त्योहारों की सेल में भारी छूट का लालच पड़ सकता है महंगा! एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक खाता, साइबर ठगों ने बिछाया फर्जी ऑफर्स का जाल

स्नेहलता | नई दिल्ली
त्योहारों का मौसम है। मोबाइल पर 70 से 90 फीसदी तक छूट के विज्ञापन, सोशल मीडिया पर ब्रांडेड सामान के लुभावने ऑफर और व्हाट्सऐप पर ‘एक के साथ एक फ्री’ के संदेशों की भरमार है। लेकिन सावधान! सस्ते सामान की तलाश में किया गया एक क्लिक आपकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकता है। साइबर ठग त्योहारों की खरीदारी के उत्साह का फायदा उठाकर नकली वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन और संदिग्ध पेमेंट लिंक के जरिए लोगों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस खतरे को लेकर दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट IFSO ने भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर फर्जी शॉपिंग वेबसाइटों से बचने के लिए जागरूकता संबंधी जानकारी दी है। पुलिस ने बताया है कि ठग आकर्षक ऑफर, बेहद कम कीमत और मुफ्त उपहार का लालच देकर ग्राहकों को फर्जी वेबसाइटों के जाल में फंसा सकते हैं। ऐसे में ऑनलाइन खरीदारी करने से पहले वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचना और अनजान विक्रेता को बिना सत्यापन भुगतान करने से बचना जरूरी है।

दिल्ली पुलिस की आधिकारिक चेतावनी: https://cyber.delhipolice.gov.in/Fakeshoppingsite.html

हजारों रुपये का मंदिर सिर्फ 3,000 रुपये में! पहले 1,000 रुपये देने की शर्त

इस खतरे का एक अनुभव तहलका की रिपोर्टर के साथ भी सामने आया। एक विक्रेता ने हजारों रुपये का मंदिर मात्र 3,000 रुपये में देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन इसके लिए पहले 1,000 रुपये एडवांस देने की शर्त रखी। जब रिपोर्टर ने कहा कि सामान की डिलीवरी होने पर पूरा भुगतान कर दिया जाएगा, तो विक्रेता ने इस प्रस्ताव से इनकार कर दिया। रिपोर्टर ने जब अपना परिचय तहलका से जुड़ी पत्रकार के रूप में दिया, तो आरोप है कि सामने वाले ने तुरंत उनका नंबर ब्लॉक कर दिया।

यह घटनाक्रम एडवांस भुगतान के नाम पर होने वाली संभावित ठगी को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, केवल नंबर ब्लॉक कर देने से यह साबित नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति साइबर ठग ही था। विक्रेता की पहचान और उसके इरादों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। लेकिन बिना सत्यापन के किसी अनजान विक्रेता को पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

नाम बड़े ब्रांड का, वेबसाइट ठगों की!

साइबर ठग नामी कंपनियों के लोगो, तस्वीरों और वेबसाइट के डिजाइन की नकल करके ऐसी वेबसाइट बना सकते हैं, जो पहली नजर में असली लगती हैं। फिर सोशल मीडिया पर भारी छूट का विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है।

ग्राहक लिंक पर क्लिक करके सामान ऑर्डर करता है और भुगतान कर देता है, लेकिन कई मामलों में सामान नहीं मिलता या विक्रेता से संपर्क टूट जाता है। कुछ फर्जी पेज व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी चुराने के लिए भी बनाए जाते हैं।

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट IFSO की वेबसाइट पर दी गई जागरूकता संबंधी जानकारी भी इसी खतरे की ओर ध्यान दिलाती है। ऑनलाइन खरीदारी के दौरान किसी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचे बिना भुगतान करना नुकसान का कारण बन सकता है।

‘90% डिस्काउंट’ देखकर न हो जाएं उत्साहित

कल्पना कीजिए कि किसी वेबसाइट पर हजारों रुपये का सामान कुछ सौ रुपये में मिलने का दावा किया जा रहा है। ग्राहक को लगता है कि त्योहार से पहले इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा। वह बिना वेबसाइट की जांच किए भुगतान कर देता है। इसके बाद वेबसाइट बंद हो जाती है या ऑर्डर का कोई पता नहीं चलता।

फर्जी ग्राहक सेवा नंबर, रिफंड के नाम पर भुगतान मांगने और मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाने जैसे तरीके भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं। ठग ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

हर सस्ता ऑफर फर्जी नहीं होता। लेकिन असामान्य रूप से कम कीमत, अनजान विक्रेता, पहले भुगतान करने का दबाव और सवाल पूछने पर संपर्क तोड़ देना खतरे के संकेत हो सकते हैं।

त्योहारों की खरीदारी में इन बातों का रखें ध्यान

– विक्रेता की पहचान जांचें: उसका नाम, पता, संपर्क विवरण और पुराने ग्राहकों की समीक्षाएं देखें।

– वेबसाइट की पुष्टि करें: विज्ञापन में मिले लिंक के बजाय कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाएं।

– बिना सत्यापन एडवांस न दें: खासकर किसी अनजान सोशल मीडिया विक्रेता या व्हाट्सऐप नंबर पर।

– यूपीआई पिन और ओटीपी साझा न करें: सामान खरीदने या पैसा प्राप्त करने के लिए इनकी जानकारी किसी को न दें।

– जल्दबाजी में फैसला न लें: ‘ऑफर अभी खत्म हो जाएगा’ जैसे दबाव में भुगतान करने से बचें।

– सभी प्रमाण सुरक्षित रखें: चैट, विक्रेता का नंबर, विज्ञापन, भुगतान विवरण और ऑर्डर की जानकारी संभालकर रखें।

ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?

यदि संदिग्ध ऑनलाइन सौदे में पैसे कट जाएं, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से संपर्क करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in/

शिकायत करते समय भुगतान का विवरण, संबंधित मोबाइल नंबर, चैट और उपलब्ध स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। जल्द शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को लेनदेन पर कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

त्योहारों की बचत कहीं ठगी का कारण न बन जाए

त्योहार खुशियां बांटने का समय है, लेकिन कुछ रुपये बचाने की जल्दबाजी में अपनी मेहनत की कमाई जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। तहलका की रिपोर्टर के साथ हुए अनुभव में एडवांस भुगतान की शर्त और उसके बाद नंबर ब्लॉक किए जाने की घटना ऑनलाइन खरीदारी में सावधानी बरतने की जरूरत को सामने लाती है।

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट IFSO की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध चेतावनी भी ग्राहकों को फर्जी शॉपिंग साइटों के प्रति सतर्क रहने का संदेश देती है।

याद रखें—सस्ता सौदा तभी अच्छा है, जब सामान, विक्रेता और भुगतान की प्रक्रिया भरोसेमंद हों।