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मुअनजोदड़ो की जगह अगर मोहेंजो दारो हो गया तो भाई किसके घाव दुख गए : नरेंद्र झा

आप छोटे परदे पर लंबे समय तक काम करने के बाद फिल्मों में आए. दोनों माध्यमों में क्या अंतर पाते हैं? टेलीविजन के लिए काम करते हुए आपको सोचने का मौका नहीं मिलता है. फिल्मों में आपको इसका मौका मिलता है. टेलीविजन का अपना एक गणित होता है जिसके तहत  

ममता कुलकर्णी : कभी दर्शकों को थी, अब पुलिस को है तलाश

इस साल अप्रैल के महीने में ठाणे पुलिस ने सोलापुर में एक फार्मा कंपनी एवॉन लाइफसाइंसेज लिमिटेड की एक इकाई से तकरीबन 20 टन ‘एफिड्रिन’ बरामद की थी जिसकी अनुमानित कीमत 2000 करोड़ रुपये बताई गई. एफिड्रिन एक प्रतिबंधित ड्रग है जिसका इस्तेमाल दमा और खांसी की दवाइयां तैयार करने  

आज के समय में बैंडिट क्वीन बन ही नहीं पाती : गोविंद नामदेव

फिल्म  ‘सोलर एक्लिप्स’  से आपने भी हॉलीवुड की ओर कदम बढ़ा दिया है. इन दिनों हॉलीवुड जाने की होड़ मची हुई है. एक भारतीय कलाकार के लिए हॉलीवुड की फिल्म करना बड़ी बात क्यों है? ये बिल्कुल वैसे है जैसे कोई छोटे शहर से बड़े शहर जाना चाहता है. हॉलीवुड  

ये देखकर दुख होता है कि अभिनेत्रियों का इस्तेमाल डिजाइनर कपड़े बेचने के लिए किया जा रहा है : श्रेया नारायण

एक राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद अभिनय का ख्याल कब आया? मैं बिहार के मुजफ्फरपुर शहर से हूं. मैं ऐसे परिवार से हूं जिसने एक ही काम सीखा है और वो है पढ़ाई-लिखाई. मैंने दिल्ली में रहकर पढ़ाई की है. मैं एक अच्छी स्टूडेंट रही हूं और एमबीए किया  

‘मैं वो नहीं जो दिखता हूं, मैं वो हूं जो लिखता हूं’

कश्मीर के बारामुला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे मानव कौल का बचपन मध्य प्रदेश के होशंगाबाद शहर में बीता. 90 के दशक में घाटी में तेजी से पांव पसारते आतंकवाद की वजह से उनके परिवार को पलायन करके होशंगाबाद आना पड़ा. उनके पिता कश्मीर में इंजीनियर थे, जिन्हें समय  

‘किसी महिला के लिए अपने मन की बात रखना आसान नहीं होता’

महिला हों या पुरुष, आपके बारे में सब यह बात जरूर मानते हैं कि आप बेहद खूबसूरत हैं. क्या आपको लगता है कि खूबसूरती ही आपकी सबसे बड़ी खूबी है? खूबसूरती आपके आत्मविश्वास में होती है या कह सकते हैं आप जैसे बात करते हैं, उठते बैठते हैं, वह खूबसूरती  

‘मल्टीप्लेक्स पॉपकॉर्न बेचने के लिए खोले गए हैं, उनके लिए बाजीराव मस्तानी या चौरंगा कोई मतलब नहीं रखता’

फिल्म को  ‘चौरंगा’  नाम क्यों दिया? इसका अर्थ क्या है? इसकी दो वजहें हैं. एक तो चौरंगा का मतलब ही होता है चार रंग. दूसरा फिल्म एक तरह से हमारी वर्ण व्यवस्था से जुड़ी हुई है. हिंदू वर्ण व्यवस्था के अनुसार समाज को चार जातियों में बांटा गया है- ब्राह्मण,  

‘अगर आप वोट करने की उम्र से ऊपर हैं और राजनीति को संदेह से देखते हैं तो आपको बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहिए’

‘अवॉर्ड वापसी’  के चलते आप चर्चा में हैं. लोगों का कहना है कि ऐसा तो हमेशा से होता आया है तो फिर अब ऐसी कौन सी बात हुई है जो एक फिल्मकार इस पर बात कर रहा है. आप इस पर क्या कहेंगे? जब सिख विरोधी दंगे हुए तो उस  

जनता टॉकीज

मनोरंजन हर तबके के लोगों के जीवन का एक खास हिस्सा होता है और हिंदुस्तान में फिल्में मनोरंजन का पसंदीदा साधन हैं. सिनेमा का हिंदुस्तान में वही महत्व है जो यूरोपीय देशों में किताबों का, हर वर्ग का व्यक्ति कमोबेश फिल्मों का शौकीन है. फिल्में आम आदमी की जिंदगी का  

सेंसर बोर्ड का कॉन्सेप्ट ही गलत

  आपकी फिल्म किस बारे में है?  फिल्म में दो अलग-अलग कहानियां हैं. दो अलग-अलग मुद्दे हैं. ये दोनों कहानियां कैसे एक-दूसरे से जुड़ती है ये दर्शक देखेंगे तो समझ जाएंगे. कोई भी फिल्मकार जब कुछ बनाता है तो ऐसे ही नहीं बनाता. जब आप फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि