Volume 6 Issue 10 Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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‘वह धन्यवाद किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस कराने के लिए काफी था’

टेलीविजन पर पर्यटन मंत्रालय का अतिथि देवो भव का अर्थ समझाने वाला आमिर खान का विज्ञापन देखते ही मुझे एक वाकया याद आ जाता है. आप कहीं भी जाइए, अच्छी खासी संख्या में ऐसे लोग मिल जाएंगे जो बात-बात पर सरकार को कोसते रहते हैं कि उसने देश की नाक  

राजकुमार राव: एक आम-सा बड़ा अभिनेता

राजकुमार राव नई पीढ़ी के उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपने भीतर एक अलग अभिनेता खोजा, तो फिल्म उद्योग ने भी इस खोज को हाथों-हाथ लिया  

‘नामवर सिंह सुविधानुसार आलोचना कर्म करते हैं’

वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति उन विरले कथाकारों में हैं जिनकी रचनाओं में देश के ग्राम्य जीवन की महक महसूस की जा सकती है.  

‘लौंडा बदनाम हुआ…’  कब और कैसे?

प्रतिरोध की अभिव्यक्ति के रूप में शुरू होने वाली नृत्य विधा 'लौंडा नाच' कैसे भौंडेपन का पर्याय बन आज सम्मान की लड़ाई लड़ रही है.  

शक्ति के पीछे की शख्सियत

नातजुर्बेकार लौंडे! एक दौर में इस विशेषण का प्रयोग कांग्रेस पार्टी के बुजुर्ग नेता अपने मन की भड़ास निकालने के लिए करते थे. चिढ़न से उपजे इन शब्दों का इस्तेमाल बुजुर्ग कांग्रेसी नेता उन युवाओं को कमतर ठहराने के लिए किया करते थे जिनको लेकर राजीव गांधी भविष्य की कांग्रेस  

हरप्रीत कौर की अजब कहानी

जो देश में बलात्कार से जुड़े मामलों की एक गजब तस्वीर भी दिखाती है.  

जिनको हाशिये पर भी जगह नहीं

चार साल पहले मिर्चपुर से दर-बदर कर दिए गए लगभग 120 दलित परिवार लोकतंत्र के हालिया उत्सव का भी हिस्सा नहीं बन सके. आखिर किसी भी राजनीतिक दल की चिताओं में ये पीड़ित क्यों शामिल नहीं हैं?  

और अनिष्ट की आशंका

हिंसा की जिस हालिया लहर ने असम में 40 जिंदगियां लील लीं वह लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद और विकराल हो सकती है  

नरेंद्र मोदी

भाजपा को दक्षिणपंथी रुझान वाली एक ऐसी स्वतंत्र पार्टी बना सकते हैं जिसकी देश के हर वर्ग और क्षेत्र में पैठ हो.  

लहर जिन पर बेअसर

भयंकर मोदी लहर के बावजूद अपने-अपने राज्यों में एकतरफा जीत हासिल करने वालीं ममता बनर्जी और जयललिता भारतीय राजनीति के इस नए दौर की सबसे ताकतवर महिलाएं बन गई हैं.