पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस, मंत्रियों को भी खर्च घटाने का संदेश

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन आपूर्ति पर असर के बीच अब भारत में भी बचत की पहल तेज होती दिख रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद मिसाल पेश करते हुए मोटरसाइकिल से विधान भवन पहुंचकर ईंधन बचाने का संदेश दिया। उनके इस कदम को सरकार की नई सादगी और बचत नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in
पेट्रोल बचाने के लिए बाइक पर निकले सीएम फडणवीस। | Image Source: NDTV.in

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने गुरुवार को एक अलग अंदाज में सबका ध्यान खींचा। आमतौर पर बड़े काफिले के साथ चलने वाले मुख्यमंत्री इस बार मोटरसाइकिल पर सवार होकर विधान भवन पहुंचे। वह विधान परिषद के नए सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे थे।

मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से दक्षिण मुंबई स्थित विधान भवन तक बाइक से पहुंचे। इस दौरान उनके साथ भाजपा नेता और मंत्री Ashish Shelar भी मौजूद थे। इस कदम को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील के बाद उठाए गए प्रतीकात्मक लेकिन अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों और सरकारी विभागों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और खर्च में कटौती करने की अपील की थी। इसी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी कई बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्रियों के काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी करने का फैसला किया है। साथ ही मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों पर भी रोक लगाने की घोषणा की गई है।

सरकार ने साफ कहा है कि अब किसी भी बाहरी दौरे में मंत्रियों के काफिले में तय सीमा से ज्यादा वाहन नहीं होंगे। इसकी निगरानी स्थानीय पुलिस अधिकारी करेंगे। इसके अलावा अलग-अलग विभागों को दिए गए सरकारी वाहनों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि अनावश्यक खर्च रोका जा सके।

ईंधन बचाने की इस मुहिम में अन्य मंत्री भी हिस्सा लेते दिखे। राज्य के मंत्री Nitesh Rane ने मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रालय तक पैदल जाना चुना। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की शुरुआत है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार का यह संदेश साफ है—बचत की शुरुआत ऊपर से होगी, ताकि आम लोगों को भी प्रेरणा मिल सके।