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जमाल की जान

तीन पाए का पलंग-एक पाए को तो दीमकों ने चाट लिया- जमाल चुपचाप लेटा हुआ था। उसे बेहद चिंता हो रही थी। न जाने क्यों खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसकी उंगलियां ऊपर और नीचे हो रही थीं। उसके दिमाग में उसका कसा हुआ शरीर घूम रहा था। नहीं!  

हिन्दी कहानी की निरंतर यात्रा

कथा और कहानी का विस्तार ज्यों-ज्यों आकार लेता गया त्यों-त्यों कहानी के शिल्प की बुनावट बदलती गई। कहानी के विषय बदले और कहानी में सघनता, प्रभाव की बात महत्वपूर्ण हो गई। कहानी सन 70 के बाद वैश्विक समस्याओं से ही नहीं जूझती बल्कि अकेलेपन और नगरीय जीवन की बहस में