मुद्दा संसद की कार्यवाही पर हावी रह सकता है।
