‘महिला आयोग से मदद नहीं, पुलिस उड़ाती है मजाक’ | Tehelka Hindi

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‘महिला आयोग से मदद नहीं, पुलिस उड़ाती है मजाक’

दीपक गोस्वामी 2016-06-15 , Issue 11 Volume 8
फोटो: विजय पांडेय

फोटो: विजय पांडेय

कौन

बलात्कार की शिकार युवतियां

कब

10 मई, 2016 से

कहां

जंतर मंतर, दिल्ली

क्यों

शादी का झांसा देकर बलात्कार करने के मामले में न्याय न मिलने और पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने और दिल्ली महिला आयोग के उदासीन रवैये को लेकर.

अर्चना, यासमीन, साधना और प्रीति कुछ समय पहले तक एक-दूसरे से अनजान थीं. चारों न्याय की आस में लंबे समय से दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के चक्कर काट रही थीं. एक दिन आयोग के दफ्तर में ही उनकी मुलाकात हाे गई, जिसके बाद उन्हें पता चला कि उनके दर्द की दास्तान लगभग समान है. 

इन युवतियों का दावा है कि इन सभी के मामलों में पुलिस ने जांच के नाम पर लीपापोती करके आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी. खुद पुलिस आरोपियों के साथ समझौता करने का दबाव उन पर बना रही है. डीसीडब्ल्यू में भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. बस तारीख पर तारीख मिलती जा रही थीं. इसके बाद चारों ने फैसला किया कि वे आगे की लड़ाई साथ मिलकर लड़ेंगी. साधना बताती हैं, ‘डीसीडब्ल्यू में सुनवाई न होते देख हमने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) का रुख किया. वहां मेरी मुलाकात पहले ही दिन आयोग की सदस्य सुषमा साहू से हुई. लेकिन यहां से भी कोई मदद नहीं मिली.’

दिल्ली पुलिस कमिश्नर, सीबीआई से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री और देश के मुख्य न्यायाधीश तक को पत्र लिखने के बावजूद मदद नहीं मिली ताे इन युवतियों ने मई की चिलचिलाती गर्मी में दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी. पांचवें दिन साधना की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसके बाद ये भूख हड़ताल छोड़कर अनिश्तिकालीन धरने पर बैठ गईं. उनकी मांग है कि उनके गुनहगारों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए और जो जांच अधिकारी आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें नौकरी से हटाया जाए. अगर उन्हें न्याय नहीं दिया जाता तो इच्छामृत्यु प्रदान की जाए. इस संबंध में वे  प्रधानमंत्री को भी पत्र लिख चुकी हैं.

इनमें से एक कानपुर की यासमीन दिल्ली में नौकरी करती थीं. उनके अनुसार, दिल्ली में उनकी मुलाकात नितिन से हुई. एक दिन नितिन ने उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर शारीरिक संबंध बना लिए और उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर ब्लैकमेल करने लगा. उन्होंने पुलिस से शिकायत की धमकी दी तो उसने शादी की इच्छा जताई. यासमीन के अनुसार, दो साल तक वह उन्हें शादी का झांसा देकर  संबंध बनाता रहा और फिर शादी से मुकर गया. तब यासमीन ने उसके खिलाफ केस दर्ज करा दिया.

वहीं झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली अर्चना का परिचय दिल्ली के वरुण से 2013 में एक सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए हुआ. महीने भर बाद ही वरुण ने अर्चना से शादी करने की बात कही. अर्चना तब कर्नाटक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थीं. कुछ ही महीने बाद उनकी नौकरी दिल्ली में लग गई. उनके मुताबिक, यहां शादी का झांसा देकर वरुण ने उनके साथ संबंध बनाए. इस बीच उसने अर्चना के माता-पिता से भी मुलाकात की. पर अर्चना को अपने परिवार से कभी नहीं मिलाया. पिछले साल नवंबर में उन्हें पता चला कि वरुण पहले ही शादीशुदा है. अर्चना बताती हैं, ‘वरुण ने अप्रैल 2015 में किसी और से शादी कर ली थी और यहां मुझे भी शादी का भरोसा देकर संबंध बनाता रहा. इसके बाद मैंने उसके खिलाफ केस दर्ज करा दिया.’

इनके इतर साधना का रिश्ता सेना में लेफ्टिनेंट शिवमंगल से 2012 में तय हुआ. आगरा निवासी साधना तब नोएडा में नौकरी कर रही थीं. साधना के अनुसार, एक बार छुट्टियां बिताने शिवमंगल दिल्ली आया और साथ रुकने की जिद की. इसके बाद संबंध बनाने पर जोर दिया. शादी से पहले इससे इनकार करने पर उसने उनकी मांग में सिंदूर भर दिया और संबंध बनाए. इसके दो साल बाद शिवमंगल और उसके परिवारवालों ने दहेज के लालच में साधना से रिश्ता तोड़कर कहीं और जोड़ लिया.

‘पुलिसवाले हमसे अछूत सा व्यवहार करते हैं. मजाक बनाते हैं हमारा. धरने के दौरान एसीपी साहब ने हमें मिलने बुलाया, पांडव नगर एसएचओ भी वहां मौजूद थे. वहां हमसे जिस अभद्रता से बात की गई उसे बता नहीं सकती. अब किससे करें शिकायत इसकी?’

चौथी अनशनकारी पुणे की 21 वर्षीय प्रीति हैं जो नौकरी की तलाश में मुंबई गई थीं. यहां एक सहकर्मी के जरिए उनकी मुलाकात आईआईएम अहमदाबाद के 40 वर्षीय प्रोफेसर रजनीश से हुई. प्रीति के मुताबिक, कुछ दिनों के बाद रजनीश ने उनसे शादी करने की बात कही. प्रीति ने मना कर दिया. लेकिन बाद में वे मान गईं. इस बीच उसी सहकर्मी ने प्रीति को एजाज नामक व्यक्ति से भी मिलाया. प्रीति को शादी के लिए मनाने में उसका भी योगदान रहा. कुछ दिनों बाद प्रीति दिल्ली आ गईं. तब रजनीश अक्सर दिल्ली आकर उनके फ्लैट पर रुकता था. उनके बीच संबंध भी बने. प्रीति के अनुसार, ऐसा करीब दो साल तक चला, फिर पता चला कि रजनीश शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं. तब प्रीति को छह माह का गर्भ था. इसके बाद रजनीश ने प्रीति से संपर्क तोड़ लिया. यह बात प्रीति ने एजाज को बताई तो वह मुंबई से गुड़गांव आया और जादू-टोना करके सब ठीक करने का आश्वासन दिया. प्रीति के मुताबिक, इस दौरान एजाज ने उन्हें ‘मांत्रिक जल’ पिलाया था जिसे पीते ही वह बेसुध हो गईं और एजाज ने उनके साथ बलात्कार किया.

इन चार युवतियों में से तीन मामले पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर थाने के हैं. इन तीनों मामलों से संबंधित युवतियों का आरोप है कि उनका मेडिकल टेस्ट तक नहीं कराया गया. साधना के मुताबिक, उनकी एफआईआर 7 अक्टूबर, 2015 को दर्ज की गई थी, पर अब तक पुलिस ने इसे सेना से जुड़ा मामला बताते हुए शिवमंगल पर कोई कार्रवाई नहीं की है. साधना का दावा है कि आरोपी ने जांच अधिकारी को घूस खिलाई है, जिसके उनके पास प्रमाण भी हैं. तीनों ही मामलों में एक समानता यह भी है कि जांच अधिकारी पर एफआईआर और चार्जशीट में तथ्यों को छिपाने का आरोप है. अर्चना बताती हैं, ‘मेरे एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी वरुण को गिरफ्तार नहीं किया गया. काफी मशक्कत के बाद मैं उसे गिरफ्तार करा सकी. फोन रिकॉर्डिंग्स, फोटो, टेक्स्ट मैसेज मामले में ठोस सबूत हो सकते थे, पर उन्हें चार्जशीट में शामिल ही नहीं किया गया. जो गवाह हो सकते थे, उन्हें नहीं बनाया. चार्जशीट  देखी तो पता चला मेरे बयान बदले हुए थे. चार्जशीट में आरोपी की शादी की बात तक नहीं दर्शाई गई. इस सबका फायदा उठाकर वरुण जमानत पर रिहा हो गया. जांच अधिकारी ने मुझ पर पैसे लेकर समझौता करने का दबाव बनाया.’

यासमीन कहती हैं, ‘मुझे कानून की ज्यादा जानकारी नहीं थी. दो दिन चक्कर कटाने के बाद मेरी तीन पेज की एफआईआर को बड़ा बताकर आधे पेज में कर दिया गया. कानूनी भाषा का हवाला देकर मुझसे लिखवा दिया गया कि मैं लिव-इन रिलेशनशिप में थी. मेरी मां को अकेले में ले जाकर केस वापस लेने का दबाव बनाया और बदनामी का डर दिखाकर उनसे भी यह लिखवा लिया. इसकी शिकायत मैंने डीसीडब्ल्यू में भी की. चार्जशीट में फोन रिकॉर्डिंग्स और फोटो का कहीं जिक्र नहीं किया, पूछने पर कहा कि 376 में इनकी कोई जरूरत नहीं, धारा ही काफी है. नशे की दवाई वाली बात घुमा दी गई. मुझ पर जानलेवा हमला भी हुआ. मैंने केस दर्ज करवाया पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.’

साधना का भी आरोप है कि उनकी एफआईआर के साथ ऐसा ही खिलवाड़ किया गया था. वहीं प्रीति के मामले में आरोपी रजनीश को पुलिस ने गिरफ्तार तो कर लिया था पर खुद को नपुंसक साबित करके वह जेल से बाहर आ चुका है. वे बताती हैं, ‘मेरी शिकायत बाराखंबा रोड थाने में 29 दिसंबर, 2015 को दर्ज हुई थी. लेकिन उसके बाद से ही आरोपी से समझौता करने का दबाव जांच अधिकारी बनाने लगीं. मैंने दिल्ली के मुख्यमंत्री के जनता दरबार में न्याय की गुहार लगाई तब आरोपी को गिरफ्तार किया गया.’ प्रीति ने 3 मार्च को बच्चे को जन्म दिया. 5 मार्च को अदालत में प्रीति की गैरमौजूदगी में आरोपी जेल से रिहा हो गया. 

‘बिकॉज आई एेेम अ गर्ल, हू केयर्स?’ नाम का कैंपेन चलाने वाले नवनीत शास्त्री इन युवतियों की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं. वे बताते हैं, ‘हमारे यहां रेप को ही कैटेगराइज्ड कर दिया जाता है. जोर-जबरदस्ती करके बनाए गए शारीरिक संबंध को ही रेप समझा जाता है. जबकि कानून कहता है कि शादी का झूठा वादा करके बनाए गए संबंध भी रेप की श्रेणी में आते हैं. इन मामलों में एफआईआर दर्ज कराना ही चुनौती होता है, दर्ज हो भी जाए तो पुलिस आरोपी पक्ष के साथ सांठ-गांठ करके उसे बचाने में जुट जाती है. चारों के मामलों में यही हुआ. जांच अधिकारियों की आरोपियों से मिलीभगत के चलते आज इन मामलों के आरोपी जमानत लेकर सलाखों के बाहर घूम रहे हैं. वहीं डीसीडब्ल्यू बस हाथी का दांत साबित हुआ.’

यासमीन कहती हैं, ‘पुलिस ने हमें न्याय दिलाने क़ा कम आरोपियों को बचाने का ज्यादा प्रयास किया. आरोपी की ओर से मुझे लगातार धमकियां मिलती रहीं. पुलिस, महिला आयोग किसी ने न सुनी. अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से मिलने महीनों चक्कर काटते रहे. वह हमारे सामने से गुजर जातीं पर हमें उनसे मिलने नहीं दिया जाता.’

दिल्ली महिला आयोग सवालों के घेरे में

अर्चना का आरोप है, ‘दिल्ली महिला आयोग सिर्फ नाम का महिला आयोग है. वहां बैठी महिलाएं वास्तव में पितृसत्तात्मक सोच रखती हैं. आयोग की काउंसलर कहती हैं कि हमें तो हमारी मर्जी के बिना कोई चाय तक नहीं पिला सकता और तुमसे रेप भी कर लिया.’ युवतियाें का आरोप है कि जब चारों भूख हड़ताल पर बैठीं तो महिला आयोग की गाड़ी जंतर मंतर आई और उन्हें स्वाति मालीवाल से मिलाने ले गई. स्वाति मालीवाल से उन्हें जवाब मिला कि वे अब कुछ नहीं कर सकतीं क्योंकि अब मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है.  यासमीन का आरोप है, ‘वहां से (आयोग) हमें कोई मदद नहीं मिली, बस यह सलाह मिली कि सुनवाई में जाओ तो बेचारियों वाला पहनावा पहनकर जाना. मैं पूछती हूं कि रेप क्या बेचारियों के साथ ही होता है? पढ़ी – लिखी, कामकाजी लड़कियों के साथ नहीं हो सकता? आयोग का काम है महिलाओं के सम्मान की रक्षा करे, पर वह तो खुद हमें अबला दिखाने पर तुला हुआ है.’ 10 मई से पहले इन लोगों की सुनने वाला कोई नहीं था. लेकिन जैसे ही वे जंतर मंतर पहुंचीं, डीसीडब्ल्यू से लेकर पुलिस के आला अधिकारी और रक्षा मंत्रालय तक की गाड़ियां वहां पहुंचने लगीं. मीडिया के कैमरों ने उन्हें घेर लिया. 

यासमीन का आराेप है, ‘पुलिसवाले हमसे अछूत सा व्यवहार करते हैं. मजाक बनाते हैं हमारा. धरने के दौरान एसीपी साहब ने हमें मिलने बुलाया, पांडव नगर एसएचओ भी वहां मौजूद थे. वहां हमसे जिस अभद्रता से बात की गई उसे बता नहीं सकती. अब किससे करें शिकायत इसकी? उस आयोग से जो हमें अबला बने रहने की सीख देता है. इसलिए हम मांग कर रहे हैं कि न्याय दे दो या फिर इच्छामृत्यु का अधिकार. अब और जिल्लत हम सह नहीं सकते.’

(पहचान छिपाने के लिए नाम बदले गए हैं )

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 8 Issue 11, Dated 15 June 2016)

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