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मध्ययुगीनप्रदेश

एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 27 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में छुआछूत को मानते हैं. 53 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश इस श्रेणी में देश में पहले नंबर पर है. हाल ही में हुईं कुछ घटनाएं इस बात की गवाही दे रही हैं  

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अगर आप शरीर दान करने जा रहे हैं तो छुट्टी के दिन मरना मना है…

‘आंखें कचरे में फेंक दीं. इसमें कौन-सी चौंकाने वाली बात है? आप नेत्रदान की बात कर रहे हैं, जीआरएमसी में देहदान की भी कोई कद्र नहीं.’ ऐसा बोलते हुए अनिल शर्मा के चेहरे पर एक दर्दभरी मुस्कान उभर आती है. ग्वालियर के गोविंदपुरी इलाके के निवासी अनिल शर्मा के पिता  

मुझे चार माह का गर्भ था, जब मेरे पति का देहांत हुआ, उनकी आखिरी इच्छा थी नेत्रदान

‘उनकी मौत एक सड़क दुर्घटना में हुई थी. वे हमेशा ही नेत्रदान करने के लिए कहा करते थे. उनका मानना था कि अगर माैत के बाद हम अपनी आंखों से किसी और की दुनिया रोशन कर सकें तो भला इससे अच्छा और क्या होगा? वे मां-बाबूजी का भी नेत्रदान का  

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मैंने मां की आंखें दान की थीं  लेकिन लिस्ट में हमारा नाम नहीं

‘हमारे भांजे को एनीमिया हुआ था. उसे हर हफ्ते-दस दिन में खून की जरूरत पड़ती थी. उस समय ऐसे-ऐसे लोगों ने हमें खून दान में दिया था जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. बस उसी समय माताजी ने मन बना लिया था कि उन्हें भी ऐसा कुछ  

दान की  आंखें  कूड़ेदान में

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दान में मिली आंखों के कूड़ेदान में मिलने से प्रबंधन सवालों के घेरे में है  

कुपोषण : पहले जरा इसे समझिए

कहीं आंगनबाड़ी में अंडे का विरोध मध्य प्रदेश सरकार की पैकेटबंद पोषण आहार कंपनियों के लिए बेहतर, स्थायी और प्रभावी विकल्प खड़ा करने की कोशिश तो नहीं?  

शाकाहारी सरकार, कुपोषित नौनिहाल

यह जानना बेहद दिलचस्प है कि मध्य प्रदेश में अंडे पर नीतिगत निर्णय जैन समाज के किसी कार्यक्रम के मंच पर ही होता है. ऐसे ही एक मंच से 2009-10 में अंडे की खिलाफत की जमीन तैयार की गई थी. इस साल फिर यही हुआ  

साख पर सवाल

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े कई लोगों का मानना है कि नेताओं के चुनावी राजनीति में जाने से आंदोलन की विश्वसनीयता पर प्रभाव पड़ा है  

तालाब से बदला ताना-बाना

मध्यप्रदेश के मालवा में एक बहुत पुरानी कहावत आज भी लोकप्रिय है – ‘पग-पग रोटी, डग-डग नीर.’ लेकिन आज उसी मालवा के ज्यादातर इलाके बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मालवा के एक कस्बे में पानी को माफियाओं से बचाने के लिए चंबल  

रसूखदार दागी

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की परीक्षाओं में हुए व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस जहां राज्य की भाजपा सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, वहीं उसके ही एक पूर्व नेता संजीव सक्सेना पर कदाचार के इतने आरोप लगे हैं कि कांग्रेस अपने ही मुद्दे पर