एक डॉक्टर की आत्म ’हत्या’

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अनसुलझे सवाल

  • डॉ साकल्ये कॉलेज में फॉरेंसिक साइंस के विभागाध्यक्ष भी थे. वे आराम से मौत को गले लगाने के कई तरीके जानते थे. फारेंसिंक साइंस लैब में ही सौ से अधिक प्रकार के जहर रखे होते हैं. जैसे आर्सेनिक. जो किसी भी मनुष्य की जान केवल 30 सेकंड में ले सकता है. इसके बाद भी उन्होंने अपने शरीर पर केरोसिन डालकर दर्दनाक मौत क्यों चुनी?
  • डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन में इस तरह का जलने का केस पहली बार देखा है. घटना स्थल पर मौजूद साक्ष्यों को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?
  • वे कालेज में व्यापमं घोटाले की जांच कमेटी के सदस्य भी थे. डॉ साकल्ये के प्रभारी डीन बनते ही अभी तक कुल 93 फर्जी विद्यार्थियों को कॉलेज से बाहर निकाला गया. क्या उनपर यह कार्रवाई न करने का दबाव था?
  • उनकी पत्नी के अनुसार वे 20 दिनों से छुट्टी पर थे और किसी दबाव के कारण डिप्रेशन में थे. इसकी क्या वजह थी?

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वहीं जबलपुर के पुलिस अधीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र ने इन सब बातों को खारिज करते हुए कहते हैं कि पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो चुका है कि यह आत्महत्या का ही मामला है. साथ ही वे जानकारी देते हैं, ‘ अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं किया गया. आत्महत्या का कोई स्पष्ट कारण भी सामने नहीं आ पाया है. पर पोस्टमार्टम से साफ है कि यह हत्या नहीं है. हम उनसे संबंधित लोगों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि आत्महत्या की वजह सामने आ सके. जहां तक विसरा सुरक्षित रखने का प्रश्न है तो पुलिस केवल अनुरोध ही कर सकती है. विसरा रखना है या नहीं, यह पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और फोरेंसिक एक्सपर्ट ही तय करते हैं. वैसे हमने पांच अनुभवी और वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम करवाया था.’

डॉ डीके साकल्ये हरदा (मध्य प्रदेश का एक जिला) के रहने वाले थे. उनकी पत्नि भक्ति घरेलू महिला हैं और उनका एक पुत्र रंजन बंगलुरू में इंजीनियर है. रंजन का कहना है, ‘ मेरे पिता आत्महत्या का रास्ता चुनने वाले इंसान नहीं थे. वैसे भी वे आत्महत्या क्यों करेंगे? इसकी कोई वजह तो होनी चाहिए.’

डॉ साकल्ये को अक्टूबर, 2013 में ही कॉलेज का प्रभारी डीन बनाया गया था. मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे का कहना है, ‘ डॉ डीके साकल्ये ने कई फर्जी विद्यार्थियों को बाहर का रास्ता दिखाया था. उनके पास व्यापमं फर्जीवाड़े के कई सबूत थे ऐसे में इस मामले में उनकी गवाही बहुत महत्वपूर्ण थी.’

पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन समेत कई चिकित्सकों ने राज्य सरकार से मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग की थी. फिलहाल राज्य सरकार इसके लिए तैयार भी हो गई है. इससे पहले राज्य सरकार व्यापमं घोटाले की सीबीआई जांच से इनकार कर चुकी है ऐसे में डॉ साकल्ये की कथित आत्महत्या की सीबीआई जांच से हो सकता है इस घोटाले के और कुछ नए आयाम पता चलें.