मारुति के मारे, व्यवस्था से हारे

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‘यह मामला अदालत में है सो फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं बोलना चाहूंगा. हां, जब यह घटना हुई थी तब मैंने कहा था कि राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखना चाहिए. अगर ऐसी घटनाएं घटेंगी तो हरियाणा से सारे उद्योग-धंधे बाहर चले जाएंगे’

                                                                                                                                          अशोक अरोड़ा, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष, इनेलो

दिल्ली में रहने वाले अमित कुमार इसी महीने जमानत पर रिहा हुए हैं. जब हमने अमित को फोन किया तो उन्होंने मीडिया के प्रति अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा, ‘अब क्यों मिलना चाह रहे हैं आप लोग… जब मैं जेल में था तब तो आपने मेरे परिवार, मेरे बीमार पिता का इंटरव्यू नहीं किया… अब जब मैं बाहर आ गया हूं तो आप मिलना चाहते हैं… मुझे आपसे नहीं मिलना… मुझे कुछ भी नहीं कहना… अब मैं बाहर आ गया हूं और मेरा परिवार बिल्कुल ठीक है… आपको मेरे परिवार की फिक्र करने की कोई आवश्यकता नहीं है.’  इतना कहने के बाद अमित ने फोन रख दिया. लेकिन कुछ ऐसे भी परिवार सामने आए जिन्होंने अपनी परेशानी, दुख और तकलीफ हमसे साझा की. अागे के पन्नों पर आप ऐसे ही कुछ प्रभावित परिवारों की आपबीती पढ़ेंगे जो इस दौरान कई दफा टूटे और फिर खुद ही जिंदगी की इस जंग में खड़े हुए.

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व्यथा कथा : कमल सिंह
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‘अपनी बच्ची के बचपन को नहीं देख पाया और न ही बीमारी के वक्त मां को क्योंकि मैं जेल में था’read

 

 

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व्यथा कथा : विकास कुमार
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                    ‘जमानत मिलने से कुछ नहीं बदला, फैसले का इंतजार है…                                   ’

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व्यथा कथा : नरेश कुमार
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बेटे के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि उसकी मां उसे याद करते हुए मर गई और उस वक्त वो वहां नहीं था..           

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व्यथा कथा : रमन विश्नोई
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  ‘पुलिस, न्यायालय, मीडिया किसी ने भी हमारा साथ नहीं दिया…’                                    read          

 

 पढ़ें : इस मामले का कानूनी पक्ष जानने के लिए विकास कुमार ने वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर से बातचीत की

 

5 COMMENTS

  1. Ab bhi in logo ko bhane ke liye kuch kro vrna aam aadmi ka kanoon k upr se vishvas uth jayega ab media chahe to inko jaldi se insaaf dila sakti h

  2. kaun kehta h bhart ek loktantrik desh h itne atyachar to angrej bhi nahi karte the……news padh kar aankhe bhar aayi unki pida koi nahi samj sakta in politician kya pata gribi kya hoti h hamare tex k paise se aish karte h…..muje manav ki banayi adalt m to insaf nahi milta par muje yakeen h ki us bhgwan ki adalt m faisla jroor hoga

  3. It seems Tehleka want to say A General manager of maruti Suzuki was murdered. But no one was the murderer. The story is totally one sided.
    Labour issue may be justified but cold blooded murder of any one is not justified. Those murderers were not ordinary workers. they were workers of maruti, getting good salary.

  4. sorry to say but these ppl were to blame..they needed this type of punishment. it doesn’t mean if u made a strong union u r having every right to do anything.they were such a morons.but gd if they realise the things from now on and will be better for their future.

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