बिहार चुनाव Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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‘देश के सम्मान के लिए आमिर ऑटोरिक्शा वालों को अच्छा व्यवहार करने की सीख देते हैं, उन्हें वैसी ही सीख पत्नी को भी देनी चाहिए’

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर बिहार चुनाव नतीजों का क्या असर पड़ा? क्या किसी बदलाव के बारे में सोचा जा रहा है? बिहार चुनाव विधानसभा का चुनाव था. भाजपा में एक पूरी प्रक्रिया है जिसके तहत राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हम चुनाव कार्य संपन्न कराते हैं. वह प्रक्रिया  

लाल पानी पर लगाम

करीब दो साल पहले की बात है. लालू प्रसाद यादव ‘तहलका’ से बातचीत कर रहे थे. इस दौरान शराब पर बात होने लगती है. लालू कहते हैं, ‘देखिए नीतीश को, उसका लोग शराबबंदी की बात को हवा में उड़ाता है. गरीबों का ‘लाल पानी’ बंद करवा देगा. बताइए गरीबों का  

बिहार में दलित राजनीति को नेतृत्व की दरकार

रमाशंकर आर्य पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. वे दलित मसलों के जानकार हैं. बिहार के चुनाव परिणाम से खुश दिखते हैं. उनकी खुशी का राज भाजपा की हार में छिपा है. कहते हैं, ‘चलिए यह अच्छा हुआ कि रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी की हार हुई. यह उनके लिए  

‘सुषमा स्वराज कहीं बेहतर कर सकती थीं, लेकिन उनके पूरे काम पर प्रधानमंत्री कार्यालय का ग्रहण लगा हुआ है’

मोदी की विदेश नीति के बारे में आप क्या सोचते हैं? यह काफी निराशाजनक है! उन्हें विदेश नीति की समझ नहीं है. भारत दुनिया का कोई पुलिसमैन नहीं है और उसे वैसा होने की इच्छा भी नहीं रखनी चाहिए. आपको अच्छा संवाद आना चाहिए. आप एकतरफा बात नहीं कर सकते.  

‘हमारा दृढ़ विश्वास मंगलराज में है, हमने अपने 15 वर्ष के शासन के दौरान बेजुबान लोगों को जुबान दिया’

क्या विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की इतनी बड़ी जीत की उम्मीद आपको थी? पूरा दो सौ प्रतिशत. जदयू और कांग्रेस के संग महागठबंधन बनने के दिन से ही उम्मीद थी. बिहार में राजग के किसी भी नेता में मुझे हरा देने का दम नहीं है. प्रचार के दौरान ही हमने  

इम्तिहां और भी हैं…

कांग्रेसियों के बारे में कहा जाता है कि जब वे सत्ता में होते हैं, तभी नियंत्रित रहते हैं, एकजुट रहते हैं. सत्ता से हटते ही अनुशासन का आवरण उनसे हटने लगता है आैैर बिखराव शुरू हो जाता है. इसके उलट समाजवादियों के बारे में कहा जाता है कि वे संकट  

तुरुप का इक्का

67 साल की उम्र. 11 सालों तक खुद चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति. पिछले लोकसभा चुनाव में पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती, दोनों की बुरी हार. लोकसभा चुनाव के पहले ही दिल का ऑपरेशन और डॉक्टरों की सख्त हिदायत कि न ज्यादा भागदौड़ करनी है, न ही तनाव  

‘लालू सत्ता में वापस आते हैं तो यादव फिर शक्तिशाली हो जाएंगे’

पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार राजग के सहयोगी के बतौर उतरे थे, जबकि इस बार वे लालू प्रसाद के साथ मिलकर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के सामने उतर रहे हैं. आपका इस बार के विधानसभा चुनावों के बारे में क्या कहना है? इस बार का चुनाव कुछ हद  

किस हाल में ‘माई’ के लाल

30 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली का आयोजन था. नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के मेल-मिलाप और सीटों को लेकर आपसी तालमेल के बाद पहला बड़ा साझा राजनीतिक आयोजन. नीतीश को एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए  

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इसका जवाब बहुत साफ है. उस जवाब की बहुत हद तक झलकियां चायवाली उस चौपाल में उस बुजुर्गवार नेता ने दे दी थीं, लेकिन मामला सिर्फ उतना भर ही नहीं है. लालू प्रसाद यादव जानते हैं कि वे खुद राजनीतिक जीवन में मुश्किलों और चुनौतियों से तो घिरे हुए ही