कलाम की पाठशाला में महिला प्रतिनिधि

इर्शादुल हक की रिपोर्ट

15 नवंबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने बिहार में विकास की गति को तेज करने में विधायकों की भूमिका पर भाषण दिया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व राष्ट्रपति को विधानमंडल के सदस्यों और मंत्रियों को संबोधित करने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया था. मुख्यमंत्री का मानना था कि इससे विधायकों में प्रेरणा का संचार होगा. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कलाम से काफी प्रेरित रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति ने अपने संबोधन से पहले बिहार के तमाम विधायकों के लिए दस सवालों की एक सूची भी भेजी थी (बॉक्स देखें). किंतु एक सर्वेक्षण के मुताबिक तकरीबन 70 प्रतिशत विधायकों ने इन सवालों का जवाब नहीं दिया. जवाब न देने वाली महिला विधायकों की संख्या और भी अधिक रही. लगभग 90 प्रतिशत महिला विधायक कलाम के सवालों को टाल गईं. इसी को ध्यान में रखते हुए तहलका ने इन सवालों को अनेक महिला विधायकों के समक्ष रखा.

पिछले दस सालों में बिहार की महलाओं में राजनीतिक सशक्तीकरण जिस अनुपात में बढ़ा है उसकी मिसाल पिछले पचास साल में नहीं मिलती.  बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 32 सीटों की नुमाइंदगी महिलाएं करती हैं जो कुल संख्या का 13.16 प्रतिशत है. जबकि मई, 2011 में हुए पांच राज्यों के चुनावों में महिला प्रतिनिधियों के चुनकर आने का औसत महज सात फीसदी ही रहा. इन राज्यों में से असम में 11 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 12, तमिलनाडु में सात, केरल में पांच और पांडिचेरी में शून्य फीसदी महिलाओं ने सफलता हासिल की. इनमें से दो राज्यों तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में तो महिलाएं मुख्यमंत्री बनी हैं. इन पांच राज्यों में 2006 की तुलना में महिलाओं की नुमाइंदगी घटी है जबकि बिहार में 2005 की तुलना में महिला विधायकों की संख्या में इजाफा हुआ है. 2005 में जहां बिहार विधानसभा में कुल 24 महिलाएं थीं वहीं 2010 के चुनाव के बाद इनकी संख्या में आठ का इजाफा हुआ. सबसे बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बमुश्किल पांच फीसदी महिलाएं हैं.
बिहार में पंचायतों में पचास प्रतिशत आरक्षण है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में महिला जनप्रतिनिधियों का अनुपात और भी बढे़गा. ऐसे में कलाम के दस सवालों के बहाने यह जानना दिलचस्प रहा कि बिहार की महिला जनप्रतिनिधियों की राज और समाज के प्रति क्या सोच है.

मैं क्या बोलूं, हमारे मुखिया ही बोलेंगे–बीमा भारती

रुपौली विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू की 30 वर्षीया विधायक बीमा भारती ने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की है. उनके पति अवधेश मंडल अनेक आपराधिक मामलों में आरोपित हैं. कुछ महीने पहले ही भारती चर्चा में थीं क्योंकि उनके पति ने उनकी जमकर पिटाई की थी. तहलका ने जब उनसे कलाम के दस सवालों के बारे में पूछा तो वे कहती हैं. मैं इसमें क्या बता सकती हूं. काफी जोर देने पर वे कहती हैं, ‘हमारे क्षेत्र में बिजली कटौती की समस्या है. जल स्रोतों को जोड़ने की योजना पर हमने तो कभी सोचा नहीं है. पर बाढ़ आने की स्थिति में लोगों को शिविर में पहुंचाने में हम पीछे नहीं रहेंगे. पूछे गए अन्य प्रश्नों का जवाब भारती कुछ इस तरह से देती हैं कि वे वही करेंगी जो मुख्यमंत्री करने को कहेंगे.

कार्यकर्ताओं के सम्मान की  चिंता–रेणु सिंह

स्नातक तक शिक्षा प्राप्त रेणु सिंह मोतिहारी से निर्दलीय विधान पार्षद हैं. राजनीति का पहले कभी अनुभव नहीं रहा. मगर पति राजू सिंह जदयू से दूसरी बार विधायक बने हैं. कलाम के दस सवालों के जवाब उन्होंने भी नहीं दिए. कहती हैं कि वे उन्हें पढ़ ही नहीं पाईं. तहलका से बातचीत में इन सवालों के जवाब वे कुछ यूं देती हैं, ‘हमारे क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें सरकारी अधिकारियों से समुचित सम्मान नहीं मिलता. इसलिए अगले पांच सालों में मैं क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यही चाहती हूं कि कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान मिले…सौ फीसदी साक्षरता के लिए मैं कोशिश करूंगी. हालांकि मेरे पास फिलहाल कोई ऐसी योजना  नहीं है पर सरकार हमें सुविधा देगी तो हम कुछ न कुछ करेंगे.’ तकरीबन हर सवाल का जवाब रेणु एक निर्दलीय विधायक के तौर पर जैसे दिया जा सकता है, वैसे देती हैं. और बात-बात पर जनता का सहयोग लेने की भी बात करती हैं.

जनता से पूछ कर बताऊंगी–भागीरथी देवी

रामनगर सुरक्षित क्षेत्र की 52 वर्षीया विधायक भागीरथी देवी भाजपा से आती हैं. वे तीन बार से विधायक हैं. भागीरथी ने भी कलाम के सवालों का जवाब नहीं दिया था. तहलका द्वारा पूछे गए अधिकतर सवालों को भागरथी देवी या तो ‘जनता से पूछ कर बताएंगे’ या फिर ‘सरकार जैसा निर्देश देगी उस हिसाब से करेंगे’ बोल कर अपना पल्ला झाड़ लेती है. अगले पांच साल में लोगों की आमदनी दोगुना करने के लिए उन्हें कैसे दक्ष बनाएंगी, इस सवाल पर भागीरथी कहती हैं कि इसके लिए वे अपनी जान भी दे देंगी. यह पूछने पर कि जान देने से लोग कैसे दक्ष बनेंगे, वे कहती हैं, ‘हम सरकार से लड़ेंगे ताकि उन्हें दक्ष बनाया जाए.’ उनके मुताबिक पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए पहले से ही सरकार की योजना चल रही है. और इस मसले पर कुछ और करने की जरूरत नहीं है. बाढ़ से निपटने और जल स्रोतों को जोड़ने पर भी उनका मानना है कि सरकार लगी हुई है. जब सरकार कर ही रही है तो वे इस पर अपनी तरफ से कुछ क्यों सोचें. बिजली कटौती से निपटने के लिए आपके पास कोई योजना है, इस सवाल पर भागीरथी देवी कहती हैं, ‘हम इस पर कुछ नहीं बोलेंगे. हमारी बात केंद्र सरकार सुन नहीं रही है.’ जहां तक समाज में शांति और सौहार्द्र बढ़ाने की बात है तो उनके मुताबिक अब राज्य में स्थिति बदल गई है.

सरकार जाने, मैं क्या जानूं–गुड्डी देवी, रुन्नी सैदपुर

जेडीयू विधायक गुड्डी देवी ने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है. ससुर मदन चौधरी का आसपास के क्षेत्र में व्यापक प्रभाव रहा है. पति राजेश चौधरी की आपराधिक छवि है. गुड्डी का कहना है कि उन्हें जवाब देने का मौका ही नहीं मिल पाया. कलाम के दस सवाल रखने पर गुड्डी देवी का कहना था कि हमारे क्षेत्र में बाढ़ और बिजली सबसे बड़ी समस्या है और इनको दूर करने के लिए स्थायी निदान होना चाहिए. जल स्रोतों की उड़ाही का सवाल है तो मैं यह मानती हूं कि यह जरूरी है क्योंकि नदियों में गाद जमा होने के कारण बाढ़ आ जाती है. इसी तरह बांधों पर जगह-जगह गेट बनवाना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर बाढ़ के पानी को निकाला जा सके. बाकी सवालों पर गुड्डी देवी एक राजनेता का लहजा अख्तियार करके कभी केंद्र सरकार को तो कभी राज्य सरकार को बीच में ले आतीं. वे यह भी कहती हैं कि इस पर इस या उस सरकार को गौर करना होगा.

वंचितों को दबाने से पनपी समस्या–रेणु देवी

मात्र 22 वर्ष की आयु में पति का साया सर से उठ जाने के बाद पचास वर्षीया रेणु देवी ने समाज सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया. लगातार चार बार विधायक बनने वाली रेणु भाजपा से हैं और बेतिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं. कलाम के सवालों के जवाब तो रेणु ने नहीं दिए पर वे अकेली महिला विधायक हैं जिन्होंने उनके भाषण के बाद उनसे सवाल पूछा.
कलाम के सवालों पर उनका जवाब था- ‘पिछले कुछ सालों में समाज के हर तबके, खासकर महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है. गांवों में महिला किसान माइक्रो क्रेडिट का लाभ उठा कर खेती कर रही हैं. हमारी कोशिश है कि अगले पांच सालों में अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ें…सौ फीसदी साक्षरता समाज के लिए जरूरी तो है पर समाज में पढ़ाई के महत्व को समझने वाले लोग अब भी बहुत कम हैं. हम उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं कि शिक्षा ही हमारी आंख है. पर लोग समझें तब तो…लोगों की आय दोगुनी करने के लिए मेरी समझ से सबसे जरूरी है कि लोगों को शराब से मुक्ति दिलाई जाए. चुनाव जीतने के बाद हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने क्षेत्र में सुख और शांति लाएं. उसमें मैं लगी हुई हूं.’

हमने कलाम को जवाब भेजा था–ज्योति देवी

आंगनबाड़ी सेविका से विधायक तक का सफर तय करने वाली 46 वर्षीया ज्योति देवी उन गिनी-चुनी 32 महिला विधायकों में से हैं जिन्होंने कलाम के सवालों का समय पर जवाब दिया था. मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त ज्योति अनुसूचित जाति के भुइयां समुदाय से आने वाली एकमात्र विधायक हैं. इनके महत्वपूर्ण सुझाव  इस तरह थे – ‘पांच साल में मैं जो तब्दीली चाहती हूं वे हैं सड़क निर्माण, बालिकाओं के लिए शिक्षा की व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना ताकि पलायन रुके. सौ फीसदी साक्षरता के लिए शिक्षकों को मध्याह्न भोजन के काम से मुक्त करना और विद्यालयों में सुविधा बढ़ाने पर जोर देना. भ्रष्टाचार रहित बिहार बनाने के लिए सेवा के अधिकार कानून का कड़ाई से पालन हो और इस दायरे में विधायकों को भी लाया जाए.’