इंदिरा गांधी Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi

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अखंड भारत की बात संघ की मूर्खता का प्रमाण

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एकीकरण की तो चर्चा ही नहीं की जानी चाहिए. मेरे ख्याल से ऐसा कुछ बोलने के लिए अपना मुंह ही नहीं खोलना चाहिए. इन देशों का अब तक दो मर्तबा विभाजन हो चुका है. एक 1947 में जब पाकिस्तान बना और एक बार 1971 में  

‘लग रहा था कि विदेश नीति में कुछ चमत्कार-सा होने जा रहा है लेकिन सब कुछ मोर का नाच साबित हुआ’

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ​ही अद्भुत कार्य किया था. सारे पड़ोसी देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को निमंत्रण दिया था कि उनके शपथ ​लेने के समय भारत आएं. ऐसा संकेत उनके पहले भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने ​नहीं दिया था. उस अवसर की सबसे बड़ी खूबी यह थी  

सतलुज-यमुना लिंक नहर सींच रही राजनीति की फसल

पंजाब विधानसभा चुनावों में साल भर से भी कम का समय रह गया है. राज्य भर में फैली सत्ता विरोधी लहर और सरकार के प्रति गुस्से के बीच से निकलने के लिए सतलुज-यमुना लिंक कैनाल (मालिकाना हकों का स्थानांतरण) विधेयक, 2016 को पारित करना सरकार के लिए जनता के खोए  

‘राम आडवाणी का जाना लखनऊ देखने के आईने का बिखरना है’

चार साल पहले की बात है. लखनऊ का दिल कहे जाने वाले हजरतगंज में किताबों की एक दुकान पर एक शोधार्थी पहुंचा. उसने चार हजार रुपये से अधिक की किताबें निकालीं पर जब पैसे देने की बारी आई तो उसकी जेब से मुश्किल से दो हजार रुपये ही निकले. उसने  

घबराए वामपंथी चला रहे राजनीतिक मुहिम

भारतीय संस्कृति और दर्शन का एक सूत्र-वाक्य है ‘नेति-नेति’, जिसका अर्थ होता है यह भी नहीं वह भी नहीं. अर्थात भारतीय समाज प्रकृति से प्रयोगधर्मी और विमर्शात्मक है. संक्षेप में शास्त्रार्थ हमारी सभ्यताई परंपरा है, इसलिए प्रयोगधर्मिता और विमर्शात्मकता बनी रहनी चाहिए और इस पर चोट करने वाली किसी भी  

आजादी तो मिल गई है पर हमें पता नहीं कि उसका करना क्या है?

लगभग बीस साल पहले की बात है. कलकत्ता के ‘फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की ओर से ‘दो बीघा जमीन’ फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय और हमें यानी उनके साथियों को सम्मान दिया जा रहा था. ये एक साधारण पर रुचिकर समारोह था. बहुत अच्छे भाषण हुए, पर श्रोता बड़ी उत्सुकता के  

‘मोदी के नेतृत्व में भाजपा इंदिरा की कांग्रेस जैसी हो जाएगी’

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने छह महीने बीत गए हैं. आप उनके प्रदर्शन को कैसे देखते हैं? जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी ने खुद को सबसे मेहनती प्रधानमंत्री साबित किया है. वह सर्वाधिक सक्रिय भी हैं. उन्होंने ये दो गुण दिखाए हैं. हालांकि उन्हें केंद्र में  

भारतीय खुफिया संस्थाएं

अल्पसंख्यकों का प्रवेश वर्जित है?  

नेहरू, इंदिरा और मोदी

नरेंद्र मोदी, पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद अकेले ऐसे नेता हैं जिनके नेतृत्व की वजह से उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है.  

प्रहसन एक पूर्व प्रधानमंत्री की मौत का

राजीव गांधी हत्याकांड का मामला 23 साल बाद भी अंतिम न्याय लिखे जाने का इंतजार कर रहा है.