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सरकार को चाहिए कि आहत भावनाओं का एक आयोग बनाए- नाकोहस यानी नेशनल कमीशन फॉर हर्ट सेंटिमेंट्स! : पुरुषोत्तम अग्रवाल

आपके उपन्यास नाकोहस (नेशनल कमीशन फॉर हर्ट सेंटिमेंट्स) की खूब चर्चा हुई. मौजूदा परिवेश में बात कहते ही आहत होती भावनाओं से व्याप्त डर और अराजक माहौल के चलते उपन्यास शायद ज्यादा प्रासंगिक हो गया है. आपका क्या अनुभव रहा? यह सही है कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के चलते उपन्यास  

‘आपको लगता है कि हर वो आदमी दुश्मन है जो भारत माता की जय नहीं कहता, ऐसे तो ये देश पाकिस्तान बन जाएगा’

देश में आजकल एक खास किस्म का सिलसिला चल रहा है. मैं उसका शिकार बना. वो पहले से जाल बिछाए बैठे थे, मैं फंस गया. सबसे परेशान करने वाली बात कि पाकिस्तान हो या बांग्लादेश, वहां पर बहुत दमन रहा है. हमारे यहां आपातकाल को छोड़ दें तो शायरों या  

पॉजीटिव खबर चलाइए…

बरसों बाद इन दिनों एक बार फिर फील गुड का माहौल है, देश-विदेश में फिर इंडिया शाइन कर रहा है. चमकदार लिबास है, चमकदार नेता हैं और चमकदार बातें हैं. जनता ने जितना चाहा था उससे ज्यादा मिल रहा है, पॉलीटिकल लीडर के साथ मोटिवेशनल और स्प्रिचुअल लीडर भी मिल  

मीडिया और ‘आप’

आत्ममंथन की जरूरत अरविंद केजरीवाल को भी है और मीडिया को भी.