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पुलिस तंत्र में आपको पता नहीं चलता कि कब आप मनुष्य से पशु बन गए : वीएन राय

आपकी किताब  ‘हाशिमपुरा 22 मई’  को लेकर कई तरह के विवाद उठ खड़े हुए. पहली बार हाशिमपुरा हत्याकांड के संदर्भ में भारतीय सेना के आचरण पर भी उंगलियां उठाई गई हैं. आपने इस घटना को भारतीय राज्य की विफलता के रूप में देखा है. क्या इस निंदनीय घटना पर कुछ  

पेरुमल मुरुगन : एक फैसले की कहानी

‘यह चिंता का विषय है कि एक विकसित होते समाज के रूप में हमारी सहिष्णुता का स्तर नीचे जाता प्रतीत हो रहा है. किसी भी विपरीत विचार या सामाजिक सोच को समय-समय पर धमकियों और हिंसक बर्ताव का सामना करना पड़ता है. सामाजिक रीति-रिवाजों पर लोगों के भिन्न-भिन्न विचार होते  

प्रकाशन की मंडी में जिसके पास कलम है, लेकिन पैसा नहीं, वह नहीं छपेगा : नीलोत्पल मृणाल

डार्क हॉर्स आपकी पहली किताब है. पुरस्कार की दौड़ में तमाम किताबें रही होंगी, लेकिन साहित्य अकादेमी पुरस्कार आपको मिला. इस बारे में क्या कहेंगे? निश्चित रूप से यह किसी नए लेखक के लिए बड़ी उपलब्धि होगी. पहली किताब वाले सवाल पर तो कहूंगा कि किसी भी रचनाकार को उसकी  

‘अगर लिंग परीक्षण पर सजा का प्रावधान है तो ऐसे मां-बाप को क्यों नहीं दंडित किया जाना चाहिए जो अपने किन्नर बच्चों को कहीं छोड़ आते हैं?’

आपका  ‘थर्ड जेंडर’  यानी किन्नरों की जिंदगी पर आधारित  उपन्यास  ‘नालासोपारा पो. बॉक्स नं. 203’  हाल ही में प्रकाशित हुआ है. किन्नरों की जिंदगी पर उपन्यास लिखने का विचार कहां से आया? इस उपन्यास में खास क्या है? इस उपन्यास में मैंने आजाद भारत में किन्नरों की स्थिति पर प्रकाश  

आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया- पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर कांच के केस में सुंदर माॅडल खड़ी थी. एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा. कांच टूट गया. आसपास के लोगों ने पूछा  

आजादी तो मिल गई है पर हमें पता नहीं कि उसका करना क्या है?

लगभग बीस साल पहले की बात है. कलकत्ता के ‘फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की ओर से ‘दो बीघा जमीन’ फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय और हमें यानी उनके साथियों को सम्मान दिया जा रहा था. ये एक साधारण पर रुचिकर समारोह था. बहुत अच्छे भाषण हुए, पर श्रोता बड़ी उत्सुकता के  

सड़क किनारे साहित्य

राजधानी दिल्ली का सांस्कृतिक केंद्र है मंडी हाउस और उसके आसपास का इलाका. शाम के वक्त यह इलाका एक साथ कई अलग-अलग तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुलजार रहता है. ऐसी ही एक शाम को मंडी हाउस के श्रीराम सेंटर के बाहर काफी चहलपहल है. स्ट्रीट लाइट की पीली रौशनी