‘अब ये लड़ाई नहीं छोड़ी जा सकती’

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कौन

1998 से 2001 के बीच दिल्ली में नौकरी से हटाए गए होम गार्ड्स जवान

कब

2006 से

कहां

जंतर मंतर, नई दिल्ली

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क्यों

‘आज मेरी उम्र 45 साल है. घर में दो बच्चे हैं. नौकरी तो गई लेकिन परिवार और अपने खर्चे तो बंद नहीं हुए. खाना चाहिए. बच्चों को स्कूल भेजना होता है. कम से कम दो वक्त की रोटी तो चाहिए ही. इसलिए अब हम दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. जब जैसा काम मिल जाता है, कर लेते हैं. दस-ग्यारह साल नौकरी करने के बाद आज मजदूरी करके पेट भर रहे हैं. मजदूरी करके रोटी कमाना और नौकरी पाने के लिए धरने पर बैठना. यही रोज का किस्सा है.’ चार लाइनों की यह आपबीती है 1990 में दिल्ली में होम गार्ड्स ज्वाइन करने वाले लक्ष्मी प्रसाद की. वे उन हजारों जवान में से एक हैं जिन्हें 1998 से 2001 के बीच कार्य मुक्त कर दिया गया. यह सब अचानक हुआ. किसी को कोई कारण नहीं बताया गया. बस एक दिन उनको सीधे-सीधे जानकारी दी गई कि उस दिन से वे अपनी सेवाएं समाप्त समझें. होम गार्डस एक तरह अर्धसैन्य बल है जिसका गठन पुलिस की मदद के लिए किया गया है. यह विभाग बंबई होम गार्ड्स अधिनियम, 1947 के प्रावधानों से संचालित होता है. इसके मुताबिक होम गार्ड्स ‘स्वंयसेवक’ का कार्यकाल तीन साल का होता है और इसके बाद स्वंयसेवक को कार्यमुक्त कर दिया जाता है लेकिन दिल्ली सहित देश कुछ दूसरे राज्यों में ऐसा हो नहीं रहा है.

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