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अखंड भारत के लिए आवश्यक है अखंड उदारता

अच्छे सपने देखना अच्छी बात है. मानव समाज सपनों से खाली नहीं हो सकता. सपने हमें जीने का हौसला देते हैं. लेकिन रात और दिन में देखे गए सपनों में बड़ा अंतर होता है. रात के सपने सिर्फ कल्पनालोक को आलोकित करते रहते हैं जबकि दिन में देखे गए सपने  

जनसंघ के प्रति मुस्लिम इसलिए पूर्वाग्रहग्रस्त हैं क्योंकि वह अखंड भारत की बात करता है

रविवार 23 मार्च, 2014 को मैं संसद के सेंट्रल हॉल में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के प्रमुख सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया को पुष्पांजलि अर्पित करने गया था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे कम से कम 25 बार जेल गए थे. 1970 में राज्यसभा सदस्य के रूप में  

भाषा और संस्कृति के जरिए दक्षिणी उपमहाद्वीप के इन तीन देशों को जोड़ा जा सकता है : तस्लीमा नसरीन

क्या आपको लगता है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश का मिलकर एक देश बन जाना संभव है? बहुत समय पहले जब यूरोप में सभ्यता तक नहीं पहुंची थी, वे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ा करते थे पर आज वो एक हैं और बहुत अच्छे हाल में हैं. भारत, पाकिस्तान  

अखंड भारत की बात संघ की मूर्खता का प्रमाण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की तो चर्चा ही नहीं की जानी चाहिए. मेरे ख्याल से ऐसा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह ही नहीं खोलना चाहिए. इन देशों का अब तक दो मर्तबा विभाजन हो चुका है. एक 1947 में जब पाकिस्तान बना और एक बार 1971 में  

समान नागरिक संहिता : एक देश एक कानून

हाल ही में केंद्र सरकार ने विधि आयोग को पत्र लिखकर समान नागरिक संहिता (यूनीफाॅर्म/कॉमन सिविल कोड) यानी सभी के लिए एक जैसे कानून पर सुझाव मांगा है. अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा था. इसके  

कैराना के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है : हुकुम सिंह

आपने अपने क्षेत्र कैराना के बारे में यह मसला उठाया था कि वहां से पलायन हो रहा है. असलियत क्या है? आपको मौका लगे तो कैराना विजिट कर लीजिए. कैराना अब किसी भले आदमी के रहने लायक रहा नहीं. परिस्थिति जैसी उभर कर आ रही है, मौके पर उससे ज्यादा  

मोदी, भाजपा या राजनीति तो महज हथियार हैं, राष्ट्रवाद का उन्माद तो पूंजीवादियों को चाहिए : सच्चिदानंद सिन्हा

देश में इन दिनों राष्ट्रवाद का हो-हल्ला कुछ ज्यादा ही मचा हुआ है. आपने इस बारे में सुना और पढ़ा ही होगा लेकिन इस विषय पर कुछ कहा नहीं. क्या सोचते हैं आप? इस विषय को अगर प्रचलित तौर-तरीकों से समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि यह शब्द  

‘गुजराती समाज के सांप्रदायिकीकरण  की लंबी प्रक्रिया चलाई गई थी’

अपनी किताब  ‘गुजरात बिहाइंड द कर्टेन’  के बारे में बताइए? यह किताब 2015 में प्रकाशित हुई थी, लेकिन इसका लोकार्पण नहीं हो सका था. इसके लिए न तो प्रकाशक और न ही किसी और ने हिम्मत दिखाई क्योंकि लोगों को एक तरह का डर है. इस किताब में मूल रूप  

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है. एक पूरब मुंह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर. एक सिर पर कुछ बाल बढ़ाना चाहता है, तो दूसरा दाढ़ी. एक मूंछ कतरने के लिए कहता है, तो दूसरा मूंछ रखने के लिए. एक जानवर का  

हम नास्तिक क्यों हैं…

‘देखिए भैया, हम बहुत मेहनत करके शाम की रोटी का जुगाड़ करते हैं. हमें ये पता है कि हम मेहनत नहीं करेंगे तो बच्चों के साथ भूखा ही सोना पड़ेगा. ऐसे में हम अपनी मेहनत का श्रेय भगवान को नहीं दे सकते. या कहिए कि हम भगवान को नहीं मानते