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आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया- पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर कांच के केस में सुंदर माॅडल खड़ी थी. एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा. कांच टूट गया. आसपास के लोगों ने पूछा  

व्यंग्य-सी नुकीली कविताएं

सम-सामयिक और किसी कालखंड के लिए सबसे प्रासंगिक मुद्दों पर प्रभावपूर्ण टिप्पणी के लिए व्यंग्य सर्वाधिक उपयुक्त विधा है. व्यंग्य गद्य रूप में अधिक लिखा-पढ़ा जाने लगा है किंतु कविता की संप्रेषणीयता को यदि व्यंग्य की धार मिल जाती है तो उसका पाठक पर गहरा प्रभाव होता है. पंकज प्रसून  

चिंतन के सिर पर ठीकरा

कल तक सत्तारूढ़ होकर जिनका दिल बाग बाग था, आज उनके हाथों से सत्ता की बागडोर पूरी तरह से छूट चुकी थी. ऐसा क्यों हुआ इसकी वजह को इस चिंतन शिविर में खोजा जाना था. सब महारथी आ चुके थे सिवा आलाकमान के. आलाकमान के सबसे विश्वासपात्र जिन्हें आदरपूर्वक सब  

भूख का सिस्टम

‘भूख खत्म करने वाली इतनी बीमारियां हैं कि कोई सहृदय, सक्षम और चुस्त डॉक्टर ही उसकी जड़ तक पहुंच सकता है’  

‘चक्कर का चक्कर’

‘चक्कर’ आना एक बेहद आम-सी तकलीफ है. यह कहने के बाद मैं इसमें यह बात जोड़ना चाहूंगा कि ‘चक्कर आने’ वाले मरीज को ‘चक्कर’ होता ही नहीं फिर भी वह न केवल यही कहता फिरता है कि मुझे चक्कर आ रहे हैं बल्कि डॉक्टर भी चक्कर की दवाएं देते रहते  

‘ले आएंगे बाजार से जाकर दिलो जां और’

आदमी का पैदाइशी सपना है कि वह अमर हो जाए. इधर चिकित्सा विज्ञान का भी सदियों से यही स्वप्न है कि वह जीवन और मृत्यु के रहस्य को समझ ले. आयुर्वेद, यूनानी से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक यह कोशिश जारी है. पुरातन तथा पौराणिक कथाओं में इस तरह की कई  

हड्डियां कमजोर क्यों हो जाती हैं ?

जन्म से लेकर किशोरावस्था तक हमारी हड्डियां बनती, बढ़ती और विकसित होती हैं. विभिन्न गतिविधियों से हड्डियों की मजबूती भी तय होती है.