लेखक Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

Post Tagged with: "लेखक"

‘मित्रो’ को आज अपनी सेक्सुअल डिजायर व्यक्त करने का अधिकार है और इसे उसने अर्जित किया है…

‘मित्रो मरजानी’  के 50 साल पूरे हुए हैं, आज मित्रो को कहां पाती हैं? अब मित्रो सिर्फ एक किताब नहीं रही, समय के साथ-साथ वह एक व्यक्तित्व में बदल गई है. वह अब एक संयुक्त परिवार की स्त्री नहीं है जो हर बात में पीछे रखी जाती है. उसे अपनी  

‘आपको लगता है कि हर वो आदमी दुश्मन है जो भारत माता की जय नहीं कहता, ऐसे तो ये देश पाकिस्तान बन जाएगा’

देश में आजकल एक खास किस्म का सिलसिला चल रहा है. मैं उसका शिकार बना. वो पहले से जाल बिछाए बैठे थे, मैं फंस गया. सबसे परेशान करने वाली बात कि पाकिस्तान हो या बांग्लादेश, वहां पर बहुत दमन रहा है. हमारे यहां आपातकाल को छोड़ दें तो शायरों या  

आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया- पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर कांच के केस में सुंदर माॅडल खड़ी थी. एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा. कांच टूट गया. आसपास के लोगों ने पूछा  

‘पुरस्कार लौटाकर खामोशी तोड़ने की कोशिश’

कुछ लोग पुरस्कार लौटाने में राजनीति देख रहे हैं, लेकिन वैसा बिल्कुल नहीं है. पुरस्कार लौटाना राजनीति करने का मसला नहीं है, बल्कि यह उस खामोशी को तोड़ने का एक प्रयास था जो लगातार लेखकों पर हो रहे हमले के बावजूद पसरी हुई थी. अपने विचार व्यक्त करने के लिए  

अकादमी पुरस्कार को जो लोग सरकारी मानते हैं, उन्होंने इसे लिया ही क्यों था?

लेखकों के साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने और अकादमी पर चुप रहने का आरोप लगाना गलत है. अकादमी ने जिन लेखकों को पुरस्कृत किया है, वह उनके साथ नहीं है, वह लेखकों पर हो रहे हमलों पर खामोश है, यह एक झूठ है. तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जबकि  

‘मैं चिकित्सा की प्रयोगशाला का शिकार हुआ’

मुकेश रावत लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं  

‘लोग जाति और संप्रदाय की राजनीति से तंग आ चुके हैं’

अमेरिका में एक शानदार नौकरी छोड़कर रवि कृष्णा रेड्डी भारत लौटे. उनका सपना था कि अपने समाज में वे कोई बदलाव लाएं. लेखक और बुद्धिजीवी के रूप में भी जाने वाले रेड्डी अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं.  

‘तसल्ली तब हुई जब शाख़ पे एक फूल आया’

भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च अलंकरण दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित गुलज़ार ऐसे सर्वप्रिय और प्रचलित व्यक्ति हैं, जिनके खाते में ढेरों कला-माध्यमों से होकर गुजरने का सौभाग्य दर्ज है. वे एक मशहूर शायर, अप्रतिम फिल्मकार, संजीदा कहानी लेखक, बेहतरीन गीतकार, मंजे हुए संवाद और पटकथा लेखक रहे हैं. 1934 में दीना (अब पाकिस्तान) में जन्मे गुलज़ार ने विमल राॅय के सहायक निर्देशक के रूप में अपना फिल्मी सफर 1963 में शुरू किया जो लगभग पांच दशक बीत जाने...