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आदिवासी हूं, मुश्किलों को चुनौती नहीं मानता और खुद को माओवादी कहे जाने से भी नहीं घबराता : बीजू टोप्पो

आपने बीकॉम की पढ़ाई की है, पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी की है. फिर कैमरे से लगाव कैसे हो गया? जब मैं रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ रहा था तभी से राजनीति और सामाजिक सरोकारों में मन रम गया था. रांची आया तो हमारे कुछ साथियों ने मिलकर पलामू छात्रसंघ  

दो साल की मोदी सरकार, अच्छे दिनों का इंतजार

तीस साल बाद केंद्र में प्रचंड बहुमत से आई मोदी सरकार अपने दो साल पूरे कर रही है. निजी तौर पर नरेंद्र मोदी ने सत्ता की दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वी गठबंधन यूपीए (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस) को काफी पीछे छोड़ते हुए एनडीए (नेशनल डेेमोक्रेटिक एलायंस) को जबरदस्त बढ़त दिलाई और प्रधानमंत्री  

‘डोमिसाइल नीति ने बाहरी आबादी को उनकी मुंहमांगी सौगात देने के साथ आदिवासियों के नैसर्गिक अधिकारों में कटौती कर दी है’

  झारखंड में रघुबर दास की भाजपा सरकार ने स्थानीय नीति लागू कर दी है. इस नीति के अनुसार 1985 को कट ऑफ डेट माना गया है.  जबकि झारखंडी जनता 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाने की मांग करती रही है. राज्य बनने के 15 साल बाद आई  

किसका झारखंड?

23 जुलाई, 2002 की बात है. पहली बार रांची पहुंचा था. काम के सिलसिले में जब अगली सुबह निकला तो देखा कि सड़कें वीरान होने लगीं. चारों ओर भय-दहशत का माहौल. तोड़फोड़-आगजनी का दौर शुरू हुआ. गाड़ियां बंद. जो जहां था वहीं छिपने की कोशिश करने लगा. एक-दूसरे के पास  

बच्चों को हथियार बनाते माओवादी!

तीन मार्च को झारखंड के गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के जमदी और कटिया गांवों से एक खबर आती है. भाकपा माओवादी ने दोनों गांवों से बच्चों की मांग की है. इसे न मानने पर जंगल से जलावन के लिए लकड़ी काटने और पशुओं को चराने पर रोक लगा देने  

कर्ज में झारखंड, बढ़ता विधायक फंड

बात फरवरी महीने की है. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास एक आयोजन में मुंबई गए थे. उस आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी भी शिरकत कर रहे थे. कार्यक्रम में उन्होंने रघुबर दास का परिचय कराया, ‘ये हैं हमारे सबसे अमीर राज्य के मुख्यमंत्री.’ इस पर रघुबर दास फूले नहीं समाए. कुछ  

साइमन उरांव : जल, जंगल और जमीन का सर्जक

गणतंत्र दिवस के ठीक पहले की बात है. हर बार की तरह इस बार भी रस्मअदायगी अंदाज में पद्म सम्मानों को लेकर घमासानी वाकयुद्ध छिड़ा हुआ था. फलाना को क्यों मिला, फलाना पर नजर क्यों नहीं गई, फलाना तो सेटिंग-गेटिंग कर पद्म सम्मान लेने में सफल रहे. ऐसी ही बातें  

‘आपको सरकारी ठेका दिलवा देंगे, धरना खत्म कर दीजिए’

कौन सुभाष कुमार मित्तल कब 8 जुलाई 2015 से कहां उपायुक्त कार्यालय, जमशेदपुर, झारखंड क्यों जमशेदपुर प्रखंड के उत्तरी पूर्वी बागबेड़ा पंचायत क्षेत्र में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कराया गया था. सूचनाधिकार कार्यकर्ता सुभाष कुमार मित्तल ने सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में संबंधित  

हाथ में कलम, सिर पर कफन

राज्य के पत्रकार नक्सल प्रभावित इलाकों से न सिर्फ समाचार भेजता है बल्कि कई बार तो उन्हें जवानों के क्षत-विक्षत शवों को भी गंतव्य तक पहुंचाना पड़ता है. 17 अप्रैल 2015 की एक घटना है. दक्षिण बस्तर के पामेड़ पुलिस थाने के तहत आने वाले नक्सल क्षेत्र कंवरगट्टा में पुलिस