सितारा देवी: ओझल सितारा…

मुंबई आने के बाद उन्होंने कुछ ही फिल्मों में काम किया था जब उनका फिल्मों से मोहभंग होना शुरू हो गया. लेकिन वह कभी भी फिल्मी सर्किल से बाहर नहीं हुईं. तमाम फिल्मी कलाकारों से उनकी दोस्ती थी और वह उनके साथ नजर आ जाया करती थीं. कम ही लोगों को पता होगा कि मधुबाला और माला सिन्हा समेत उस दौर की अनेक अभिनेत्रियों को कथक का प्रशिक्षण सितारा देवी ने ही दिया था.

सितारा देवी सही समय पर सही सम्मान न दिए जाने से क्षुब्ध भी रहा करती थीं बहुत बाद में दिए गए पद्म सम्मान को उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया था कि अब इसे देने का कोई मतलब नहीं रह गया.

सितारा देवी में इस कदर उदारता भरी हुई थी कि उनके सामने किसी चीज की तारीफ किए जाने पर वह झट उसे सामने वाले को भेंट कर दिया करतीं. एक दफा जब बिरजू महाराज के चाचा शंभू महाराज ने सितारा देवी के हीरे के हार की तारीफ की तो उन्होंने यह कहते हुए वह उन्हें भेंट कर दिया कि महाराज यह आपसे अच्छा थोड़े न है!

महज 11 की उम्र में बनारस छोड़ देने वाली सितारा देवी अपने अंतिम समय में बनारस जाना चाहती थीं लेकिन उनकी यह ख्वाहिश पूरी न हो सकी. हजारों-लाखों की आंखों की सितारा देवी अब खुद सितारा बन चुकी हैं. इस बार कभी जो जोर से बिजली कड़के तो आसमान की ओर गौर से देखिएगा. शायद आपको सितारा देवी की एक झलक मिल जाए!

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