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भंवर में भाजपा

बात पिछले महीने की है. पटना के गांधी मैदान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में विराट कार्यकर्ता सम्मेलन होने के अगले दिन की. पटना के भाजपा कार्यालय में हर दिन की तरह जमावड़ा लगा था. उस रोज के  

भंवर में भाजपा

बिहार विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल करने को बेताब भाजपा की राह में मुश्किलें हजार हैं. राज्य में नेतृत्व के सवाल से लेकर सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने में पार्टी के पसीने छूट रहे हैं  

सांप्रदायिकता के विरोध और धर्मनिरपेक्षता की मजबूती का छद्मराग

राजद-जदयू को छोड़ दें तो विलय में शामिल दूसरे चार दलों का बिहार चुनाव में कोई असर नहीं होनेवाला  

उत्तर के पैंतरे में दक्षिण का टोका

जनता परिवार में शामिल होने वाले छह दलों में कर्नाटक की जद (एस) दक्षिण भारत से अकेली पार्टी है और फिलहाल कर्नाटक में बहुत मतबूत स्थिति में नहीं है. कांग्रेस शासित कर्नाटक में भाजपा विपक्ष है और जद (एस) तीसरे स्थान पर, इसलिए अपनी मौजूदा राजनीतिक हैसियत के साथ जद  

महाविलय में छुपे हैं महाबिखराव के सूत्र

अतिपिछड़ों-महादलितों के लिए सांप्रदायिकता बड़ा मसला नहीं है, उन्हें हिस्सेदारी चाहिए. सामाजिक न्याय की लड़ाई से उन्हें जोड़ने के लिए नया नारा चाहिए जो महाविलय के इस प्रस्ताव में नहीं दिख रहा  

स्वार्थ का संगम!

जब तक यह रिपोर्ट प्रकाशित होगी और आप इससे गुजर रहे होंगे, पूरी संभावना है तब तक दिल्ली में मुलायम सिंह के आवास से जनता परिवार के विलय की घोषणा हो चुकी होगी या उसकी आखिरी प्रक्रिया चल रही होगी. मुलायम सिंह यानी नेताजी के नेतृत्व में लालू प्रसाद यादव,  

कला की दुनिया में कलाबाजी

सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक समृद्धि का गौरवमयी इतिहास अपने में समेटे हुए बिहार क्या वर्तमान में साहित्य-संस्कृति के मामले में जड़वत और दिवालिया हो चुका है? पिछले कुछ सालों का रवैया और हाल ही में राजभाषा सम्मान से उठा विवाद कुछ-कुछ इसी ओर इशारा करते हैं  

सवर्ण राजनेता: सप्तमो अध्याय समाप्ते !

बिहार में सवर्णों को अपने पाले में करने के लिए सवर्ण आयोग बनाने से लेकर सवर्णों तक को आरक्षण देने की राजनीति रोज हो रही है लेकिन शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि वर्तमान सरकार के मंत्रिमंडल के जरिये सत्ता की सियासत से ब्राह्मणों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है. तो क्या चाणक्य की कर्मभूमि में ब्राह्मणों की राजनीति का यह 'इतिश्री रेवाखंडे, सप्तमो अध्याय समाप्ते' वाला दौर है  

बिहार: छह महीने छप्पन मुसीबतें

जीतन राम मांझी को लेकर बिहार की राजनीति में पैदा हुए भूचाल का दौर थम चुका है. नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो चुके हैं, लेकिन प्रबल संभावना है कि आनेवाले दिनों में उठापटक के कई नए दौर शुरू होंगे  

बिहार: ओटन लगे कपास

छह फरवरी को बिहार में मौसम का मिजाज दो स्तरों पर गड़बड़ाया है- एक प्राकृतिक तापमान और दूसरा राजनीतिक तापमान. वायुमंडल के तापमान में तेजी से गिरावट आयी है और जाते-जाते  ठंड ने ठिठुरन पैदा कर दी है. दूसरी तरफ राजनीतिक तापमान, जो लगभग ठंड हो चुका था, वह अचाक