साहित्य अकादमी पुरस्कार Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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‘पुरस्कार लौटाकर खामोशी तोड़ने की कोशिश’

कुछ लोग पुरस्कार लौटाने में राजनीति देख रहे हैं, लेकिन वैसा बिल्कुल नहीं है. पुरस्कार लौटाना राजनीति करने का मसला नहीं है, बल्कि यह उस खामोशी को तोड़ने का एक प्रयास था जो लगातार लेखकों पर हो रहे हमले के बावजूद पसरी हुई थी. अपने विचार व्यक्त करने के लिए  

अकादमी पुरस्कार को जो लोग सरकारी मानते हैं, उन्होंने इसे लिया ही क्यों था?

लेखकों के साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने और अकादमी पर चुप रहने का आरोप लगाना गलत है. अकादमी ने जिन लेखकों को पुरस्कृत किया है, वह उनके साथ नहीं है, वह लेखकों पर हो रहे हमलों पर खामोश है, यह एक झूठ है. तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि  

‘आदिवासी समाज से कोई आगे आएगा तो हिंदी लेखकों की चिंता बढ़ जाएगी’

आपने गांव के स्कूल में पढ़ाई पूरी की. आप कॉलेज नहीं गए. क्या कविता लेखन में रुचि स्कूली जीवन से ही थी? नहीं, स्कूली जीवन में क्या लिखने की रुचि रही होगी. बस किसी तरह पढ़ाई कर लिया करते थे. छठी क्लास में पहुंचने के बाद लगा कि कोई कक्षा  

‘मेरी अच्छी किताब को साहित्य अकादमी मिला ही नहीं’

मुनव्वर राना को हाल ही में उनके कविता संग्रह ‘शहदाबा’ के लिए उर्दू के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. वाली ‘आसी’ के शागिर्द मुनव्वर राना निम्न एवं मध्यम वर्ग के जनजीवन को शेरगोई का मौज़ू बनाने के लिए, ख़ासकर मां पर शेर कहने के लिए जाने जाते  

‘साहित्य को विमर्शों में घटाकर नहीं देखा जा सकता’

हिंदी कविता की जमीन को अपने सृजन से बेहद उर्वर बनाने वाले वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह तीसरा सप्तक के सहयोगी कवि रहे हैं. साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सिंह की कविताएं अनेक देसी और विदेशी भाषाओं में अनुदित हो चुकी हैं.