‘मेरी लड़ाई किसी मजहब या मर्द जाति से नहीं, एक व्यक्ति से है’ | Tehelka Hindi

झारखंड, राज्यवार A- A+

‘मेरी लड़ाई किसी मजहब या मर्द जाति से नहीं, एक व्यक्ति से है’

सिर्फ दो माह पहले तक जिस तारा शाहदेव के नाम पर देश-भर में लव जेहाद का संक्रमण फैल गया था, वह तारा अब तनहा हो चुकी हैं. मीडिया और नेता उन्हें भूलकर आगे बढ़ गए हैं. तारा भारी तनाव के बीच वापस शूटिंग रेंज में लौटकर अपनी बिखरी हुई जिंदगी के ताने-बाने को दोबारा से बुनने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मुश्किलों का पहाड़ है कि कम ही नहीं होता
निराला 2014-12-31 , Issue 24 Volume 6
तारा शाहदेव से 26 और 27 नवंबर को हुई दो मुलाकातें बहुत निराश और उदास माहौल में हुईं, 26 को शूटिंग रेंज में और 27 को अहले सुबह उनके घर पर. लेकिन तारा उम्मीद का दामन पकड़े हुए थीं, शूटिंग में अपने भविष्य की उम्मीदों का दामन. दो दिन में हुई दो मुलाकातों के दौरान बातों-बातों में वह रोना चाहती हैं लेकिन खुद को जज्ब किए रहती हैं. यह वही तारा हैं जो दो माह पहले राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में थीं. उन्हें एक नए किस्म के कथित जेहाद का शिकार बताया जा रहा था- लव जेहाद. इसी नाम को केंद्र में रखकर झारखंड की राजधानी रांची के बड़ा तालाब इलाके के पास एक टूटे-फूटे मकान के बाहर ओबी वैनों की कतार कई दिनों तक लगी रही थी. दिल्ली-पटना-रांची से आए मीडियावालों का हुजूम लगा रहता था. भीड़ को चीरते हुए सायरन बजाती गाड़ियां भी दिन-भर आती-जाती रहती थीं तारा के घर. हर मिनट खबरिया चैनलों पर डरावने पार्श्वसंगीत के साथ खबरें एक-दूसरे से टकरा रही थीं- लव जेहाद की शिकार तारा.

इस दौरान तारा से दुनिया-जहान के वायदे भी किए गए. किसी ने कहा, 2016 तक निश्चिंत रहो, सारा खर्चा देंगे. राजनाथ सिंह ने कहा था कि बस दिल्ली जा रहा हूं, सीबीआई जांच शुरू हो जाएगी. लेकिन दो माह का समय गुजर चुका है, जांच होनी बाकी है. वह तारा अपनी राइफल के साथ तनहा पीछे छूट चुकी हैं. न तो उनके अकाउंट में 2016 तक निश्चिंत रहने के लिए पैसे हैं, न उनके और रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल के बीच के विवाद की सीबीआई जांच शुरू हुई है और न ही कोर्ट में मामला आगे बढ़ रहा है.

तारा अपने भाई द्वैत के साथ 15 दिसंबर से पुणे में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी में लगी हैं. हर सुबह उठकर अपने घर का काम निपटाती हैं, नौ बजे तक शूटिंग रेंज में पहुंचती हैं, दिन उधर ही गुजारती हैं, शाम सात बजे तक वापस घर आती हैं, फिर वकीलों के चक्कर लगाती हैं और अगली सुबह फिर वही दिनचर्या. तारा अपने घर से मोटरसाइकिल से निकलती हैं, तो छह पुलिसवाले भी पीछे-पीछे बाइक पर चलते हैं, जो उन्हें गार्ड के तौर पर मिले हैं.

तारा की कहानी सबको पता है. उन्होंने एक कथित कारोबारी रंजीत सिंह कोहली से जुलाई 2014 में शादी की थी. बकौल तारा, शादी के अगले दिन रंजीत सिंह कोहली और उसकी मां ने तारा को निकाह करने को कहा और बताया कि उसका इस्लामिक नाम रकीबुल है. तारा अचानक पेश आई इस चुनौती को स्वीकार नहीं कर सकीं. उन्होंने आनाकानी की. इस पर उनकी प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया, उन्हें मारा-पीटा गया, दागा-जलाया गया. अगस्त महीने में वह उस घर से भागने में सफल रहीं और बाहर निकलकर उन्होंने मीडिया और पुलिस के सामने अपने साथ हुई घटना बयान की. तारा की बातों के बाद रंजीत के किस्सों की पड़ताल शुरू हुई. जो कही-सुनी बातें अब तक सामने आ रही हैं, उनके मुताबिक रंजीत कई तरह के गैर कानूनी धंधों में शामिल रहा है. अनजान स्रोतों से उसने अथाह पैसा कमाया है. फिलहाल रंजीत अपनी मां के साथ जेल में है. तारा का केस हाईकोर्ट में है.

सामने पड़ी पहाड़-सी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए 22 साल की तारा एक बार फिर हिम्मत जुटाकर शूटिंग रेंज में हैं. पढ़ाई जारी रखने के लिए वह ग्रेजुएशन में एडमिशन ले चुकी हैं. भारी तनाव के बावजूद वह शूटिंग में अपना भविष्य तलाश रही हैं. अपनी ओर से बताने के बजाय सीधे तारा की ही जुबानी सुनते हैं उनकी कहानी

अोझल: अचानक देश की चेतना में शामिल हुई तारा शाहदेव फिलहाल गुमनाम जिंदगी बसर कर रही हैं. फोटो: अमित

अोझल: अचानक देश की चेतना में शामिल हुई तारा शाहदेव फिलहाल गुमनाम जिंदगी बसर कर रही हैं. फोटो: अमित

दो माह पहले तक आप इतने किस्म के लोगों से दिन-रात घिरी रहती थीं, अब अकेली हैं.
पता नहीं कहां से इतने लोग इकट्ठा हो गए थे. संगठन वाले, मीडियावाले, राजनीतिवाले. लेकिन मैं जानती थी कि यह कुछ दिनों की ही बात है. फिर कोई नहीं आएगा.

यानी आपको पहले से इसका अहसास था.
हां, अहसास था. कुछ मीडियावालों ने बताया भी था कि तारा, ये सब कुछ दिनों तक ही रहेगा. मैं भी आग्रह करती थी मीडियावालों से कि बस उस आदमी को जेल भिजवा दो, जिसे अपनी ऊंची पहुंच और ताकत का भ्रम है.

बाहर से भी बहुत लोग आए थे उस दौरान और बहुत से वायदे कर गए थे. वे अब भी याद करते हैं?
हां, बहुत सारे लोग आए थे, अब उनमें से नूतन ठाकुर से अक्सर बात होती रहती है. वह कोर्ट का मामला जानती-समझती हैं. वह कहती हैं कि हाईकोर्ट का फैसला आने दो उसके बाद देखेंगे. हाईकोर्ट का फैसला आए, तब आगे की योजना बनाएंगे.

हाईकोर्ट में क्या चल रहा है?
वहां तो अभी सिर्फ तारीख पर तारीख आ रही है. एक-डेढ़ माह में दो तारीख पड़ती है. सुनवाई का टाइम आता है, तो टाइम खत्म हो गया रहता है.

आपको लगता है कि वहां भी टालमटोल हो रहा है?
पता नहीं ऐसा क्यों हो रहा है. देख ही रहे हैं कैसे-कैसे लोगों के नाम रंजीत कोहली से जुड़े हुए हैं. हाईकोर्ट के जजों के ही नाम हैं तो और क्या कहा जा सकता है. शायद फैसला लेने में भी हिचक हो रही हो. अब देखिए कि 20 नवंबर को सुनवाई का दिन था. मेरा केस नंबर 54 था, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही 25 पर ही आकर रुक गई.

एक खबर यह भी आई थी कि तारा और रंजीत का मामला सिर्फ दहेज उत्पीड़न का मामला है.
कोर्ट से ऐसा कोई फैसला नहीं आया है. यह बात सिर्फ मीडिया में आई थी, पुलिस डायरी के आधार पर. पुलिस ने चार्जशीट में जो लिखा था, उसे मैंने भी पढ़ा. उसमें दहेज का कोई मामला था ही नहीं. हो भी नहीं सकता. कोई चाहकर बना भी नहीं सकता. मेरा मामला दहेज का है ही नहीं.

फिर यह बात आई कहां से?
पता नहीं कहां से आई. पत्रकारों ने बताया कि ऐसी रिपोर्ट आ रही है. उन्होंने सुनी-सुनाई बातों पर कह दिया, इसलिए अगले दिन से कुछ लिखा भी नहीं.

आपने विरोध दर्ज नहीं कराया कि ऐसी मनमर्जी क्यों कर रहे हैं पत्रकार?
नहीं, मैंने कुछ नहीं पूछा. अब मैं कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही हूं. अभी तो मैं जिंदा हूं और मुझे कोर्ट से उम्मीद है.

‘मुझे ईद की सेवईं आज भी पसंद है. अगर वह खुद इस्लाम मानता और मुझे फोर्स नहीं करता तो भी मुझे कोई समस्या नहीं थी’

अभी तो जिंदा हूं मतलब, जान का खतरा भी है क्या आपको?
आप तो देख ही रहे हैं कि जिनसे मेरी लड़ाई है वे कौन लोग हैं. छह गार्ड की बटालियन मेरे आगे पीछे किसलिए खड़ी है. लेकिन मैं अब मौत से नहीं डरती. जितना बुरा हो चुका है मेरे साथ, उससे ज्यादा बुरा नहीं हो सकता कुछ.

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 24, Dated 31 December 2014)

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  • Love jehad ghinawni shadarantra hai hindu samaj k pra tee