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प्रकाशन की मंडी में जिसके पास कलम है, लेकिन पैसा नहीं, वह नहीं छपेगा : नीलोत्पल मृणाल

डार्क हॉर्स आपकी पहली किताब है. पुरस्कार की दौड़ में तमाम किताबें रही होंगी, लेकिन साहित्य अकादेमी पुरस्कार आपको मिला. इस बारे में क्या कहेंगे? निश्चित रूप से यह किसी नए लेखक के लिए बड़ी उपलब्धि होगी. पहली किताब वाले सवाल पर तो कहूंगा कि किसी भी रचनाकार को उसकी  

मुद्राराक्षस : एक योद्धा लेखक का चले जाना…

प्रख्यात नाटककार, कथाकार, जाने-माने संस्कृतिकर्मी और चिंतक मुद्राराक्षस का बीते 13 जून को लखनऊ में देहावसान आज के इस आक्रांता समय में हिंदी समाज के एक बुलंद प्रतिरोधी स्वर का मौन हो जाना है. दरअसल मुद्राराक्षस मात्र एक लेखक न होकर एक ऐसे सार्वजनिक बुद्धिजीवी थे जो हाशिये के समाज  

सरकार को चाहिए कि आहत भावनाओं का एक आयोग बनाए- नाकोहस यानी नेशनल कमीशन फॉर हर्ट सेंटिमेंट्स! : पुरुषोत्तम अग्रवाल

आपके उपन्यास नाकोहस (नेशनल कमीशन फॉर हर्ट सेंटिमेंट्स) की खूब चर्चा हुई. मौजूदा परिवेश में बात कहते ही आहत होती भावनाओं से व्याप्त डर और अराजक माहौल के चलते उपन्यास शायद ज्यादा प्रासंगिक हो गया है. आपका क्या अनुभव रहा? यह सही है कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के चलते उपन्यास  

‘मित्रो’ को आज अपनी सेक्सुअल डिजायर व्यक्त करने का अधिकार है और इसे उसने अर्जित किया है…

‘मित्रो मरजानी’  के 50 साल पूरे हुए हैं, आज मित्रो को कहां पाती हैं? अब मित्रो सिर्फ एक किताब नहीं रही, समय के साथ-साथ वह एक व्यक्तित्व में बदल गई है. वह अब एक संयुक्त परिवार की स्त्री नहीं है जो हर बात में पीछे रखी जाती है. उसे अपनी  

‘नॉस्टेल्जिया और स्मृति में फर्क है’

हाल ही में कथाकार अखिलेश का नया उपन्यास निर्वासन आया है और काफी चर्चित हो रहा है. उपन्यास को राजकमल कृति सम्मान भी मिला है. इस उपन्यास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अखिलेश से लखनऊ में हुई बातचीत.