शालिनी माथुर Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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कुछ समाज ने मारा, बाकी संरक्षण ने

देश के नारी निकेतनों में रखी गईं निरपराध किशोरियों के यहां आने की कहानी जितनी त्रासद है उतनी ही यहां रहने की भी  

‘यह सामाजिक सरोकार एक साहित्यिक व्यभिचार है’

तहलका के संस्कृति विशेषांक में प्रकाशित शालिनी माथुर के स्त्री लेखन संबंधी आलोचनात्मक लेख ‘मर्दों के खेला में औरत का नाच’ पर कथाकार जयश्री रॉय की टिप्पणी.  

मर्दों के खेला में औरत का नाच

सितंबर, 2008 में अपने एक लेख ‘नवरीतिकालीन संपादक और उनके चीयर लीडर्स’ में मैंने हंस संप्रदाय के तत्वावधान में पोर्नोग्राफी को साहित्य बताने तथा हर स्त्री को सेक्स वर्कर साबित करने के प्रयासों की कड़ी भर्त्सना की थी. उसी समय मैंने यह लेख भी लिखना शुरू किया था. लेकिन रचनाओं में से अंश उद्धृत करते समय लगा कि इन पर टिप्पणी करना बस अड्डों पर बिकने वाली पीले पन्नों वाली किताबों में छपी अपराधों की अमानवीय घटनाओं पर टिप्पणी...