'मुझे उस छोटे से शहर से प्यार है, जहां से मैं हूं' | Tehelka Hindi

शख़्सियत A- A+

‘मुझे उस छोटे से शहर से प्यार है, जहां से मैं हूं’

कंगना अब यह महसूस कर रही हैं कि उन्होंने इस दुनिया को जो 7-8 साल दिए हैं. अब उसके नतीजे सामने हैं. पेश है कंगना रनौत से बातचीत के प्रमुख अंश...

कंगना, आपने परिवार के खिलाफ जाकर फिल्मों की तरफ रुख किया था. अब जबकि आप राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बन चुकी हैं तो परिवार की क्या प्रतिक्रिया है?

पापा बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा है कि यह मेरे जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा है. मेरा जन्म 23 मार्च को हुआ था और मुझे यह खबर भी उसी दौरान मिली थी. तो इससे बड़ा तोहफा और क्या होगा. ऐसा नहीं था कि मेरे पैरेंट्स मुझसे प्यार नहीं करते थे या मुझ पर ज्यादती किया करते थे. मैं जिस जगह से आई हूं. वाकई वहां कभी किसी ने ऐसा काम नहीं किया था. तो उनके लिए यह सबकुछ अजीबोगरीब था. और वे मुझे लेकर चिंतित थे. इसलिए साथ नहीं दिया. लेकिन धीरे-धीरे मैंने पहचान बनानी शुरू की तो उन्हें भी एहसास हो गया कि मैं समझदार हूं, सही कदम उठाऊंगी. हां, शुरुआती दौर में चूंकि परिवार साथ नहीं था तो सलाह की कमी में मैंने बहुत सारे पैसे बर्बाद किए, लेकिन अब सब ठीक है.

राष्ट्रीय पुरस्कार क्या मायने रखता है?
मेरे जैसी लड़की जिसे कुछ भी पता नहीं था कि वह मुंबई जाकर करेगी क्या, कैसे रहेगी. जब मेहनत-लगन से इतना महान पुरस्कार मिलता है तो जाहिर-सी बात है यह बहुत मायने रखता है. आत्मविश्वास बढ़ता है और ऐसा लगता है कि मेरी जैसी छोटे शहर की बाकी लड़कियां जो यह सोचकर बैठ जाती हैं कि उनका जन्म तो सिर्फ पति की सेवा करने के लिए हुआ है. वह कहीं न कहीं मेरे से प्रभावित होती हैं और उन्हें हौसला मिलता है. वे उदाहरण दे सकती हैं कि कंगना भी छोटे शहर की थी. उसने इतना सब कर दिया तो हम भी कर सकते हैं.

अपनी बातों में आप अपने छोटे शहर की लड़की होने का जिक्र जरूर करती हैं. इसकी कोई खास वजह?
हां, चूंकि हो सकता है कि ये बात बड़बोली लगे. लेकिन हकीकत ये है कि यह इंडस्ट्री नए खासतौर से छोटे शहर से आए लोगों को तुरंत स्वीकार नहीं लेती. लोग आपका मजाक उड़ाते हैं. आपकी बातचीत के ढंग, भाषा, पहनावे-ओढ़ावे, हर चीज पर कटाक्ष होते हैं. हमसे उम्मीद की जाती है कि हम उनके अनुयायी बनें, जो बाकियों ने किया है. इस तरह के लोग आपको पीछे की तरफ खींचने की कोशिश करते हैं. अगर आप इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं तो आपको भी इस दुनिया को समझने में वक्त लगता है, ढलने में वक्त लगता है, मुझे भी लगा. मैंने सब कुछ सीखा किया. सीखने की यह प्रक्रिया आज भी जारी है. और इसलिए मुझे उस छोटे से शहर से प्यार है, जहां से मैं हूं. मेरा शहर मेरे साथ चलता है.

Pages: 1 2 Single Page
Type Comments in Indian languages